Shaitani mann [part 34]

रात -दिन उसी के लिए तो तैयारी की थी, मैंने ! मैं तो यही सोचता रहता था -कि मैं परीक्षा पास करके, उसकी सोच के आधार पर, मैं  ख़रा उतर  पाऊं, अपने को उसके सपनों के काबिल बना पाऊं , तभी वह मुझे स्वीकार करेगी किंतु उससे कभी ऐसी बात नहीं हो पाई कि क्या उसकी यही इच्छा है या कुछ और भी.......  करना या कहना चाहती है।मुझे लगता था ,जब मैं पुलिस में भर्ती हो जाऊंगा और उसके सपने उसके सामने, मेरे रूप में खड़े होंगे तो वो प्रसन्न हो जाएगी और बिना किसी नानुकूर के मुझे स्वीकार कर लेगी। स्नातक का आखरी साल भी हो गया। वह स्वरा से बहुत कुछ कहना चाहता था किन्तु शब्द नहीं मिल पा रहे थे।सोचता था,जो कुछ भी कर रहा हूँ ,उसी के लिए तो है ,अचानक मुझे सामने देखकर चौंक जाएगी।  कपिल रात- दिन परिश्रम कर रहा था, ताकि वह स्वरा के सपनों को साकार कर सके और साथ ही,मैं भी अपने सपनों  के साथ जीवन व्यतीत कर सकूँ और एक दिन स्वरा के घर के दरवाजे की घंटी बजी। 


कौन है ? उसके पिता ने दरवाजा खोला था , दरवाजा खोलकर, देखा तो सामने कपिल पुलिस की यूनिफॉर्म में खड़ा था, वे उसे देखकर घबरा गए , मेरे यहां, घर के दरवाजे पर पुलिस का क्या काम ? यह यहां क्यों है ? जी कहिए ! उन्होंने दरवाजे पर खड़े-खड़े ही, कपिल से पूछा। 

सर! आप परेशान न हों , मैं स्वरा का सहपाठी हूं, मैं सब इंस्पेक्टर कपिल शर्मा हूं।

 बात को समझते हुए वे बोले- ओह ! बेटा अंदर आओ! उन्होंने वहीँ से स्वरा को आवाज लगाई -स्वरा देखो, तो कौन आया है ?

स्वरा ने कपिल को देखा, उसे तो जैसे उम्मीद ही नहीं थी, उसे देखकर प्रसन्न भी हुई और एकदम चुप हो गई , और बोली -तुम यहां कैसे ? इससे पहले कपिल ने उससे कोई सम्पर्क नहीं किया था ,इस तरह अपने घर के दरवाजे पर उसे खड़े देखकर अचम्भित रह गयी। 

तुम्हारा सपना, तुम्हारे लिए पूरा करके आया हूं, अब तो कोई आपत्ति नहीं होगी। 

उसके पिता उनकी बातें सुनकर बोले -यह क्या कह रहा है ?

 कुछ नहीं पापा! यह तो मजाक कर रहा है। 

स्वरा की बात सुनकर, कपिल गंभीर हो गया और बोला -मैं मजाक नहीं कर रहा हूं, मैं आपकी बेटी का हाथ मांगने आया हूं , इसकी यही इच्छा थी कि मैं किसी पुलिस वाले से ही, विवाह करूंगी। 

यह तो बहुत अच्छा है, लड़का भी हमें पसंद है ,कहते हुए उन्होंने कहा-स्वरा की मां देखो ! कौन आया है ? उसकी मां उस समय' संध्या पूजन' कर रही थी, बाहर आकर वह उनकी तरफ देखने लगी , फिर कपिल को देखा और पूछा -ये कौन है ?

अरे, वही तो बता रहा हूं , अपनी स्वरा का रिश्ता आया है, और लड़का यही है कहकर वह हंसने लगे,स्वरा और कपिल को समझ ही नहीं आ रहा था कि पापा प्रसन्न हैं या व्यंग्य कर रहे हैं।  

आओ बेटा ,बैठो ! क्या तुम्हारे घर में कोई बड़ा नहीं है ?

 जी मेरे मम्मी- पापा सब हैं किंतु उनसे पहले मुझे स्वरा  से भी तो पूछना था कि क्या अब वह मुझसे  विवाह करने के लिए तैयार है ? 

