Shaitani mann [part 115]

इंस्पेक्टर सुधांशु ,इस बात को सोचने पर मजबूर हो गया ,हो सकता है, यह सही कह रहा हो ,हमने किसी गलत व्यक्ति को ही पकड़ लिया हो ,तब वह उससे पूछता है - क्या तुम जानते हो ? इस तहखाने का रास्ता बाहर खेतों की तरफ भी जाता है।

 नहीं सर !इस विषय में मुझे कोई जानकारी नहीं है ,आप ये क्या बातें कर रहे हैं ?मुझे यहाँ आये अभी कुछ दिन ही तो हुए हैं। मुझे यहाँ की इतनी जानकरी कैसे हो सकती है ?

हम्म्म्म !अच्छा ,तुम यहां अपना नाम पता लिखवाकर,जा सकते हो ,जब भी तुम्हारी जरूरत होगी ,तुम्हें बुलवा लिया जायेगा। 


जी ,कहते हुए तुरंत ही बाहर निकल गया। आपको क्या लगता है ? सर !ये जो भी कह रहा है ,सही बोल रहा है विकास ने, सुधांशु से पूछा। 

लगता तो नहीं है किन्तु इसके विषय में विस्तार से पता लगाना होगा क्योंकि ये जिस स्थान पर मिला ,हमें लगता है,अवश्य ही ये कुछ न कुछ तो जानता ही होगा। मैं तो यह सोच रहा हूं, कॉलेज के गोदाम से लेकर उस'' मड़ हाउस'' तक का यह रास्ता किसने बनाया होगा ? और उसका उद्देश्य क्या रहा होगा ? कुछ समझ नहीं आ रहा है , कॉलेज के  प्रिंसिपल से भी बात करनी होगी। आओ ! चलो चलते हैं, कहते हुए इंस्पेक्टर सुधांशु अपनी टीम के लोगों को साथ लेकर, कॉलेज की तरफ चला जाता है। 

कॉलेज में पहुंचते ही सुधांशु ने,  प्रिंसिपल से, सवाल- जवाब करने आरंभ कर दिए ,प्रिंसिपल साहब ! यह आपके कॉलेज में क्या हो रहा है? क्या चल रहा है, कुछ समझ नहीं आ रहा ? 

मेरे कॉलेज में क्या चल रहा है, ऐसा आप क्यों पूछ रहे हैं ?

 आपके कॉलेज में, दो हत्याएं हो चुकी हैं। आपके कॉलेज में तहखाना बना हुआ है , क्या आप उसके विषय में कुछ जानते हैं ?

मेरे कॉलेज में तो कोई तहखाना ही नहीं है, और मैंने आपको पहले ही बताया था, यह हत्याएं सिर्फ एक हादसा है मेरे यहां के छात्र बहुत ही ईमानदार और अच्छे हैं। 

वह तो पता चल ही रहा है कितने ईमानदार हैं ?तभी तो नशा करते और बेचते हैं और आपको पता ही नहीं व्यंग्य से सुधांशु बोला।  

देखिए !आप हमारे कॉलेज की बदनामी कर रहे हैं। आज तक मेरे पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। क्या आपने ऐसा करते हुए, किसी को पकड़ा है ?

प्रिंसिपल साहब ! आप यह सब मुझे मत समझाइए ! मैं सब जानता हूं, कॉलेज में क्या होता है ? किंतु अभी मैं आपसे उस तहखाने के विषय में पूछने आया हूं जो आपके कॉलेज से लेकर, कॉलेज के पीछे उन खेतों से जुड़ा हुआ है। 

ऐसा कैसे हो सकता है ? आईये ! चलिए मुझे दिखाइए !

इंस्पेक्टर स्वयं उन्हें पुस्तकालय के गोदाम की तरफ ले जाता है और जहां से उस लड़के को पकड़ा था वहीं पर वे लोग पहुंच जाते हैं। गोदाम के पीछे एक दरवाजा था, उस दरवाजे को खोलने पर वह रास्ता दिखलाई दे रहा था, उस रास्ते से चलते हुए, वह आगे बढ़ रहे थे और सीढ़ियों के माध्यम से ऊपर चढ़ते हुए चले गए और सीधे उस ''मड हाउस'' में पहुंच गए। क्या अभी भी आप यही कहेंगे, कि आपको इस विषय में कोई जानकारी नहीं थी। 

