इंस्पेक्टर कपिल और राठौर दोनों ही'' एस. एस. कम्पनी'' में,दिव्या के विषय में जानकारी लेने जाते हैं ,वहां उन्हें मधुलिका मिलती है जो उन्हें बताती है -कि दिव्या उसकी दोस्त थी ,उसके साथ काम भी करती थी। तब वे उससे पूछते हैं -तुमने कभी यह जानने का प्रयास नहीं किया कि तुम्हारी सहेली, अब कहाँ है ?
मैंने फोन किया था, सर !किन्तु पहले तो उसका फोन व्यस्त आ रहा था ,फिर बंद हो गया।
क्या तुम जानती हो ? वह कहाँ रहती थी ?
शायद ,'सेक्टर बासठ' में...... स्मरण करते हुए बोली।
'सेक्टर बासठ' तो बहुत बड़ा है ,कोई मकान नंबर...... या गली।
जी मुझे नहीं मालूम !मैं कभी उसके घर नहीं गयी। हमारी दोस्ती को अभी छह माह ही तो हुए हैं ,वो इस कम्पनी में छह महीने पहले ही तो आई थी।
अच्छा !उससे पहले वह कहाँ जॉब करती थी ?
जी ,ये उसकी पहली ही जॉब थी,उससे पहले वह किसी कॉलिज में अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी। छुट्टियों में यहाँ आई थी।
अच्छा ,पहले वह पढ़ रही थी,उसका और कोई दोस्त जिसके विषय में तुम जानती हों।
नहीं सर !मुझे नहीं मालूम !
याद कीजिये !उसका कोई कॉलिज का या इस कम्पनी में ''बॉय फ्रेंड ''हो। उसके विषय में भी मधुलिका ने अनभिग्यता जतलाई।उसका कोई कॉलिज का या इसी कम्पनी में कोई और दोस्त बना हो।
बना भी तो उसने मुझे कुछ नहीं बताया। सर !हमने कभी एक -दूसरे से ऐसी कोई बात ही नहीं की। हो भी तो उसने मुझे कभी कुछ नहीं बताया।
अच्छा ,जब भी तुम्हें कोई ऐसी बात याद आये कि उसके केस में सहायक हो सकती है ,तो तुम हमें फोन कर सकती हो।जैसे ही वो लोग आगे बढ़े ,तभी पीछे से मधुलिका ने पुकारा।
हाँ,सर एक दिन वो कह तो रही थी -अब शीघ्र ही,मैं विवाह करने वाली हूँ।
वे वापस आये और पूछा - किसके साथ ?
ये तो उसने नहीं बताया ,कह रही थी -जब कोई बात होगी तो तुझे पता चल ही जाएगा।
दोनों ही आगे बढ़ गए ,मधुलिका से भी उन्हें कोइ विशेष जानकारी नहीं मिली।चलो !यहाँ आने से कोई लाभ तो नहीं हुआ। थाने पहुंचने पर जाधव ने बताया -साहब !ज्यादातर इस नंबर पर उसके घरवालों से और कोई लड़की मधुलिका के नाम से नंबर है, उस पर बातें हुई हैं।
आज से छह महीने पहले भी, जिससे ज्यादा बातें हुईं हैं और कोई नंबर है।
जी, एक नंबर और है, इस पर काफी बातें हुईं हैं किन्तु यह नंबर भी अब,जबसे वो गायब हुई है, बंद है।
पता लगाओ ! यह नंबर किसके नाम पर है ?
यह नंबर जिसके नाम पर है ,वो अब मर चुका है।
ये क्या हो रहा है ?आश्चर्य से इंस्पेक्टर बोला -तुमने पता लगाया ,उस आदमी की मौत कैसे हुई ?
जी ,एक सड़क दुर्घटना में मरा था।
मरा था या मारा गया था।
ये तो नहीं मालूम किन्तु बहुत बड़ी दुर्घटना हुई थी ,मुझे लगता है ,उसी समय किसी ने वो फोन चुराया होगा और उसका उपयोग उस हत्या के लिए किया होगा।
लगता है ,तुम सही कह रहे हो किन्तु उस नंबर पर ध्यान रखना कभी तो शुरू होगा ,कहाँ एक्टिवेट होता है ?
सर !एक बात और है , क्या आपने ध्यान नहीं दिया ?राठौर बोला।
कौन सी बात ?
