Mysterious nights [part 80]

जब दमयंती की आंखें खुली तो वह किसी हॉस्पिटल में थी।  ज्वाला से बात करके, और उनकी सच्चाई  जानकर, उसकी तबीयत बिगड़ गई थी और वो बेहोश हो गई थी ,तुरंत ही उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर शीघ्र से शीघ्र उसे होश में लाने का प्रयास कर रहे थे ,उनका कथन था -यदि यह देर तक बेहोश रही तो, बच्चे की जान को भी ख़तरा हो सकता है। घर के सभी सदस्य अस्पताल में आ चुके थे और डॉक्टर की खुशामद कर रहे थे - उसे शीघ्र से शीघ्र होश में लाइये। मेरे घर भी सूचना भेज दी गई थी, ताकि मेरे मायके वाले भी , अपनी बेटी से आकर मिल लें। 


जब मेरी आँखें खुली तो घर के सभी सदस्य परेशान मेरे कमरे के आस -पास ही घूम रहे थे ,जब डॉक्टर ने उन्हें बताया-' कि मुझे होश आ गया है' ,सभी मुझसे मिलने की इच्छा ज़ाहिर करने लगे किन्तु डॉक्टर ने मेरे पति' जगत' को ही मेरे पास भेजा।' जगत' ने मेरी तरफ देखा ,तब उनके चेहरे पर एक मुस्कान आई किन्तु लग रहा था जैसे -वो बहुत थक गए हैं ,मेरे करीब आते ही ,मेरा हाथ अपने हाथों में ले लिया और मेरे करीब बैठकर पूछा -अब कैसी हो ?

मैंने भी ज़बरन ही मुस्कुराने का प्रयास किया और पूछा -आप कैसे हैं ?थके -थके से लग रहे हैं। 

तुम मेरी छोडो !तुम अपनी बताओ !तुम्हें क्या हुआ था ?जो बेहोश हो गयीं ,भोजन तो ठीक से किया था। 

हाँ ,पता नहीं, कैसे अचानक चक्कर सा आ गया था ? मैंने बात को टालते हुए कहा ,वो स्थान और मेरी हालत ऐसी भी नहीं थी जो मैं कुछ कहती। 

 घर के सभी सदस्य तुम्हारे लिए चिंतित थे।

  मेरे लिए चिंतित थे या फिरअपने इस बच्चे के लिए ,मैंने फीकी सी मुस्कान के साथ पूछा -क्या और लोग भी आये हैं ?

पूरा परिवार ही यहीं है ,तुम्हारे मम्मी -पापा भी आये हैं ,मम्मी -पापा का सुनकर मुझे ज्यादा ख़ुशी नहीं हुई किन्तु अच्छा लगा, क्या उनसे मिलना चाहोगी ?

बुला दीजिये !वैसे अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ। उन्होंने मेरे हाथों को हल्के से दबाया और बोले -कुछ खाओगी !

हाँ ,चाय और बिस्कुट मंगवा दीजिये ,हल्की भूख लगी है। 

जूस मंगवा देता हूँ ,जूस पीना। 

वो बाद में,कहते हुए मैंने उठने का प्रयास किया, वो तुरंत ही वापिस लौटे और मुझे सहारा देकर उठाकर बैठाया ,क्या ये मुझसे इतना प्यार करते हैं ?मेरे मन में, तुरंत ही प्रश्न उठा ,जहाँ पर अपना कोई योगदान न हो ,वहां यदि कोई  तुम्हारे साथ ऐसा कुछ कर रहा है, जिसकी तुम्हें उससे अपेक्षा ही न हो, तब भी ये मन ,उसे टटोलने का प्रयास करता है ,आसानी से विश्वास नहीं करना चाहता। मैं जानती हूँ, जगत जी मुझे चाहते हैं किन्तु कभी -कभी मुझे लगता, उन्होंने मेरी परिस्थिति का लाभ उठाया है। मैंने इस मन को कई बार समझाया ,अब वो मेरे पति हैं किन्तु बीच -बीच में इसे न जाने क्या हो जाता है ?उन पर शक़ करने लगता है।तब भी दिल को बहलाया ,मुझसे नहीं तो, अपने बच्चे के लिए तो ये सब करेंगे ही। मुझे सहारा देकर बैठाया और बाहर चले गए। 

उनके जाते ही ,घर के सभी लोग अंदर आ गए, सब लोग इकट्ठा होकर, मेरे पलंग के समीप आकर खड़े हो गए सभी के चेहरों पर उत्सुकता और प्रसन्नता नजर आई। तभी मेरी मम्मी आगे आईं और पूछा -बेटा !अब कैसी हो ?

