एक औरत ही दूसरी औरत के दर्द को समझ सकती है, यदि वो समझना चाहे तो..... उसे समझाने का प्रयास भी कर सकती है और कई बार गलत राह भी दिखा देती है। यह इंसान के उद्देश्य और उसकी सोच पर निर्भर करता है कि वह उसे कौन सा रास्ता दिखाना चाहता है। बंदिनी कहने को तो, उस घर की नौकर है किंतु आज तो वह भी, बिना पूछे ही शिखा को सलाह दे रही है, कि अब शिखा को किसी का हाथ थाम लेना चाहिए।
मन ही मन शिखा सोच रही थी ,अब तक तो इन लोगों ने जबरन ही, मुझे इस रूप में रखा ,जब मैंने यह सब सहर्ष स्वीकार किया तो अब जीवन में फिर से हलचल मचाने लगे। ये इंसान भी न किसी को सुकून से रहने देना नहीं चाहते हैं।
बंदिनी अपनी ही धुन में बोले जा रही थी ,तब शिखा, उससे नाराज होकर कहती है -जिस बात की तुम्हें कोई जानकारी नहीं है ,उसमें क्यों व्यर्थ की सलाह दे रही हो ? तुम जानती नहीं हो, उन्होंने मुझसे क्या कहा है ?
जी हां ,जानती हूँ , ये लोग , आपको फिर से अपने घर की बहु बनाना चाहते हैं, इसमें तो कोई बुराई भी नहीं है। बहुत सी जगह पर यह रिवाज होता है, जब बड़ा भाई नहीं रहता है तब छोटा भाई उसके उत्तरदायित्व को पूर्ण करता है। उसे समझाते हुए कहती है - इतना लंबा जीवन है, आप अकेले कैसे काट पाओगी ? मेरा विचार तो यही है , शीघ्र से शीघ्र कोई अच्छा निर्णय लेकर, जीवन में आगे बढ़ जाना चाहिए।
शिखा मन ही मन सोच रही थी ,इससे ये सब किसने कहा ? हो सकता है दमयंती जी ने ही इसे ऐसा करने के लिए कहा होगा किन्तु मुझे समझाने के लिए एक नौकरानी की सहायता लेनी की क्या आवश्यकता पड़ गयी ? शिखा को समझाते हुए वह बोली - माता-पिता हमेशा साथ नहीं रहते, अब उनका सहारा बनने का प्रयास करो ! जब तक जिंदा हैं,तब तक उनका सहारा बनती रहोगी किंतु उनके चले जाने के बाद, अकेली रह जाओगी और आप नहीं जानती हैं, अकेली औरत के सबसे ज्यादा दुश्मन होते हैं क्योंकि सही- सलामत तो उसे जीने ही नहीं देंगे।
अभी आपने जिंदगी में कुछ देखा ही कहाँ है ? समय रहते ही, किसी का हाथ थाम लो ! जीवन को काटने में थोड़ा सहयोग मिल जाएगा। वो तो ये लोग अच्छे हैं ,जो आपको इस तरह आगे बढ़ने का मौका दे रहे हैं ,वरना सारी उम्र इस हवेली में विधवा से रूप में बीत जाती।
आज तुम बहुत बड़ी-बड़ी बातें कर रही हो ,तुमसे यह सब कहने के लिए किसने कहा ?
