एक दिन जब शिखा की ससुराल में उससे मिलने, एक पार्लर वाली आती है, तब वह उसे बताती है -इस घर की महिलाओं की साज - सज्जा के लिए, वह अक्सर यहां आती रहती है। इस घर की महिलाएं कभी भी, बाहर नहीं जातीं , बल्कि हम लोगों को यहीं बुला लेती हैं। जब यहीं सब सुविधा घर में मिले तो, बाहर क्यों जाना ? सब यहीं हो जाता है। इस बात से शिखा आश्चर्य चकित होने के साथ -साथ प्रसन्न भी हुई ,उसे लगा ,अब यही मौका है ,जब इस घर की महिलाओं के विषय में मुझे जानकारी मिलेगी ,तब उसने ,उस लड़की से पूछा -क्या इस परिवार की महिलाओं को तुम जानती हो , क्या तुमने उन्हें देखा है ?
हां हां, मैं यहां वर्षों से आ रही हूं , पहले मेरी मम्मी आती थीं ,जब तुम्हारी सास यहां आई थीं उससे पहले मेरी मम्मी आती थीं ।
आप यह कार्य कब से करती आ रहीं हैं , आपकी तो काफी उम्र हो गई होगी।
मुस्कुराते हुए वह बोली- कुछ ज्यादा तो नहीं, मैं अपनी मां के साथ बचपन से यहाँ आती रही हूं।
ओह ! क्या आपने इस घर में मेरी सास के अलावा और किसी को भी देखा है।मेरा मतलब है ,उनकी जेठानी या देवरानी !
नहीं, अब तो तुम्हारी' ददिया सास' भी यहां नहीं रहीं। न जाने, कहाँ चली गयीं ?
क्यों? उन्हें क्या हुआ था? शिखा ने उत्सुकता से पूछा।
उन्हें कुछ नहीं हुआ था, वह तो एकदम स्वस्थ थीं ,बहुत अच्छी थीं।
उनकी कितनी उम्र हो गई होगी ?
यही की कोई चालीस या पेंतालिस की रही होंगी। उसके बावजूद भी, उन्हें तीस -पैंतीस से ज्यादा उन्हें कोई नहीं आंकता था। बहुत ही सेहतमंद महिला थीं। हर काम में बहुत फुर्ती थी,तुम्हारी सास के आने से पहले वही इस घर पर राज करती थीं।
तब उन्हें क्या हुआ ?
उन्हें कुछ नहीं हुआ था, न जाने कहां चली गई थीं ?अचानक ही गायब हो गई थीं।
यह आप क्या कह रही हैं ? अपने पैरों को गर्म पानी के घोल में डालते हुए शिखा ने पूछा।
हां, वे बीमार नहीं थीं, अच्छी खासी तंदुरुस्त थी , बगीचे में टहलती थीं , जब मेरी मम्मी नहीं आ पाती थीं मेरे आने पर बहुत खुश हो जाती थी किंतु एक दिन जब मैं आई तो पता चला -वे अब घर में नहीं है।
वे कहां चली गई थीं ?शिखा ने उत्सुकता से पूछा।
मुझे भी यही जिज्ञासा थी,मैंने भी जानना चाहा ,अचानक वो इस तरह कहाँ चली गयीं ? किंतु मुझे किसी ने कुछ नहीं बताया। तब उनके पति यानि हमारे ददिया ससुर से पूछ लेतीं उन्हें तो अपनी पत्नी का मालूम होगा।
पता नहीं ,उनको भी क्या हुआ ?
क्या'' ठाकुर अमर प्रताप सिंह जी'' भी गायब हो गए ?
सुनने में तो यही आया था, कि पत्नी के जाने पर, वह पागल हो गए थे किसी से बात नहीं करते थे ,हमेशा शांत रहते थे। मैंने तो उन्हें फिर कभी नहीं देखा ,हाँ याद आया ,उन्हें मैंने पीछे वाले बगीचे में अक्सर जाते देखा था। अब तो वहां भी जाते नहीं दीखते।
हाँ ,जबसे मैं यहाँ आई हूँ ,मैंने भी दादाजी को नहीं देखा। ऐसा कैसे हो सकता है ? जो आदमी स्वस्थ है ,अच्छे से रह रहा है अचानक उसे क्या हो जाता है ? क्या मम्मी जी की सास को फिर किसी ने नहीं ढूंढा ?
