जब मंच पर प्रतियोगिता में सफल होने के लिए ,'तमन्ना' को बुलाया गया तो ,शिखा ने अपने स्थान पर फिर से नित्या को भेज दिया किन्तु आज उसका ''तमन्ना'' के नाम से परिचय कराया गया,जिसकी जानकारी स्वयं नित्या को भी नहीं थी किन्तु जब उसे कुछ होश आया, तब वो शिल्पा को एक अलग स्थान में ले गयी और उससे पूछने लगी -तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया ? नित्या के सवाल का शिल्पा के पास कोई जबाब नहीं था ,वह स्वयं ही नहीं समझ पा रही थी ,उसने ऐसा क्यों किया ?उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था ,बस एकदम से उसे जो सूझा उसने कर दिया।
अचानक ही वहां ऐसा क्या हुआ था,नित्या ने प्रश्न किया। कुछ देर तक वहां चुप्पी छाई रही ,शिल्पा भी अपने किये पर पछता रही थी किन्तु न जाने क्यों 'कुमार' की भावनाओं का ख़्याल रखते हुए उसे कुछ सूझा ही नहीं और नित्या को मंच पर चढ़ा दिया।
तभी नित्या को जैसे कुछ स्मरण हुआ और उसने पूछा -तूने ,प्रतियोगिता के लोगों को क्या कहकर मनाया ?वो लोग तो तुझे जानते हैं ,तुझे पेंटिंग बनाते हुए देखा भी है ,क्या उन लोगों ने कोई आपत्ति नहीं जतलाई ?उसने शिल्पा की तरफ देखा।
उदास स्वर में शिल्पा बोली -वो तो मैंने उन लोगों से कहा -मेरे पैर में ज्यादा दर्द है ,जो स्टेज़ पर है वो भी मेरी ही बहन है।
मैं तुम्हारी बहन हूँ, किन्तु इनाम तो मैं पहले भी ला चुकी हूँ ,अभी भी ला सकती थी किन्तु इसके लिए मेरा 'तमन्ना 'के नाम से परिचय कराने से क्या लाभ था ?
ये सब मैंने 'कुमार' के लिए किया ,तूने ही तो कहा था -' पहले उसकी कल्पना को जान लो !'उसकी कल्पना बेहद खूबसूरत है जिसकी मुझसे कोई समानता नहीं।
तो क्या हुआ ?यदि वो तमन्ना की कलाकृतियों से प्यार कर सकता है तो उससे भी कर सकता है।
तू समझ नहीं रही है ,मेरी कलाकृतियां ही तो सुंदर हैं ,मैं नहीं।
ये तेरा वहम है ,तू किसी और को' तमन्ना' बनाकर उसके सामने लाकर खड़ा कर देगी और वो उसे चाहने लगेगा। कल्पना से प्यार करना आसान है ,क्योंकि वो उसकी सोच के आधार बनी है किन्तु असली' तमन्ना' तो जीती जागती इंसान होगी ,उसकी कल्पना से मेल खा भी सकती है और नहीं भी।ये नाम भी तो एक कल्पना है ,उस कलाकार का असल नाम तो ''शिल्पा ''है ,जो अपने को' तमन्ना'के पीछे छुपाकर रखती है। कभी अपने आपसे भी मिलकर देखा है ,उस शिल्पा से जो सच्ची है ,अच्छी है किन्तु दुनिया से डरती है यदि लोगों ने असली शिल्पा को पहचान लिया ,तो कहीं उसे घृणा से न देखने लगें। मेरा विश्वास कर ,तू इतनी बुरी भी नहीं लगती है,जो तू सच्चाई से भाग जाना चाहती है ,अपने आपसे मिलने का प्रयास तो कर..... एक बार कुमार को अपनी सच्चाई तो बताकर देखती ,हो सकता है ,उसे तू इसी रूप में पसंद आ जाये।
नहीं आई ,तो..... उसने मुझे ठुकरा दिया तो...... बेचैनी से शिल्पा बोली।
ठुकरा दिया, तो क्या ?ज़िंदगी समाप्त हो जाएगी ,क्या इस सम्पूर्ण संसार में एक कुमार ही है। क्या सुंदर लड़कियों को धोखे नहीं मिलते ,उनके दिल नहीं टूटते। तेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी यही है ,तू सच्चाई से भाग जाना चाहती है,उसको स्वीकार कर ,क्या कॉलिज में भी तू ऐसे ही डरी सी रहती है,अपने इस नाम के साथ खुश रहती है या नहीं। तब तू' तमन्ना 'के साथ ही क्यों ऐसी अपेक्षा रखती है ? क्यों तू दोहरी ज़िंदगी जी रही है ? नित्या बोली - तूने ,आज मेरा परिचय 'तमन्ना 'के रूप में लोगों से करवाया ,हालाँकि तेरा उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ़' कुमार 'को ही' तमन्ना' से मिलवाना था फिर तूने यह कैसे समझ लिया ? कि मैं भी उससे प्यार करने लगूंगी सबकी अपनी- अपनी जिंदगी है। तू उसे मुझ पर और मुझे उस पर थोप नहीं सकती।
