Shaitani mann [part 105]

पारस की पहली पत्नी, शिप्रा उससे उखड़ी- उखड़ी रहती थी । पारस उसके इस व्यवहार का कारण, समझ नहीं पा रहा था। अपनी तरफ से वह इस रिश्ते को, बार-बार ठीक करने का प्रयास कर रहा था। इसी के चलते, एक दिन पारस ने शिप्रा से पूछा -आज 'अक्षय तृतीया' है, आज के दिन कुछ गहना खरीदते हैं, तुम्हें कुछ खरीदना हो तो बता देना। आज के दिन ,सोने के गहने खरीदना शुभ माना जाता है। शिप्रा ने, जब यह बात सुनी,तो हाँ में गर्दन हिलाई किन्तु कुछ नहीं बोली और चुपचाप तैयार होने चली गई। 

कभी-कभी पारस को उसके इस व्यवहार पर भी, अचंभा होता। कोई सामान खरीदना हो, शॉपिंग करने के लिए जाना हो तो तुरंत तैयार हो जाती है किंतु जब इसे किसी काम के लिए कहो, या फिर, अपने प्रति वह उसका प्यार देखना चाहता है, जिसके लिए इतने दिनों से तड़प रहा है। नदी के पास होकर भी प्यासा ही है। एक दिन ऐसे ही ,भावुक क्षणों में उसने अपने मन का दर्द अपने दूर के जीजा से कह भी दिया था। 


 तब उन्होंने उससे कहा था -अब वो तेरी है ,तू उसे ब्याहकर लाया है, कोई भगाकर नहीं लाया है। उस पर तेरा अधिकार है ,वो आगे नहीं बढ़ती है तो तुझे ही आगे बढ़ना होगा। 

यह तो जबरदस्ती हुई ,मैं जबरदस्ती के रिश्ते में विश्वास नहीं करता ,आजकल तो महिलाओं के लिए इतने कानून बने हैं ,उसके व्यवहार को देखकर तो लगता है- पता नहीं, कौन सी धारा लगवा दे ?मैं नौकरी पेशा इंसान हूँ। अभी तक इज्जत से जी रहा था ,ऐसे ही जीना चाहता हूँ। 

साले साहब ! मैं होता तो अपना अधिकार लेता ,प्यार से नहीं तो बहलाकर ,थोड़ा ज़बरन ,अरे !अभी तक उसने ,तुम्हारा इश्क़ महसूस ही कहाँ किया है ?और जब महसूस करने लगेगी ,स्वतः ही तुम्हारे समीप दौड़ी चली आएगी। मैं होता तो, पहली रात्रि ही खाली नहीं जाने देता। 

मुझे क्या मालूम था ?उसके मन में कुछ और चल रहा है ,मैंने भी सोचा था ,थकी होगी ,अपनी ही है ,कहीं भागे थोड़े ही जा रही है। 

तभी उसने तुम्हें लुलू समझ लिया ,अरे अपनी पहली रात्रि कोई  ऐसे ही जाने नहीं देता है। उसी रात्रि  उसे अपने प्रेम का रसपान करा देना था। चली भी जाती ,तो मलाल तो न रहता। तब वो हँसते हुए बोले -कहीं तुममें ही तो कोई कमी नहीं। 

यह आप कैसी बातें कर रहे हैं ?झेंपते हुए पारस बोला।

झेंपना नहीं था ,उसे दिखला देना था, किसी मर्द से पाला पड़ा है। पहले समय में आते ही पहले ,''मधुर रात्रि '' मनती थी ,उसके पश्चात मज़ाल है ,उसकी पत्नी आना -कानी करे या इधर -उधर झांके। तुम पढ़े -लिखो की यही तो परेशानी है। हर बात को सहजता से ,उसका इंतजार करेंगे ,इतने में कोई और आकर उसके दिल पर अपना अधिकार जमा लेता है। तभी जैसे उन्हें कुछ एहसास हुआ और बोले -कहीं ऐसा तो नहीं ,ये विवाह से पहले किसी ओर से प्रेम करती हो और ये उसके लिए तड़प रही हो और तुम्हें भी तड़पा रही हो। 

नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है ?यदि ऐसा होता तो ये विवाह से इंकार कर सकती थी। इससे कोई जबरदस्ती थोड़े ही हुई है। 

साले साहब !ऐसा तुम समझते हो। तब इसने आज तक तुमसे बात क्यों नहीं की ?तुम्हें अपनाया क्यों नहीं ?मुझे तो लगता है ,ये तुम्हारा पागल बना रही है और कुछ नहीं। 

एक बार इससे स्पष्ट बात करो !इसके मन की बात जानो ,ये चाहती क्या है ?

