Nadi ki yatra

 अपने उद्गम से बाहर आ....  ,

वो !चली इठलाती ,बलखाती !

लहराती सी, घूमती चहुँ  ओर। 

जाना कहाँ ? उसे,और न छोर।


जीवन उसका, आसान नहीं। 

कभी बनती, विस्तृत-विशाल !

 कभी लघु बन,आगे बढ़ जाती।  

कभी काँच सी,कभी माटी मिली। 

ठहर सकती नहीं ,सतत चलती।  

राह में आये , पहाड़  या पठार !

राह बना, निरंतर आगे बढ़ जाती।

सर्दी -गर्मी या वर्षा , रुत कोई हो,

 राह में न...... कोई  व्यवधान हो। 

उछलती,गिरती,पाहन सेआहत हो। 

निर्मल ,स्वच्छ धार बन आगे बढ़ती। 

जहाँ जाती ,फैला, ख़ुशियाँ देती। 

निरंतर आगे बढ़ती जाती,न रूकती। 

 प्यास बुझाती ,न एहसान जताती। 

जलचर ,थलचर सबके काम आती।   

बालक उसकी गोद में करते किलौल !

 नदी के जल का नहीं है , कोई मोल ! 

जीने का,आगे बढ़ने का संदेश सुनाती। 

कितने रहस्य ? जीवन में, शांति देती। 

जहां भी जाती,सभी पर स्नेह बरसाती। 

  

  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post