Mysterious nights [ 54]

आज शिखा को ,दमयंती और उसके परिवार  की सोच के विषय में मालूम पड़ता है,जब दमयंती उससे कहती है - तुम्हें अब दूसरा विवाह कर लेना चाहिए और वो भी तेजस के भाइयों में से ही किसी से।

तब शिखा उनसे कहती है -ये कैसे हो सकता है ? मेरा' तेजस' से विवाह हुआ है और अब उसकी विधवा बनकर ही रहना चाहती हूँ। 

 हम यह मानते हैं ,तुम्हारा विवाह पूर्ण हुआ ही नहीं था किन्तु अब होगा। 


 यह क्या जबरदस्ती है ? जब चाहा ,किसी की बेवा बन जाओ ! जब चाहा,अब विवाह कर लो !  यह बात आप भी जानती हैं कि मेरा विवाह पूर्ण नहीं हुआ था किंतु उस समय तो  आप लोगों ने मेरे परिवार वालों को भी भ्रम में डाल दिया था और मुझे जबरन ही बहु बनाकर यहाँ लेकर आये। क्या आप समझ सकती हैं ?उस समय मेरे घरवालों पर कितना दबाब था ? उसी दबाव के चलते मुझे भी कुछ नहीं सूझा यहाँ आपके बेटे की 'बेवा' बनकर आ गयी। मुझे इस तरह यहां रोके रखने का आपका उद्देश्य क्या था ?भावुक होते हुए शिखा ने पूछा। 

मुझे, तुम्हें इस सबकी  सफाई देने की जरूरत नहीं है , तुम्हें मैं पहले ही बता चुकी हूं, कि तुम्हें इनमें से ही किसी एक को चुनना होगा ,तुम चाहो तो, चारों के संग भी रह सकती हो ,वो स्पष्ट रूप से बोलीं - हमारे घर में फूट नहीं पड़नी चाहिए , इस परिवार की एकता को बनाए रखने के लिए हम, बहुत कुछ कर सकते हैं। प्यार से तुम्हें समझा  रहे हैं, वरना हमें कुछ कठिन कदम उठाने होंगे। यह तुम सोच लो ! बेवा का जीवन बहुत जी लिया।  हमारे बच्चों में क्या कमी है ? पैसे की कोई कमी नहीं है। पढ़े- लिखे हैं, व्यापार संभालते हैं। 

दमयंती की बातें सुनकर शिखा तो जैसे सदमे में आ गयी ,ये कैसा प्रस्ताव लेकर आई हैं ? चार पतियों के साथ रहने का.... छीः  इन्हें  कहते हुए शर्म भी नहीं आई। तब वो बोली - जब वे इतने काबिल हैं , तो अब तक उनका विवाह क्यों नहीं हुआ ? वे तो तेजस से बड़े थे। 

हमारे घर में एक ही बहू आती है , जो इस परिवार की एकता को बनाए रखती है। 

शिखा की आँखों में वही रात्रियां तैर गयीं  ,जब उसने दमयंती को कभी' ज्वाला' के साथ तो कभी' बलवंत' के साथ देखा था ,मन ही  मन उसका ह्रदय दमयंती के प्रति घृणा से भर उठा , मुँह कसैला हो गया व्यंग्य से बोली - मुझे मालूम है ,आप इस परिवार की एकता के लिए बहुत कुछ कर रहीं हैं।

 दमयंती ने उसकी बातों को नजरअंदाज किया और बोली - तुम्हारे पिता ने तुम्हारा रिश्ता तेजस के लिए चुना था। गर्वित- गौरव में से किसी को नहीं चुना, तो इसमें हम क्या कर सकते हैं ? तुम्हें भी तेजस ही पसंद था, अब हम जा रहे हैं, हम उम्मीद करते हैं, तुम अपना उचित निर्णय लोगी। 

दमयंती के चले जाने के पश्चात, शिखा परेशान हो उठी , इतने दिनों इन्होंने मुझे विधवा के रूप में रखा, यह जानते हुए भी कि मेरा विवाह पूर्ण नहीं हुआ था , जबरन ही मुझे यहां ले आए , इसके पीछे इनका क्या उद्देश्य हो सकता है ? और अब जबरन ही, मुझसे अपने बेटों  का विवाह करना चाहती है। अभी तक तो मैं यही समझ रही थी कि ये  मुझसे नाराज हैं  इसीलिए बात नहीं करती हैं किंतु मुझे तो लगता है- यहां कुछ और ही'' खिचड़ी पक रही है।'' किससे पूछूं, कहां जाऊं ? कुछ समझ नहीं आ रहा। एक पल को इन्होंने मुझे मुक्त भी कर दिया, किन्तु दूसरे ही पल फिर से मुझे बांध लेना चाहती हैं ,अपनी विवशता पर उसके नेत्र सजल हो उठे।