मैं एक आम लड़की हूं , जो अपने घर की खर्च के लिए इस परिवार में आकर कार्य करती हूं किंतु'' आम इंसान की जिंदगी इतनी आसान नहीं है या यह भी कह सकते हैं -''आम इंसान की जिंदगी' आम 'नहीं रहती हैं ,जब उसे बड़े कष्ट उठाने पड़ते हैं, संघर्ष करने पड़ते हैं और जब वो जीवन में पीछे मुड़कर देखता है ,तो 'ख़ास' हो जाती है। उस ख़ासियत को लिए ही वो जीवन में आगे बढ़ता जिसकी जानकारी स्वयं उसको भी नहीं होती। '' उस आधार को देखा जाए तो विशेष ही हो जाती है किंतु विशेष तब होती है, जब आदमी अपनी उस मंजिल तक पहुंच जाता है वरना तमाम उम्र ऐसे ही संघर्ष करता रहता है, उसके संघर्षों की कोई सीमा नहीं होती।तब आप इनमें से किसी से भी विवाह करके अपने संघर्ष को कम कर सकती हैं।
इनमें से ही क्यों ? जब मैं स्वतंत्र हूं, किसी से भी विवाह कर सकती हूं तो मुझे अपनी इच्छा से कहीं भी विवाह करके की छूट होनी चाहिए।
आपको छूट मिली तो है, अपनी पसंद का वर चुनने की, घर बदलने की नहीं ,इस घर में वही होता है जो मालकिन चाहती है। मैंने सुना है, जब ये पहली बार आई थी तब ये भी बहुत रोई थीं , इस घर को, इस घर के नियम को, अपनाने में इन्हें समय लगा था। इन्हें इस परिवार पर क्रोध भी है किंतु आज ये उन्हीं नियमों का पालन कर रही हैं।
मन ही मन शिखा ने सोचा-आज एक के लिए कह रही हैं , कल को कुछ और भी कह सकती हैं दूसरे के लिए भी कह सकती है मैं इनका कहना नहीं मानूंगी। होंगे,इनके अपने रीति- रिवाज, या इनके उसूल किंतु मेरी अपनी भी कुछ सोच है। मैं इनकी गलत बातों को तनिक भी स्वीकार नहीं करूंगी , इसके लिए फिर चाहे, मुझे इनसे लड़ना ही क्यों न पड़े ? ज्यादा से ज्यादा क्या होगा ? यह मुझे अपने घर से बाहर कर देगीं , ऐसा तो मैं चाहती ही हूं। ये मुझे घर से बाहर कर दें और मैं अपने घर चली जाऊं किन्तु इनके बेटों से विवाह तो नहीं करूंगी।
बहु जी ! क्या सोच रही हैं ? इसमें ज्यादा सोचने की आवश्यकता नहीं है , जीवन अच्छे से संवर जाएगा, मुझे लगता है, जब आप यहां आई थीं, तब आपका निर्णय गलत था आपको यहां आना ही नहीं चाहिए था किंतु अब जब आ ही गई हैं , तो सोच समझ कर निर्णय लीजियेगा।
तुम मेरे जीवन में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रही हो ? मैं क्या करूं, क्या नहीं, तुम्हें इस बात से कोई मतलब नहीं होना चाहिए ?
आप सही कह रहीं हैं, किंतु मैंने उन दिनों में आपको परेशान होते हुए भी देखा है, रोते हुए भी देखा है खुशी का कारण बन रहा है, तो फिर ठुकराना कैसा ? आप ही बता दीजिए, आप क्या चाहती हैं ?
कुछ देर तक शिखा कुछ नहीं बोली ,तब उसने बंदिनी से पूछा - अच्छा, तुम बताओ ! इन चारों भाइयों में कौन सा श्रेष्ठ है ?
शिखा की यह बात सुनकर वह शर्मा गई, और झेंप कर बोली -आप यह कैसी बातें पूछ रही हैं ? मैं तो यहां कुछ घंटे के लिए ही आती हूं ,मैं इस गांव की लड़की हूँ ,ऐसा सोच भी नहीं सकती। आप तो यहां महीने भर से रह रही हैं , क्या अब तक आपने किसी को समझने का प्रयास भी नहीं किया ?
प्रयास तो वह व्यक्ति करता है, जब उसकी आगे बढ़ने की इच्छा होती है जब मेरे मन में ऐसा कोई विचार ही नहीं था, तो प्रयास कैसा ?
हाँ ,यह बात भी सही है।
शिखा के जीवन में क्या घटनेवाला है ? क्या वो दमयंती का कहना मानेगी या अपनी ही ज़िद पर अड़ी रहेगी ?दमयंती का बंदिनी को शिखा को समझाने के पीछे उसका उद्देश्य क्या है ?आइये आगे बढ़ते हैं।