अब ठीक हूँ ,मेरे इतना कहते ही वो बोलीं - भगवान का लाख -लाख धन्यवाद ! वैसे तुझे हुआ क्या था ?

मैं कुछ कहती, उससे पहले ही सुनयना देवी बोल उठीं -इससे कितनी बार कहा है ,इधर -उधर ज्यादा मत जाया कर किन्तु न जाने क्या सोचती रहती है और कहाँ -कहाँ घूमती रहती है ?गयी होगी कहीं और न जाने कैसे बेहोश हो गयी ?

बहनजी !मैं भी तो वही पूछ रही हूँ ,आख़िर हुआ क्या था ?

कुछ नहीं ,आप बेकार में ही परेशान हो रहीं हैं ,शायद सुबह ठीक से नहीं खाया होगा ,तभी जगत जी जूस लेकर आ गए ,जूस देखकर मैंने मुँह बनाया ,तब वो बोले -पहले इसे पी लो ! मैं चाय वाले से कह आया हूँ वो कुछ देर में चाय लेकर भी आ जायेगा। 

पी लो !बेटा ! सेहत के लिए यह बहुत जरूरी है ,चाय भी आ जाएगी, मम्मी ने कहा -इस हालत में तुम्हें अपना ज्यादा ध्यान रखने की आवश्यकता है कहते हुए ,उन्होंने मेरे होठों से वो जूस का गिलास लगा दिया।

इसे कहते हैं ,माँ !हमारी तो ये सुनती नहीं और आपने झट से पिला दिया जगत जी खुश होते हुए बोले -ऐसा करिये आप भी यहीं रह जाइये !

नहीं ,मैं क्या बच्ची हूँ ? पापा भी तो वहां अकेले होंगे ,यहाँ तो आप सभी मेरा ख्याल रख तो रहे हैं। 

कुछ देर पश्चात वहां नर्स आती है और कहती है - ये अब ठीक हैं ,आप इन्हें घर ले जा सकते हैं। 

नहीं ,अब ये यहीं रहेंगी ,और इनका ख़्याल अब तुम्हें ही रखना होगा ,परिवार के आगे खड़े लोगों में से पीछे से जगत जी ने कहा। 

अभी बच्चे के होने में समय है ,नर्स ने कहा। 

तो क्या हुआ ?यहां आराम से रहेंगी वरना ऐसे ही अचानक  कोई दिक्क्त आ गयी तो इसका कौन ज़िम्मेदार होगा ?

दामादजी !आप तो नाहक ही परेशान हो रहे हैं ,बच्चे के होने में अभी समय है ,इतने दिन पहले ये यहां क्या करेगी ?

इसका वहां कौन ख़्याल रखेगा ? ये अपना ख्याल रखती नहीं है ,मैं डॉक्टर से बात कर लूंगा चिंतित स्वर में जगत जी बोले।

 आगे कोई दिक्कत न आए ,मुझे हॉस्पिटल में ही भरती कर दिया गया था। नियत समय पर एक सुंदर सा प्यारा सा, बच्चा हमारी जिंदगी में आया। ठाकुर खानदान की खुशियां दोगुनी हो गईं, सभी खुश थे, गांव वालों को ,दावत करवाई गई, ढोल बजाए गए किंतु मेरी जिंदगी में,अभी भी बहुत ही हलचल मची हुई थी और यह बात जब मैंने अपनी मां से कही।

दमयंती की माँ को जब इस घर की सच्चाई और इस घर के लोगों के विषय में पता चलेगा ,तब क्या होगा ?आइये आगे बढ़ते हैं। 

  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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