Shaitani mann [part 35]

फोन काट कर स्वरा अपने गम के अंधेरे में खो गई, वहीं कपिल के लिए, शून्य छोड़ गई , जिस शून्य में, उसे कुछ भी स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था वह समझ नहीं पा रहा था, उसकी गलती कहां है ? उसने ऐसा क्या गलत किया है ? आख़िर वह मुझसे  चाहती क्या है ? क्या मैंने उसे समझने में गलती कर दी ? यही सब, वह सोच रहा था तभी साहू की आवाज आई -साहब !भोजन लगा दिया है। 

आता हूं, कहकर उसने फोन रखा और भोजन करने लगा, तब उसने साहू से पूछा- साहू ! तू तो कह रहा था -मेमसाहब ! कुछ कहना चाहती थीं , थोड़ा घबराई हुई थीं, तुझे ऐसा क्यों लगा ? क्या तुझसे कुछ कहा ?

 नहीं, साहब  मुझसे कुछ क्यों कहेंगी ? किंतु उनके बोलने के अंदाज से मैं समझ गया था, कि अवश्य ही उनके मन में कोई परेशानी अथवा दुविधा चल रही है। 



तू इन सब बातों को बड़ी सरलता से समझ लेता है। 

इसमें समझना कैसा ? वो तो पता चल ही जाता है।

 किंतु मुझसे  तो ऐसी कोई, बात नहीं की। 

मुझे तो लगता है, साहब ! वह बहुत कुछ कहना चाहती हैं किंतु या तो आप उन्हें समय नहीं दे रहे हैं, या  कहते-कहते रुक जाती हैं।  शायद ,उन्हें लगता है, आप समझ नहीं पाएंगे। 

साहू की बात सुनकर, कपिल सोच में पड़ गया ,यह इतना बड़ा भी नहीं हुआ है। 

साहू ! तेरी उम्र कितनी है ?

साहब ! समझदारी उम्र से नहीं आती,किन्तु मेरा विवाह आपसे पहले हुआ है,कहकर वो मुस्कुरा दिया।  

तू कहना चाहता है ,तुझे,मुझसे अनुभव ज्यादा है। तब तू ही बता ! मैं उसकी कौन सी बात नहीं समझ पा रहा हूं जब मुझसे बात करती है, तो उसका अंदाज ही अलग होता है। तो मैं कैसे समझूंगा ? मुझ पर तो 'वाक्य बाण 'चलाती है।

साहू उसके जूठे बर्तन उठाकर ले गया। कपिल भोजन करके लेट गया, बाहर आंगन में ही ,उसने अपनी चारपाई डलवाई थी , तारों की छांव में, और उन तारों में न जाने क्या, ढूंढने का प्रयास कर रहा था ? अपने जीवन में आई उलझन को समझने का प्रयास कर रहा था। तब उसने करवट बदली, न जाने कब उसे नींद आ गई ? साहू रसोई समेटकर कपिल के सवालों का जबाब देने के लिए बाहर आया था किन्तु उसने देखा ,कपिल सोया हुआ है। साहू भी चुपचाप जाकर सो गया। 

जब कपिल थाने पहुंचा ,तब राठौर ने उसे बताया, साहब !पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गयी।

अच्छा ,कुछ पता चला उस लड़की की मौत कैसे हुई है ?

सबसे पहले तो,उस हाथ का इससे कोई मतलब नहीं है ,मतलब वो हाथ किसी और लड़की का है ,उसकी मौत को ज्यादा समय हो गया है। इसकी मौत को अभी लगभग चार दिन ही हुए होंगे किन्तु इस रिपोर्ट से पता चलता है। दोनों हाथों को एक तेजधार हथियार से काटा गया है। तरीका लगभग वही है। 

क्या इस लड़की के साथ....... 

जी आप सही समझे ,कई दिनों तक इसके साथ शारीरिक संबन्ध बनाये गए हैं। 

इसका अर्थ है ,ये दो लड़कियां हैं ,जिसका हमें एक हाथ मिला है और दूसरी का शरीर ,एक का हमें पता लगाना है कि यह हाथ किसका है ?दूसरी का पता लगाना है कि यह लाश किसकी है और क्या एक ही व्यक्ति ने दोनों के हाथ काटे हैं। 

जी सही कहा।

क्या तुमने एस. एस. कम्पनी में जाकर देखा ,वहां पता लगवाया। 

नहीं साहब !अभी तो नहीं गए ,अभी तक तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इंतजार में ही थे। 

चलो ! चलते हैं ,कहते हुए वे आगे बढ़े ,तब कपिल ने जाधव से कहा -तुम उस लड़की के फोन नंबर से पता लगाओ !उसकी अधिकतर किससे बातें होती थीं और उसका फोन कब और कहाँ बंद हुआ ?