प्रधानाचार्य जी ,आश्चर्य से ये सब देख रहे थे,तब वो बोले - जी हां, मुझे सच में ही ,इस विषय में कोई जानकारी नहीं थी।  इससे पहले, यहां पर अवश्य ही कुछ किया गया होगा किसी कारण वश इस रास्ते को चुना गया होगा वरना ऐसा रास्ता बनाने का कौन प्रयास करेगा ?यदि मेरे रहते यहाँ कुछ बनता तो मुझे अवश्य ही इसकी जानकारी होती।  मुझे इस विषय में, कॉलेज वालों से संपर्क करना होगा।अब  वही  इस विषय में कुछ बता सकते हैं। यह कहते हुए, प्रिंसिपल ने 'अपना पल्ला झाड़ लिया।'  सुधांशु को लग रहा था, इस मुलाकात से अवश्य ही कोई परिणाम सामने आएगा लेकिन जहां से चले थे , वहीं के वहीं रह गए। तब उन्होंने उस नए लाइब्रेरियन के विषय में पूछा। 

वापस लौटते हुए ,उन्होंने उस नए लड़के के विषय में भी सुधांशु ने उनसे जानना चाहा। 

हां, यह नया लड़का है , काबिलियत के आधार पर ही इसको यहाँ रखा गया है। क्या आप चाय या पानी कुछ लेंगे ? यह कहकर प्रधानाचार्य ने, अपनी बातों की इति श्री करनी चाही। 

नहीं, हम ड्यूटी पर हैं, अभी हमें चलना होगा , कहते हुए इंस्पेक्टर अपनी कुर्सी से उठ खड़ा हुआ और बोला -आपके ही कुछ छात्रों से और बात करनी है, आप वही कमरा हमें दे दीजिए !

प्रधानाचार्य ने, अपने कमरे की घंटी बजाई जिसको सुनकर, उनका स्टाफ का आदमी 'दयाराम' आ गया, तब उन्होंने उससे कहा -इंस्पेक्टर साहब को, एक खाली कमरा दे दो ! चाबी लेकर वह आगे -आगे जा रहा था और इंस्पेक्टर सुधांशु और उसके टीम के सदस्य उसके पीछे थे एक कमरे में पहुंचकर उन्होंने, उस व्यक्ति से कहा -जाकर नितिन को बुला लाओ !

कुछ देर पश्चात वहां नितिन पहुंच जाता है, नितिन के आते ही इंस्पेक्टर एकदम से बोला -अब ज्यादा हमें परेशान करने की कोई आवश्यकता नहीं है जो कुछ भी तुमने किया है जो कुछ भी हुआ है। हमें सही-सही और स्पष्ट रूप से बता दो ! तुम शिमला में क्या करने गए थे? दो महीने रहकर तुमने वहां क्या किया ?

सर! आपको मैंने पहले ही बता दिया था, मैं थोड़ा परेशान था इसलिए कुछ दिनों के लिए मैं अपने मन  को शांत करने के लिए शिमला चला गया था। 

क्या, तुम रुबीना को नहीं जानते हो ?बिन लाग लपेट के सुधांशु ने उससे प्रश्न किया। 

कौन रुबीना ? मैं किसी रुबीना को नहीं जानता।

 वही रुबीना जो उसी होटल के , कमरा नंबर दो में रह रही थी , जिसमें तुम ठहरे थे ,कुछ याद आया ,उसके चेहरे पर नजरें गड़ाते हुए सुधांशु ने पूछा। तुम एक सप्ताह ही उस होटल में रहे, उसके बाद तुम और रुबीना दोनों गायब हो गए। अब झूठ मत बोलना ! क्रोधित होते हुए इंस्पेक्टर सुधांशु ने कहा क्योंकि वहां के सीसीटीवी कैमरे में, तुम्हारी और रुबीना की तस्वीरें हमने देखी हैं। 

तुम तो अपनी बात से साफ मुकर गए, किंतु हमने भी ठान लिया था जब किसी अपराधी को पकड़ना ही है तो पूरे सबूत के साथ पकड़ना है। अब हमें साफ-साफ बताओ ! तुम वहां रुबीना से कैसे मिले ? और फिर रुबीना के साथ कहां गायब हो गये और उसके पश्चात, रुबीना कहां गई ?

इंस्पेक्टर की बातें सुनकर नितिन, परेशान हो गया था, किंतु वह यह बात स्वीकार भी नहीं करना चाहता था कि वह रुबीना को जानता था और उसने रुबीना के साथ कुछ किया है। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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