Sun ri patang

सुन री, पतंग ! तू गगन को चूमना। 

स्वच्छंद हो ,वायु संग अंबर में झूमना। 

तोड़ बंधन ,सभी यहाँ -वहां न घूमना।   

मेरी रंग- बिरंगी ,प्यारी सतरंगी पतंग !

 



जिसकी डोर, मेरे इन हाथों बंधी।

कट जाएगी, ग़र लापरवाही करी। 

संभालकर, धैर्य से, उसे उड़ाना है।

उद्देश्य तुझे गगन तक पहुंचाना है।

 

स्वतंत्र नील गगन में,पहचान हो तेरी। 

उड़े लटकन संग, पतंग है, अलबेली ! 

बीच राह में , कही भटक मत जाना। 

जीत कर तुझे यहीं, वापस है ,आना। 


 जब दे कोई, अपना [डोर ]दगा,

 समझना ज़िंदगी एक ''जंग'' है। 

 ये काटा ,वो काटा से गूंजे गगन !

 दे दे ताली, नाचे -झूमें होके मग्न।  


 ऐ पतंग ! तुझे  जीत कर है ,आना।

 आज तुझे पवन को है , आजमाना।

'मकर संक्रान्ति' का पर्व है ,सुहाना।

हर्षोउल्लास में, धैर्य ! न डगमगाना।    


ए ,मेरी पतंग !

तू क्यों उलझी है ? कांटों में ,

क्यों आई? किसी की बातों में,

क्या करती? हौसला बुलंद था। 

छूने को मेरे तमाम, गगन था। 

बस अपने से ही ,मात खा गई

बंधी थी, जिस डोर से,

 वही, कच्ची डोर उलझा गयी। 

 किया भरोसा !  अपने पर,

 बस, जिंदगी वहीं गच्चा गई।

 किस्मत की बात है ,

हवा भी ,अपना रुख दिखा गयी। 

 विश्वास की नाजुक डोर उलझा गई। 

आज भी मैं, वही पतंग हूँ।

 अनुभव ने ,बहुत कुछ सिखलाया है। 

अरमान था उड़ने का, मौका गंवाया है। 

सम्भलना ,उड़ना ,गिरना ,ज़िंदगी के रंग हैं। 

मेरे पेंच भी ,क्या किसी से कम हैं ? 

नई डोर संग पुनः आसमान में उड़ दिखलाऊँगी।

मौका फिर  मिला ,तो आसमान पर छा जाऊंगी।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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