जी साहब !

एस.एस. कम्पनी में पहुंचकर वे वहां के मैनेजर प्रभात से मिले ,जी सर आइये ! कहते हुए , उसने तीन चाय मंगवाई। 

मैनेजर साहब !आप हमें यह बताइये !आपकी कम्पनी में वह लड़की कब से नहीं आ रही थी ? 

जी ,उसे कई दिन हो गए ,एक सप्ताह तक जब वो नहीं आई ,तब हमने सोचा -शायद ,उसने नौकरी छोड़ दी है। 

बिना कोई पूर्व सूचना दिए ,वो ऐसे कैसे नौकरी छोड़कर जा सकती है ? 

सर ! कुछ लड़के -लड़कियां ऐसे होते हैं ,जिनको दूसरी कम्पनी अच्छा पैसा दे रही है ,तो बिना बताये चले जाते हैं 

ऐसा क्यों ? आपकी इतनी बड़ी कम्पनी है ,कोई नियम नहीं है ,जब चाहे आ जाओ !जब चाहे चले जाओ !

जी, नियम बने हैं ,इसीलिए तो बिना बताये चले जाते हैं ,नियम के आधार पर छह महीने से पहले वो कम्पनी छोड़कर नहीं जा सकते ,बिना बताये कम्पनी छोड़कर जायेंगे ,तो उन्हें आधे माह का वेतन नहीं मिलेगा। 

क्या आधे महीने का वेतन छोडकर भी चले जाते हैं ? राठौर ने पूछा। 

दूसरी जगह यदि आकर्षक वेतन मिल रहा है ,तो चले जाते हैं ,कई लोगों को पैसे की जरूरत होती है ,तो बंधे रहते हैं ,इसीलिए हमने भी यही समझा,शायद उसे यहाँ से कहीं अधिक वेतन पर नौकरी मिल गयी है। 

तब भी आपको एक बार पता तो लगाना चाहिए कि आपका कर्मचारी नहीं आ रहा है ,क्या कारण हो सकता है ? हो सकता है, उसके साथ कोई दुर्घटना हुई हो या वो बीमार हो। आपको जानकारी तो होनी चाहिए ,फोन नंबर इसीलिए तो लिखवाये जाते हैं। 

जी...... हमने यह जानने के लिए फोन करवाया था किन्तु क्या करते ?उधर से फोन उठाया ही नहीं गया।  

आपकी कम्पनी में उसकी  कोई महिला मित्र या कोई दोस्त हो ,जिसे उसके विषय में कोई जानकारी हो ,जिसके पास वह ज्यादा उठती -बैठती हो। 

जी,मधुलिका है। 

क्या वो आज आई है ?

जी ,मैं उसे बुलवाता हूँ ,तभी प्रभात का फोन आ जाता है , क्षमा कीजिये !कहकर वह फोन में व्यस्त होने से पहले अपने कामगार से कहता है -इन्हें मधुलिका से मिलवा देना। 

एक अलग कमरे में मधुलिका आती है ,जी कहिये !

क्या तुम दिव्या को जानती हो ?

जी हाँ ,हम दोनों साथ -साथ ही काम करते थे ,साथ ही बैठते थे। 

तब तुमने यह जानने का प्रयास नहीं किया कि वह अपनी कम्पनी में, अपने काम पर क्यों नहीं आ रही है ?फोन नंबर तो लिया होगा ,उससे फोन करके पूछा नहीं ,वह कहाँ है  ?

जी ,फोन पर हम दोनों अक्सर बातें करते रहते थे। 

तब तुमने यह जानने का प्रयास नहीं किया कि अचानक वह कहाँ चली गयी ?आ क्यों नहीं रही है ?

एक दिन जब वो आई नहीं मैंने उसी शाम उसे फोन किया था किन्तु उसका फोन व्यस्त आ रहा था।    

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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