वो लड़की गंजी थी ,उसके सर पर एक भी बाल नहीं था। मुझे ये बात समझ नहीं आई ,उस कातिल ने उसे गंजा किया है या स्वयं हुई थी ,या फिर वह बीमार थी।
रिपोर्ट में उसकी बीमारी के विषय में तो कुछ नहीं बताया गया है ,यह कोई सरफिरा तो नहीं कपिल ने चिंता व्यक्त की।
अगले दिन जब इंस्पेक्टर कपिल थाने आया,एक खबर उसकी प्रतीक्षा में थी ,सर! अभी थोड़ी देर पहले एक गुमनाम फोन आया है ,उनके खेतों में एक लाश और मिली है।
कहाँ ,किसकी आश्चर्य से कपिल ने पूछा ,वो कुर्सी पर भी नहीं बैठा और वो और उसकी टीम के सदस्यों के साथ गाड़ी में बैठ गए। पता नहीं, क्या हो रहा है ? जब वे लोग वहां पहुंचे ,बहुत दुर्गंध आ रही थी ,आस -पास का सम्पूर्ण वातावरण दुर्गंधपूर्ण हो गया था। वहाँ से गुजरने वाले प्रत्येक व्यक्ति नाक पर कपड़ा रखकर जा रहे थे।उन्हें देखकर कपिल बोला -कैसे लोग हैं ? नाक पर कपड़ा रखकर तो जा रहे हैं किन्तु किसी ने भी यह जानने का प्रयास नहीं किया कि यह दुर्गंध कहाँ से और क्यों आ रही है ?
सर ! सभी व्यस्त हैं, किसी ने देखा भी हो तो ,पुलिस के पचड़े में कोई पड़ना भी नहीं चाहता।'' यहाँ जिन्दा लोगों के लिए तो किसी के पास समय नहीं है ,मुर्दा पर कौन ध्यान देगा ? ''
शायद ,तुम सही कह रहे हो। लाश को देखकर ,लग रहा था ,इसे बहुत दिनों पहले मार दिया गया था। इंस्पेक्टर कपिल ही नहीं ,सभी ने महसूस किया ,उसके शरीर से भी एक हाथ गायब है और उसके भी बाल नहीं है।
साहब !देखने से तो लगता है ,इसका भी कत्ल उसी' गुमनाम लाश' की तरह ही हुआ है।
हम्म्म्म इसका तो चेहरा भी बिगड़ चुका है ,इसकी पहचान कैसे होगी ?
सर ! हो सकता है,यह दिव्या हो ,वो हाथ इसका ही हो। ''फोरेंसिक वाले ''अपना कार्य कर रहे थे। इसकी सूचना हमें किसने दी थी ?
एक पतला सा व्यक्ति सामने आया और बोला -इंस्पेक्टर साहब !ये मेरे ही खेत हैं ,मैं कई दिनों से इधर नहीं आया था,मैं बीमार चल रहा था। आज आया तो मुझे यहाँ दुर्गंध सी महसूस हुई। मैंने सोचा- शायद कोई जानवर मर गया है ,यहाँ आकर देखा तो पता चला ,किसी की लाश है ,मैंने तुरंत ही आपको फोन किया।
यहाँ लाशें मिल रहीं हैं ,और पुलिस परेशान है ,आखिर यह सब कौन कर रहा है ?ऐसे ही किसी अन्य शहर में -अच्छा बताओ ! आपको कौन सी अंगूठी पसंद है ? सुनार की दुकान में, प्रवेश करते हुए एक जोड़े से, सामने रखी अंगूठियां की तरफ देखकर,सुनार ने पूछा।
जो तुम्हें पसंद हो , मेरी भी वही पसंद होगी,लड़की ने अपने प्रेमी की तरफ देखकर इठलाते हुए कहा। स्वर्णकार ने उन दोनों की तरफ देखा, लड़के के सुनहरे बाल थे और फ्रेंच कट दाढ़ी थी। लड़की भी, सुंदर और आधुनिक लग रही थी। सुनार ने सोचा -शायद इन दोनों का विवाह है, इसलिए अंगूठी पसंद करने आए हैं।
जी कहिए ! कौन सी अंगूठी दिखा दूँ ?
वह नीलम की अंगूठी दिखाइए , हमारी परी के हाथ में बहुत अच्छी लगेगी।
जी अवश्य, कहते हुए उसने वह अंगूठी शीशे से बाहर निकाली और उस लड़की के सामने कर दी। उस अंगूठी को देखकर वह बहुत प्रसन्न हुई और उसे पहनकर देखा। सच में, बहुत सुंदर है, कहते हुए वह चहक उठी , समर देखो ! कैसी लग रही है ?