यह सब मैं नहीं जानती, मैं तो यहां एक दिन के लिए ही आती हूं। हो सकता है, पत्नी के गम में' पागल' हो गए हों।
हवेली के पूर्व दिशा में कभी गई हो ? शिखा उससे उन कमरों के विषय में बात करना चाहती थी।
तभी ,उस कमरे में उस लड़की ने, ऐसा कुछ देख लिया ,जिस पर आज तक वहां रहते हुए ,शिखा की नजर भी नहीं गयी,वह बुरी तरह घबरा गयी ,बोली -नहीं, मैंने आज तक हवेली को कभी ठीक से देखा भी नहीं है, ना ही, बाहर के लोगों को इस तरह यहां घूमने की इजाजत दी जाती है, घर के लोग ही, यहां घूम सकते हैं।तुम्हें यहां आए हुए,अभी कितने दिन हुए हैं ?
अभी एक माह ही हुआ है।
क्या तुमने इस शानदार हवेली को ठीक से देखा है ?
नहीं तो..... क्यों ?
जब तुम घर की सदस्य होकर भी, नहीं देख सकीं तो फिर भला मैं, बाहर की होकर, कैसे हवेली में घूम सकती हूँ ? तुम इतने प्रश्न पूछ रही हो इसलिए तुम्हें बता भी रही है, वरना यहां काम से काम रखते हैं। घबराते हुए बोली -ठकुराइन जी, के विषय में किसी से कुछ मत पूछना और मेरा नाम मत लेना। मेरी रोजी-रोटी का सवाल है। यहां कोई भी ऐसी बातें नहीं करता है।वह अब बहुत धीरे से बोल रही थी।
शिखा को उसका यह व्यवहार विचित्र तो लगा किन्तु वह उससे ज्यादा से ज्यादा जानकारी चाहती थी ,चेहरे पर मास्क लगा होने के बावजूद भी बोली -जो हमारे ससुर हैं, क्या उनके भाइयों का विवाह नहीं हुआ था ?
मैं नहीं जानती, कहते हुए वह अपना सामान समेटने लगी। तब मास्क देखने के लिए ,कि यह सूखा या नहीं ,उसके चेहरे के करीब अपना चेहरा लाती है और धीरे से कहती है - तुम जानती नहीं हो, यहां की हर पल की खबर, ठकुराइन [ दमयंती] को रहती है। तुमने जो भी बातें की हैं या तुम किसी से भी कुछ पूछती हो उन्हें सब पता चल जाता है इसलिए ज्यादा छानबीन की जरूरत नहीं है। कहते हुए उसने शिखा की तरफ देखा और बोली - आओ !पहले तुम्हारा चेहरा धुलवा देती हूं।
उसके इशारे को शिखा ने समझा ,तब बोली- ठीक है,कहते हुए वो अपनी कुर्सी से उठ खड़ी हुई।
बाहर आकर बोली -यह मैंने पहले कभी नहीं करवाया है, अब इसकी मुझे कोई आवश्यकता भी नहीं है।
ठीक कह रही हो, तुम तो पहले से ही बहुत सुंदर हो किन्तु इस सुंदरता की चमक ऐसे ही बनी रहे ,इसके लिए ये सब तो करवाना ही पड़ता है।
उसकी बात से ,शिखा उदास हो गयी और बोली -इस सुंदरता का अब क्या करूंगी ? यह साज -सजावट तो अपने पति के लिए ही होती है। वही नहीं है, तो मैं सजकर पर क्या करूंगी ?अब किसके लिए सजना है।
यह सब तो मैं, नहीं जानती मुझे तो भेजा गया है।''अभी तुम्हारी इतनी लम्बी ज़िंदगी है ,वह क्या ऐसे ही व्यर्थ गंवा दोगी ?'' अच्छा एक बार अपना मुंह दुबारा ठीक से तो धुलवा लो ! कहते हुए जबरन ही शिखा को, बाथरूम में ले गई। तब वहां शिखा से बोली -तुम्हारी सास बहुत ही रहस्यमयी है, जो भी उनके विरुद्ध होता है फिर वह दुबारा दिखता नहीं है, तुम भी ज्यादा छानबीन करोगी , तुम भी नहीं दिखोगी । उनको तुम्हारी एक-एक पल की खबर रहती है। यह मत समझना, वह तुमसे बात नहीं करती हैं या तुम्हारे कमरे में नहीं आती हैं, तो तुम गलत हो, जो भी कदम उठाना हो, बड़े सोच समझ कर उठाना।
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