जी नहीं करता , फुर्ती से उठ रसोई में जाऊँ।
पहले की तरह , खूब व्यंजन बनाऊं।
जी चाहता है ,कोई आकर कहे-खाना बनाया है।
कैसा बनाया है ? चखकर तो बताइये !
सोचती हूँ ,कोई आकर कहे! भोजन तैयार है।
आकर भोजन कर लीजिये !
बेफ़िक्र हो ,ज़िंदगी से ,ज़िंदगी का मज़ा लीजिये।
इंतजार सा रहता है, हाथों से बदले स्वाद का ,
कुछ नया बनाया है,खाने में बदलाव आया है।
लड़ीं हैं ,बहुत ज़माने से और अपने आपसे।
कोई कहे !अब तो थोड़ा आराम कर लीजिये।
कब तक? इस तरह गमों को उठाती रहेंगी ?
थकन है, ज़िंदगी भर की, मिटा लीजिये।
मन करता है,कोई तो कहे- आराम कीजिये !
उत्तरदायित्वों से मुक्त हो,विचरण कीजिये।
न कांधे पर कोई भार,चिंता से मुक्त जियें।
ज़िंदगी है ,आपकी थोड़ा तो मज़ा कीजिये।
कैद रहेंगीं ,कब तक ? अपने आप में ,
इस ज़िंदगी को थोड़ा सा तो ढ़ील दीजिये।