वो तो समझाकर चले गए किन्तु पारस के मन में एक ड़र छोड़ गए ,पारस को उनकी बात ठीक लगी ,हाँ ,ऐसा हो सकता है किन्तु साथ ही एक डर भी उसके अंदर प्रवेश कर गया। कहीं ऐसा ही हुआ ,तो क्या होगा ?कितने अरमानों से इसे ब्याहकर लाया था ?यदि ये सच में ही ,किसी अन्य से .....  आगे तो सोचा भी नहीं जा रहा। तब मेरा क्या होगा ?इसीलिए इस सच्चाई को जानना चाहकर भी जानना नहीं चाहता है ,उससे अनजान बने रहना चाहता है। 

तभी ,शिप्रा लाल साड़ी में आकर पारस के सामने खड़ी हो गयी। पारस ने एक नजर शिप्रा पर डाली , उफ्फ़ कितनी खूबसूरत लग रही है ? इससे कैसे पूछूं ?कि ये किसी और से तो प्यार नहीं करती है तो क्या हमारा जीवन इसी तरह चलता रहेगा। ऐसे समय में  तो यह न जाने कैसी हो जाती है ? तुरंत इसका व्यवहार बदल जाता है। अपनी मनपसंद का खाना बनाती है, खा लेती है लेकिन कभी पारस से नहीं पूछा-कि तुम क्या खाओगे या तुम्हें खाने में क्या पसंद है ?अपने सवालों के जबाब न पाकर उसका मन चीत्कार कर उठा -आख़िर ये चाहती क्या है ?तुम चलो ! मैं आता हूँ ,कहकर पारस अंदर गया। कुछ देर यूँ ही अपने को आईने में देखा और वापस आ गया। 

सोच रहा था ,आज इसे इसके मनपसंद के गहने ख़रीदवाऊँगा ,शायद यह प्रसन्न हो जाये। अब तक के व्यवहार को देखते हुए तो नहीं लगता किन्तु प्रयास करने में क्या जाता है ?सोचकर नीचे आया और अपनी गाड़ी निकाली। बहुत देर तक गहने देखने के पश्चात उसने एक ''रानी हार ''और एक ''मंगलसूत्र ''पसंद किया। उसे देखकर और सोचकर पारस के चेहरे पर मुस्कान आई ,'मंगलसूत्र' पसंद किया है ,जिसके नाम का पहनेगी उसको अपने करीब भी आने नहीं देती फिर सोचा ,शायद आज इसे मंगसूत्र का सही अर्थ मालूम हो जाये। बिल देखकर ,पारस चौंक गया ,इतना पैसा उसके पास होगा भी या नहीं ,वो तो सोच रहा था। एक अंगूठी या सोने के एक दो कड़े ले लेगी किन्तु इतने भारी गहनों के विषय में सोचा भी नहीं था किन्तु उसके सामने कुछ कहना नहीं चाहता था। तब बोला -तुम चलो !मैं आता हूँ। 

वो भी उठकर बाहर चली गयी ,शायद वो जानती थी ,इसके पास इतने पैसे नहीं होंगे इसकी बेइज्जती होगी और जब नहीं दिलवा पायेगा तो उसे कहने का मौका मिल जायेगा कि बड़े आये मुझे यहाँ लेकर जब सामान खरीदवाने की औकात ही नहीं थी ,तब मेरे सामने कैसे ''डींगे मार रहे थे ''आभूषण लेने है। मुस्कुराती हुई बाहर आ गयी। 

कुछ देर पश्चात पारस दोनों हार लेकर आ गया, वैसे वो एक लाख ही लेकर आया था दुकानदार उसे अच्छे से जानता था अगले दिन बाक़ी पैसे देने की कहकर ले आया हालाँकि स्वर्णकार ऐसे उधार नहीं करते  हैं किन्तु इससे पहले भी ,उससे सामान खरीदा है और वो जानता है ,उसका दफ्तर और घर कहाँ है ?

इस सबके बावजूद भी, शिप्रा के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। न ही वह उसे कुछ बताती थी। पारस जानना चाहता था, उसका यह व्यवहार किसलिए है ? लेकिन उसके पिता की नम आंखें देखकर वह चुप हो जाता। वह  उसे एक दिन ''अक्षय कुमार'' की वह पिक्चर दिखाने ले गया, जिसमें'' कैटरीना कैफ'' किसी दूसरे से प्यार करती थी किंतु विवाह अक्षय से हो जाता है और धीरे-धीरे, उसे अक्षय की खामोशी में प्यार नजर आने लगता है, उसे एहसास होता है कि वह जिससे प्यार करती है वह उसके लायक ही नहीं है।

 क्या शिप्रा पर उस फ़िल्म की कहानी का कुछ असर हुआ ?पारस की ज़िंदगी में कुछ बदलाव आया या नहीं ,आया तो कैसे ?आइये आगे बढ़ते हैं -''शैतानी मन ''के साथ 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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