Khoobsurat [part 14]

कुमार के मन में अनेक प्रश्न थे, वह उन प्रश्नों का जवाब चाहता था, इसके लिए वह उस संस्थान के काउंटर पर भी गया था किंतु वहां भी उसे कोई सटीक उत्तर नहीं मिला। उसको इस तरह परेशान होते देखकर उसका दोस्त बोला - मेरे यार !तू,अब  क्या कर रहा है, मेरी तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है, पहले तो यह इसलिए परेशान था कि उसे तमन्ना नहीं मिल रही है ,यह जानना चाहता था ,तमन्ना कैसी है ?और अब तमन्ना दिख गई है , तो इसे यकीन ही नहीं हो रहा है कि वही' तमन्ना' है। 

कोई बात नहीं है, जाने क्यों ? मन ही नहीं मान रहा था, हो सकता है, वही 'तमन्ना' हो, किसी कारणवश उसने उस समय अपना, सही नाम न लिया हो, आओ, चलें !घर चलते हैं। 



अगले दिन कॉलेज में शिल्पा को देखकर,' कुमार खुश हुआ और उसने शिल्पा से पूछा  -कल तुमने तमन्ना जी को तो देखा ही होगा। 

नहीं, मैं उन्हें  नहीं देख पाई , क्योंकि मैं जल्दी ही घर आ गई थी, मैं गई तो'' तमन्ना जी' को देखने के लिए ही थी किंतु मुझे जल्दी घर आना पड़ा। 

अच्छा, तुम वहां पर नहीं थीं,सोचते हुए कुमार बोला। 

ख़ैर ,तुम मेरी छोडो ! तुम तो वहां थे ,अब बताओ ! तुम्हारी कल्पना कैसी थी यानी कि तुम्हारी 'तमन्ना जी' कैसी थी ?

अच्छी थी, ठीक थी गहरी स्वांस लेते हुए कुमार ने जबाब दिया।  

बस अच्छी थी, ठीक थी, बस इतना ही ,क्या वो सुंदर नहीं थी ? तुम्हारी कल्पना से मेल नहीं खा रहीं थीं । 

मेरी कल्पना सच्ची थी, किंतु वह मुझे थोड़ी बनावटी लगी, कुछ नयापन नहीं लगा क्योंकि उस लड़की को तो मैं, पहले भी देख चुका था तब तो उसने अपना परिचय 'तमन्ना' की सहेली के रूप में दिया था ,आज पता चलता है ,वही तमन्ना है ,बस यही बात कुछ हज़म नहीं हुई।  

तभी तो मैंने तुमसे कहा था -यदि तुम्हारी तमन्ना जी तुम्हें पसंद न आए, तो मैं भी दोस्ती के लिए तैयार हूं। 

मुस्कुराकर कुमार बोला -इतनी भी बुरी नहीं है, जो तुमसे दोस्ती करनी पड़े,हँसते हुए कुमार बोला।  

अच्छा , तो मैं दोस्ती के लायक भी नहीं हूं , मुंह फुलाते हुए, शिल्पा बोली। 

नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है , तुम भी एक अच्छी कलाकार हो , सच्ची हो, तमन्ना की तरह छुपती तो नहीं हो।

क्या वो छुपती है ? मैं कुछ समझी नहीं।

इसमें न समझने वाली, कोई बात ही नहीं है ,मेरा मतलब था, वो अपने आपको छुपाकर रखना चाहती है,न जाने उसे किस बात का ड़र है ?   

होगी ,उसकी कोई मजबूरी ,किन्तु कल तो सबके सामने आ ही गयी ,तुमने उसे देखा भी है ,तो अब इसी ख़ुशी में हमारी दोस्ती पक्की ! कहते हुए शिल्पा ने अपना हाथ आगे बढ़ाया।

इसमें ख़ुशी की क्या बात है ? वही बात तो मुझे ख़टक रही है,उसने अब तक अपने को छुपाये क्यों रखा ? आगे कोई और मजबूरी आ गई और उसने तब कह दिया -वो भी तमन्ना नहीं है ,तो क्या होगा ?कुमार की बात सुनकर शिल्पा ,अपना हाथ पीछे खींचने वाली थी ,तभी न चाहते हुए भी, कुमार ने शिल्पा से हाथ मिलाया।

 हाथ मिलाते हुए शिल्पा के हाथ काँप रहे थे ,तुम्हें क्या हुआ ?कुमार ने पूछा। 

 अपने आपको सम्भालते हुए ,तमन्ना ने पूछा - अब तुम ,अपनी तमन्ना से कब मिलवा रहे हो ?