शिखा बिस्तर पर लेट गयी ,मन ही मन उन दिनों को सोच रही थी,जब उसके जीवन में तेजस ख़ुशियाँ बनकर आ गया था  -अचानक ही ,जीवन में कितनी खुशियां आ गयीं थीं ?अपने पापा की लाड़ली को अच्छा परिवार मिला ,लड़का भी अच्छा था फिर न जाने कहाँ से ये अजब तूफान आया और मेरी ज़िंदगी का उद्देश्य ही जैसे समाप्त हो गया। मैं अब एक इंसान नहीं रह गयी हूँ बल्कि एक वस्तु बनकर रह गयी हूँ जिसकी अपनी कोई इच्छा या पहचान नहीं। बस कठपुतली की तरह परिस्थितियों के हिसाब से जीवन जी रही हूँ। ये परिस्थितियाँ भी तो मेरी ही पैदा की हुई हैं और अब मैं यहाँ रहने को जैसे विवश हो गयी हूँ।

 मैं विवश क्यों हूँ ? क्या मेरी कोई मजबूरी है ?अपने आपसे से प्रश्न पूछती है। माना कि तेजस के प्रेम के लिए मैं कुछ दिनों के लिए कमज़ोर पड़ गयी थी किन्तु अब ये सब क्यों सहन कर रही हूँ ?सोचते हुए उसकी आँखों के कोरों से आंसू की एक बूंद  लुढ़ककर तकिये पर आ गिरी।  

 इनके बेटों के विषय में, मुझे तो कोई भी ठीक नजर नहीं आता, आएगा भी कैसे ? कभी उन्हें मैंने इस दृष्टि से देखा ही नहीं ,तो प्रयास ही क्या करना था ?उठकर बैठ जाती है ,यहां  किसी को जानती भी नहीं,उस दिन को सोचकर , गर्वित का तो व्यवहार भी, अच्छा नहीं है। उसे लग रहा था, जैसे जबरदस्ती ही उसको उस पिंजरे में रखने का प्रयास किया जा रहा है।अब  वह यहां से उड़ जाना चाहती थी। इस बात की सूचना तो शायद मेरे घर वालों को भी नहीं होगी। बिना किसी को जाने मैं कैसे, किसी निर्णय पर पहुंच सकती हूं ?

बिस्तर से उतरकर ,आईने के सामने खड़ी हो जाती है अपने खुले बालों का जूड़ा बनाते हुए,अपने आपसे ही  कहती है -अब मुझे यहाँ रहना ही नहीं है ,इस परिवार से जुड़े सम्पूर्ण बंधन तोड़ देना चाहती हूँ । तेजस के प्रति जो अपराधबोध उसके अंदर पनप रहा था जिसके कारण उस रिश्ते को निभाने का प्रयास कर रही थी। वह अब समाप्त हो चुका था।

 कुछ दिनों के लिए उसके मन में जो भाव आए थे ,वे सच्चे थे,अद्भुत थे,वे भाव जीवनभर दिल के किसी कोने में सहेजे रहूंगी किन्तु अब दमयंती के व्यवहार और उसकी सोच को सुनकर न जाने, कहां तिरोहित हो गए ? मन ही मन निर्णय लिया,अब अपने घर जाकर घरवालों से मिलना है और उनको सम्पूर्ण सच्चाई से से अवगत कराकर जीवन में आगे बढ़ जाना है, वो अपने को हल्का महसूस कर रही थी ,आईने में  निहारती है ,उसके अंदर आत्मविश्वास बढ़ गया था।  

अगले दिन जब शिखा  सोकर उठी, तो बंदिनी उसके पास आई और बोली - बहु जी !आपने  क्या सोचा है ?

किस विषय में ?

जो बात, आपके सामने मालकिन ने रखी है, आपने क्या निर्णय लिया है ?

मैंने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है, अभी मैं अपने घर जाना चाहती हूं। 

यह तो नहीं हो पाएगा, मालकिन ! जो कह देती हैं ,वही करना होता है। 

तुम वैसे ही बोले जा रही हो, तुम जानती हो, उन्होंने मुझसे क्या कहा है ?

क्या बंदिनी जानती है ? शिखा के सामने दमयंती ने क्या शर्त रखी है ? बंदिनी उससे क्या कहना चाहती है ? उसे सलाह देने आई है या उसे डरा रही है।  क्या उसकी सलाह पर, शिखा, दमयंती की बात मानने के लिए तैयार हो जाएगी ? चलिए आगे बढ़ते हैं। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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