नित्या की बातें सुनकर शिल्पा चुपचाप शून्य में ताक रही थी,देखने में ,ऊपर से वो शांत नजर आ रही थी किन्तु उसके अंदर बवंडर मचा हुआ था। उसे इस तरह शांत देखकर नित्या ने पूछा -अब क्या सोच रही है ?क्या चाहती है ?अब या तो कुमार को सब सच-सच बता दे, वरना मैं उसे सारी सच्चाई बता दूंगी।
नहीं ,ऐसा मत करना ,उसका दिल टूट जायेगा ,अचानक ही, वो अपने विचारों से बाहर आकर बोली।
अच्छा ,उसके दिल की बड़ी चिंता है ,और मैं जो तुझे इतनी देर से, गला फाड़ -फाड़कर समझा रही हूँ ,वो तुझे सुनाई नहीं आया।
मैं सब समझ रही हूँ ,मुझे लगता है ,मुझसे गलती तो हुई है किन्तु उस गलती को सुधारने के लिए मुझे थोड़ा समय भी तो चाहिए।
चल तुझे समय दिया, जितना समय चाहती है उतना समय दिया किंतु मैं इतना कहना चाहती हूं, इस झूठ से कुछ भी नहीं होने वाला है। इससे पहले की किसी के भी मन में, कोई गलतफहमी फैले , उससे पहले ही स्थिति को संभाल लेना चाहिए। अब हम दोनों को घर चलना चाहिए , कहते हुए नित्या , शिल्पा का हाथ पकड़ कर उस संस्थान से बाहर आ गई।
उधर कुमार, कुछ लोगों से पूछ रहा था -क्या यही , वह कलाकार' तमन्ना' है।
जी हां, वही' तमन्ना' जी हैं , आपको कोई आपत्ति है ? आप उनके विषय में क्यों जानना चाहते हैं ?
नहीं बस मैं तो वैसे ही, पूछना चाह रहा था, क्या यह पेंटिंग उन्होंने ही बनाई थी ?
हां, वही पेंटिंग बना रही थीं।
क्या मैं उनका फॉर्म देख सकता हूं ?
क्यों, आपको उनका फॉर्म देखने की क्या आवश्यकता है ?वैसे हम किसी की व्यक्तिगत जानकारी किसी को नहीं देते।
यह आप कैसी बातें कर रहे हैं , मैं भी उनका एक बड़ा प्रशंसक हूं , बस यही देखना चाहता था कि यहां जिस लड़की ने पेंटिंग बनाई और जीती क्या वही तमन्ना है।
हमारे निर्णायक मंडल ने जो भी निर्णय दिया है उसके आधार पर कह सकते हैं वही तमन्ना जी होगीं। वैसे ऐसा कई बार हुआ है , कलाकार का असल नाम कुछ और होता है, और वह दूसरे नाम से अपनी कलाकृतियों को भेजता है, कुछ लेखक भी ऐसे हुए हैं जो अपने नाम को बदलकर अपनी रचनाओं को लिखते हैं।
इसका मतलब आप यह कहना चाहते हैं , यह तमन्ना जी नहीं हो सकतीं।
यह मैंने कब कहा ? अगर वह तमन्ना जी नहीं होती तो यहां बैठकर पेंटिंग नहीं बनाती , कलाकृति तो उन्होंने स्वयं ही बनाई है उनके साथ उनकी बहन भी आई थी क्योंकि तमन्ना जी के पैरों में चोट लगी हुई थी, उनकी सहायता के लिए।
किंतु जो मंच पर खड़ी थी, वह तो मुझे सही- सलामत दिख रही थी।
अब यह बात मैं कैसे कह सकता हूं ?क्योंकि मैं तो यहाँ था , आप जाइए ! अब मेरा भी, जाने का समय हो रहा है। उनके विषय में जो भी जानकारी लेनी हो , फिर कभी आकर ले सकते हैं।
क्या आगे भी कोई और प्रतियोगिता होगी ?
प्रतियोगिताएं तो होती रहती हैं , अब आप जाइए ! मुझे और भी काम है उस व्यक्ति ने कुमार को वहां से हटाने के लिए बहाना बनाया।
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