विकास !जरा उन लड़कों को बुलवाना,पता तो चले, क्या वे इसे जानते हैं ? यह तो अपने को उस कॉलेज का लाइब्रेरियन बता रहा है , पता तो चले, वे इसे पहचानते हैं या नहीं।
जी सर !कहकर विकास बाहर निकल गया, कुछ देर पश्चात' सुमित सहगल' और' रोहित चोपड़ा' को साथ लेकर थाने में प्रवेश करता है। सुमित और रोहित को अपने सामने वाली कुर्सी पर बैठने के लिए ,इंस्पेक्टर सुधांशु इशारा करता है और उनसे पूछता है -तुम लोगों ने हमसे उस ''मड हाउस'' में एक सन्यासी का जिक्र किया था , क्या तुम लोग जानते थे? कि वहां पर एक' तहखाना' भी है।
जी, हमसे किसी सन्यासी का ज़िक्र नितिन ने ही किया था ,हमने उस सन्यासी को कभी नहीं देखा ,जब हम लोग नितिन का पीछा कर रहे थे, तभी हमें तहखाने का पता चला, उससे पहले हम नहीं जानते थे, कि वहां पर एक' तहखाना' भी हो सकता है।
क्या तुम लोग, उस तहखाने के अंदर गए थे ?
जी जाने का प्रयास तो किया था, और कर भी रहे थे किंतु तभी हम लोगों के बीच नितिन आ गया और हमसे ऐसा व्यवहार कर रहा था जैसे वो ,हमें जानता ही नहीं है। वह तो वहां हमें मरने -मारने पर उतारू हो गया था । उस समय हमारा, उससे जमकर झगड़ा हुआ था ,ऐसा लग रहा था,जैसे वह हमें मारकर ही दम लेगा।
क्या तुम लोगों ने, उससे जानने का प्रयास नहीं किया कि वह तुम्हारे साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा था ?
सर !हमने पूछा भी था, कि तुम यह क्या कर रहे थे ?उस झगड़े में हममें से किसी की जान भी जा सकती थी। उसे तो कुछ भी स्मरण नहीं था।
ऐसा कैसे हो सकता है ,? तुम लोगों के साथ रहता है ,तुम्हारा दोस्त है, लेकिन उसके कुछ रहस्य हैं, जो वह तुमसे भी नहीं बताता।
हमें तो लगता था, वह हमारा सबसे अच्छा दोस्त है, किंतु ऐसा नहीं है।
क्या तुम लोग मुझे नितिन के विषय में कुछ और भी बता सकते हो ?
हम जो भी जानते होंगे, वह आपको अवश्य ही बताएंगे , क्या आपको नितिन पर किसी बात को लेकर शक है ?
नहीं, अभी पूरी तरह से कह नहीं सकता, प्रयास तो यही रहेगा कि असली कातिल को ढूंढ लिया जाए। हो सकता है, तुम्हारी बातों से कुछ सबूत मिल जाए। अच्छा, क्या तुम लोग यह बता सकते हो ? नितिन के पास पार्टियां करने के लिए इतना पैसा कहां से आता है ?
इंस्पेक्टर के इतना कहते ही, दोनों एकदम शांत हो गए और एक दूसरे को देखने लगे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उन्हें इंस्पेक्टर से क्या कहना चाहिए ? यदि वह इंस्पेक्टर से सच्चाई बताते हैं , हो सकता है वे भी उनके शक के घेरे में आ सकते हैं।
देखो, परेशान होने की आवश्यकता नहीं है , हम जबरन ही किसी को नहीं पकड़ेंगे , जिसने कोई गुनाह किया होगा तभी तो वह हमारी गिरफ्त में आएगा। हो सकता है ,नादानी में, तुम लोगों से भी कुछ गलतियां हो गई हों किंतु अन्य गलतियों को भी छुपा कर तुम और भी सबसे बड़ी गलती कर रहे हो। अच्छा, यह बताओ ! ये ''कार्तिक चौहान'' कौन है ?
''कार्तिक चौहान का नाम आते ही, दोनों के चेहरे सफेद पड़ गए , और दोनों एक साथ बोले -आपको कार्तिक भैया के विषय में कैसे पता चला ?
हम पुलिस वाले हैं, यहां मुफ्त की पगार नहीं ले रहे हैं , जानकारी तो रखनी पड़ती है। अब तुम हमें सच-सच बताओगे या नहीं , या फिर तुम्हें किसी न किसी के खून के चक्कर में. अंदर कर दें। तुम्हारे घर वाले तो तुम्हारे छुड़ाने भी नहीं आएंगे।
सर! आप हमारे विषय में जानते ही क्या हैं ?