अभी तक तो, हम ही नहीं मिले हैं , वह क्या मुझे जानती होगी ? मुझे भी तो उसे अपना परिचय देना होगा। उससे मिलने के लिए न जाने, क्या करना होगा ?

उनके इतने प्रशंसक हैं , कोई ना कोई तो उनका फोन नंबर या घर का पता जानता ही होगा। 

घर का पता तो मैं भी जानता हूं, किंतु वहां किसी से मिलने नहीं देते। 

आश्चर्य से शिल्पा ने पूछा -क्या तुम उसके घर का पता जानते हो ?

हां, एक दिन तो मैं सारा दिन वहां पर खड़ा रहा था , शायद तमन्ना की एक झलक दिख जाए किंतु न ही वह बाहर आई और न ही मैं उसे देख पाया और न ही अंदर जा पाया। इसका मतलब, तमन्ना जी ,तुम्हें बेहद पसंद हैं, उनकी कलाकृतियों की वजह से ही। 

हां, यह भी कह सकते हैं , उसकी कलाकृतियों ने ही तो, मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा वरना मैं क्या किसी ''तमन्ना'' को जानने वाला था ? 

अच्छा, मान लो ! कोई उससे भी अच्छी कलाकृति बनाये तो तुम, उसके भी दीवाने हो जाओगे !

यह तुम कैसी बातें कर रही  हो, कलाकार कोई भी हो, उसकी कला की हमें कद्र करनी चाहिए। कल तो तुम्हारी भी कलाकृति अच्छी बनती है, तो क्या??? कहते-कहते कुमार रुक गया।

 शिल्पा ,कुमार के शब्दों का आशय समझ गयी,उसकी आँखें नम हो आईं ,तब वो बातों को बदलते हुए बोली - क्या तमन्ना से मिलना नहीं चाहोगे ?

हाँ ,सोच तो रहा हूँ किन्तु उसके तो न जाने कितने प्रशंसक होंगे ?

तो क्या हुआ ?कोई एक तो विशेष हो सकता है। 

वो तो जबकि जब देखी जाएगी ,पहले उसके विषय में पता तो कर लूँ ,इसके लिए उससे मिलना होगा। देखते हैं ,क्या होता है अनिश्चन्तता की स्थिति में कुमार बोला -तुम अपनी क्लास में जाओ !जो भी होगा देखते हैं। 

एक दिन नित्या के लिए एक फूलों का एक गुलदस्ता आया ,उसे देखकर नित्या ने पूछा -ये कौन लाया ?किसने भेजा है ?नित्या ने अपने नौकर सरजू से पूछा। 

हमें नहीं मालूम ,कोई लड़का आय रहा और बोला -ये 'तमन्ना 'जी के लिए है ,इससे पहले कि हम उससे कहते, यहां कोई तमन्ना जी नहीं रहती हैं ,उसने ये हमरे हाथ में थमाया और चला गया। सरजू की बात सुनकर नित्या मुस्कुराईं और बोलीं -कोई बात नहीं। 

वो तो ठीक है ,किन्तु इसे रखें कहाँ पर ?

इसे ,हमारे कमरे में रख दो ! नित्या समझ गई थी, कि यह' तमन्ना' के ही किसी प्रशंसक ने भेजा होगा, तभी उसने सरजू से पूछा -वह लड़का देखने में कैसा दिखता था ?

वह तो कोई दस या बारह बरस का लड़का था, यह बात सुनकर, नित्या हंसने  लगीं और पूछा -क्या उस लड़के को तुमने पहले भी कभी देखा है। 

नहीं, पर मुझे लगता है यह गुलदस्ता उसका नहीं होगा, उसे किसी ने 'तमन्ना 'को देने के लिए कहा होगा और वो यह गुलदस्ता यहां देकर चला गया। 

 क्यों, तुम्हें क्यों ऐसा लगता है ?

 क्योंकि वह लड़का बहुत जल्दबाजी में था और कह रहा था -यह 'तमन्ना' को दे देना। उसे शायद मालूम भी नहीं होगा कि 'तमन्ना' कौन है ?और यहाँ नहीं रहती। 

शायद ,तुम सही कह रहे हो।  

आज शिल्पा अपनी बहन नित्या से मिलने उसके कॉलिज जाती है किन्तु नित्या कहती है -आज कहीं बाहर जाकर कॉफी पीते हैं।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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