क्यों तैयार नहीं होगी ? लड़का अच्छा- खासा, पढ़ा- लिखा है, नौकरी करता है और क्या चाहिए ?सबसे बड़ी बात हमें लड़का ढूंढने के लिए बाहर ,जाना ही नहीं पड़ा। हमारी तरफ से रिश्ता मंजूर है, स्वरा ! तुम क्या कहती हो ? क्या तुम्हें यह लड़का पसंद नहीं है ? उन्होंने कपिल के सामने ही स्पष्ट रूप से स्वरा से पूछा -स्वरा ने एक बार कपिल की तरफ देखा, और बोली -पसंद है। 

ठीक है, बेटा ! कल तुम अपने घर वालों को ले आना। तब तक उनका नौकर चाय और नाश्ता लेकर आ गया था। कपिल ने महसूस किया की स्वरा  ने अपने माता-पिता के सामने हां तो बोल दिया है किंतु लग नहीं रहा कि वह इस रिश्ते से प्रसन्न है, आखिर वह चाहती क्या है ? कपिल ने इत्मीनान से बैठकर चाय पी और नाश्ता भी किया और तब स्वरा के माता-पिता से बोला -मैं अपने माता-पिता को कल तो लेकर नहीं आ पाऊंगा किंतु एक सप्ताह बाद अवश्य लाऊंगा। स्वरा की मां ने स्वरा  से कहा -इसे गेट तक छोड़ आओ !

जब स्वरा  उसे दरवाजे तक छोड़ने आई, तब कपिल ने स्वरा से पूछा-क्या तुम इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हो ?

तभी कपिल के, विचारों का ताना-बाना टूटा , उसके फोन की घंटी बज रही थी। वह अपने विचारों से बाहर आया, फोन पर नाम देखा, तुरंत ही फोन उठा लिया -हेलो !

तुम्हें मेरी याद आती भी है या नहीं, उधर से आवाज आई। क्या तुमसे साहू ने कुछ नहीं बताया था ? नाराजगी भरा  स्वर था, मुझे पहचानते भी हो या नहीं,''स्वरा'' बोल रही हूं। 

जानता हूं,

क्या तुम यह भी जानते हो? कि मैं तुम्हारी पत्नी हूं, उसके प्रति भी तुम्हारे कुछ कर्तव्य हैं।जब उसने बताया तब भी तुमने मेरा हाल जानने का प्रयास नहीं किया। यही तो होता है ,विवाह से पहले उस लड़की के पीछे -पीछे घूमेंगे ,विवाह होने के पश्चात, ऐसे हो जाते हैं ,जैसे पहचानते ही नहीं। 

यह बात कपिल को चुभी और बोला -ये तुम कह रही हो। 

हाँ ,मैं ही हूँ, बताओ ! तुमने कितनी बार मुझे फोन किया ? व्यस्त रहे या व्यस्त होने का अभिनय करते रहे ,क्या अपने मन को भी झुठलाते रहते हो ?

स्वरा की  बातें सुन कपिल का ह्रदय रो दिया किन्तु कुछ नहीं बोला ,फोन क्यों कर रहीं थीं ?क्या कुछ काम था या पैसों की आवश्यकता है  ?

कहना क्या चाहते हो ? क्या, मुझे जब किसी चीज की आवश्यकता होती है तभी तुम्हें फोन करती हूं , क्या मैं तुम्हें बिना काम के फोन नहीं कर सकती ?

कर सकती हो, तुम्हें किसने मना किया है ? किंतु तुमने अभी तक, कभी मेरा हाल जानने के लिए तो फोन नहीं किया है । 

मुंह बनाते हुए स्वरा बोली-जब फोन करती हूं तो फोन ही कहां उठाते हो ?तुम्हें तो मेरे लिए समय ही नहीं है। 

इन्हीं शिकायतों के लिए ही ,फोन किया था या....... 

कुछ नहीं ,कहते हुए स्वरा ने फोन काट दिया। तुम मुझे कभी समझे ही नहीं ,कभी मैं आगे बढ़ने का प्रयास करती भी हूँ तो तुम आज की तरह ऐसे प्रश्न करते हो कि मेरे कदम स्वतः ही पीछे हो जाते हैं। 

आखिर इन दोनों की ज़िंदगी में क्या चल रहा है ?कपिल को तो, वो केस भी सुलझाने हैं। अपनी उलझी हुई ज़िंदगी में ,क्या वो अपने केस की उलझनों को सुलझा पायेगा ?आइये आगे बढ़ते हैं। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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