बहुत अच्छी तरीके से जानते हैं, दोनों के परिवार, अच्छे और रईस है , तुम लोगों की हरकतों के कारण, तुम्हारे घर वाले भी तुम्हें पसंद नहीं करते, और ना ही तुम्हें, छुट्टियों में बुलाना पसंद करते हैं। इंजीनियरिंग करने के लिए तुम यहां आए हो, किंतु तुमने इसे पूरा करने में 6 साल लगा दिए। घर के लोग तुम्हें पसंद नहीं करते हैं, तुम्हारी हरकतें, उनके परिवार के लिए एक धब्बा बन गई है। इसलिए तुम्हें पैसा पहुंचा देते हैं किंतु मेरी मानो तो, इस साल परिश्रम करके अच्छे से पास होकर निकल जाना और अपने अच्छे भविष्य की योजना बनाना। यह तो अच्छा है, तुम पर कोई'' क्रिमिनल केस'' नहीं है। जब तुम भविष्य में सही राह चुनोगे , तो घर वाले भी तुम्हारे साथ खड़े नजर आएंगे। कई बार माता-पिता बच्चों की हरकतों के कारण परेशान हो जाते हैं उनसे किसी अच्छे की उम्मीद छोड़ देते हैं, बस यही तुम्हारे साथ हुआ है वरना वे लोग ,अभी भी तुम्हें प्यार करते हैं। अब तो मुझे बताओगे कि'' कार्तिक चौहान'' कौन है ?
इस बार भी दोनों चुप रहते हैं, वह समझ नहीं पा रहे थे कि हमें 'कार्तिक भैया' के विषय में बात कर पुलिस की मदद करनी चाहिए या नहीं।
देखो ! यदि' कार्तिक चौहान' ने यदि कोई बड़ा अपराध नहीं किया है तो उस पर कोई आंच नहीं आएगी लेकिन यदि वह बच्चों को बहला - फुसला कर उनसे कुछ गलत कार्य करवाता है , तब तुम सोचो ! वह कितने लोगों का भविष्य खराब कर देगा ?इसीलिए सोच- समझ कर जवाब देना ! हो सकता है तुम लोगों को बिगाड़ने में, उसका ही हाथ हो क्योंकि ऐसे लोग कभी किसी के भी सगे नहीं होते उन्हें सिर्फ अपने मतलब से मतलब होता है।
अबकी बार इंस्पेक्टर की बात रोहित को उचित लगी और वह बोला -सर ! मैं बताता हूं , एक उम्मीद के साथ इंस्पेक्टर ने उसकी तरफ देखा। तभी सुमित ने उसके हाथ पर हाथ मारा, और बोला -हम लोग, अपने लोगों को कभी धोखा नहीं देते।
यानी कि तुम लोग भी, उसके साथ हो, इंस्पेक्टर ने उसी की बात को पकड़ लिया, इसका अर्थ है, तुम उसके साथ ही हो नए छात्रों का जीवन बर्बाद करने में, तुम लोगों का भी उतना ही हाथ है।
नहीं, सर ऐसा नहीं है , हम भैया का सम्मान करते हैं , उन्होंने हमारी कई बार सहायता की है।
यही सहायता तो तुम्हारे, जीवन को बर्बाद कर रही थी।
मतलब !
मतलब क्या ? जिसे तुम सहायता समझ रहे थे , वह तो तुम्हारी सर्वनाश की तैयारी थी , वैसे मैं पूछ सकता हूं उसने, तुम्हारी किस तरीके से सहायता की है। अब तुम यह तो नहीं कह सकते कि उसने पैसे से हमारी सहायता की है क्योंकि तुम्हारे परिवार वालों के पास तो, पैसे की कोई कमी नहीं रही है।
आप सही कह रहे हैं , किंतु जब हम फेल होने लगे और कॉलेज से हमारी शिकायतें जाने लगीं , तब घर वालों ने भी पैसे देने से इनकार कर दिया था इसलिए हम अपने घर वालों से नाराज भी थे।
तुम्हारा फेल होने का कारण क्या था ? क्या तुम लोगों ने पढ़ाई ठीक से नहीं की थी , हो सकता है तुम्हारे नाकामी का कारण भी वही' कार्तिक भैया' हो , क्या वह अकेला ही है या और लोग भी उसके साथ हैं।
इंस्पेक्टर सुधांशु के अन्य सवालों का जबाब पाने के लिए चलिए ,आगे बढ़ते हैं।
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