Shaitani mann [part 33]

इंस्पेक्टर कपिल जैसे ही थाने में आया, वहां पर कुछ लोग पहले से ही मौजूद थे, जो अपनी बेटी की गुमशुदगी की, रिपोर्ट लिखवाने के लिए आए थे। कपिल और उसके सहयोगियों का मानना था कहीं यह वही लड़की तो नहीं, जिसका हाथ हमें, फार्म हाउस पर मिला है किंतु बिना किसी ठोस सबूत के कुछ कह भी तो नहीं सकते। वह भी एक हाथ ही है, हमें यह भी मालूम नहीं है कि वह हाथ किसका है ? संपूर्ण शरीर तो मिला ही नहीं है। 

रिपोर्ट लिखवाकर ,वे लोग जाते हैं ,तभी जाधव उन्हें रोकता है ,आपकी बेटी की कोई तस्वीर तो होगी ,वह दीजिये !

जी तस्वीर तो नहीं लाये। 

तब आपकी लड़की को कैसे ढूंढेंगे ?


कल लाकर दे दूंगा। 

तुम्हारे फोन में तो होगी ,वही दिखा दो !

वह तो बहुत पुरानी है ,कल लेकर दे दूंगा 

ठीक है ,झुंझलाते हुए जाधव बोला -न जाने ,कैसे -कैसे लोगों से पाला पड़ता है ? उन लोगों के जाने के पश्चात ,पता नहीं साहब ! अब तो अपराध भी तरह-तरह से होने लगे हैं, इसमें भी लोगों में विभिन्नता आ गई है , हत्या करने के भी नए -नए तरीके ढूंढते हैं, जाधव  हंसते हुए बोला। 

और कुछ नहीं है, बस हमारे लिए मुसीबतें   खड़ी कर देते हैं, यह भी कह सकते हैं कि पुलिस के लिए चुनौती पैदा कर देते हैं , कि अब हमें ढूंढकर  दिखाओ दुबे बोला। 

चलो, जो भी है पुलिस का कार्य तो अपराध कम करना और अपराधी को पकड़ना ही है इसी का  तो हमें वेतन मिलता है कपिल ने जवाब दिया। तभी वह सोचता है - न जाने ,स्वरा कैसी होगी ?उसने न जाने मुझे क्यों फोन किया होगा ? जैसे ही वह फोन का रिसीवर उठाने के लिए हाथ आगे करता है ,उससे पहले ही ,फोन की घंटी बजने लगती है। कपिल फोन उठाता है ,उधर से किसी घबराये हुए व्यक्ति की आवाज आती है -इंस्पेक्टर साहब ! यहां एक लड़की का खून हुआ है ,आप आ जाइये !

कहाँ पर ?

हाइवे के पास जो नदी है ,वहीं पर ,कहकर वो फोन काट देता है।  फोन पर बात सुनकर कपिल एकदम उठ खड़ा होता है ,  चलो !

क्या हुआ ? साहब ! सभी ने एक साथ पूछा। 

नदी पर एक कत्ल हुआ है, अभी-अभी किसी का फोन आया है। आज जीप में बैठकर तीन-चार लोग जाते हैं। जब वहां पुलिस की गाड़ी पहुंचती है तो कुछ लोग वहां पहले से ही मौजूद दिखाई देते हैं। कहां कत्ल हुआ है ,गाड़ी से उतरते हुए कपिल ने पूछा। 

आईये , साहब ! उधर नदी के, कोने पर जहां पर ज्यादा पानी नहीं है सिर्फ कीचड़ सी ही है , उधर एक लड़की की लाश पड़ी  है।

 सबसे पहले लाश को किसने देखा  ?

पहले लाश को मैंने ही देखा था और मैंने ही आप लोगों को फोन किया था, मेरा नाम प्रवीण है। कहते हुए वह आगे बढ़ते उस स्थान को दिखलाता है। उस स्थान पर, सभी ने जाकर देखा। एक लड़की की लाश उल्टी पड़ी हुई है। यादव और दुबे आगे बढ़कर कर उसे लाश को देखते हैं और सीधा करते हैं , उसका भी एक हाथ कटा हुआ था। 

साहब कहीं यह वही लड़की तो नहीं है जिसका.......  कहते-कहते जाधव चुप हो गया।

मुझे लगता है, साहब !यह लाश बहते -बहते इधर आकर अटक गयी ,आगे न बह सकी क्योकि यहाँ कीचड़ था।प्रवीण ने अपनी बात रखी।  

ह्म्मम्म्म्म ! वहां पर आस -पास छानबीन करके ,लोगों से बातें करके लाश को ले जाते हैं। 

अगले दिन दिव्या के माता -पिता को बुलाया जाता है और उन्हें लाश की शिनाख़्त करने के कहा जाता है। उस लाश को देखकर बेचारे माता -पिता की हालत खराब हो जाती है और बिना देखे ही ,वह महिला जोर -जोर से रोने लगती है। 

मुर्दाघर के कर्मचारी ने कहा मांजी !पहले आप उनका चेहरा तो देखिये !हो सकता है ,आपकी बेटी ही न हो। 

यह बात सुनकर दोनों के अंदर थोड़ी हिम्मत आई और जब उस पर से कपड़ा हटाया गया तो उन्होंने एक गहरी स्वांस ली किन्तु अब भी वह और जोर से रोने लगी। 

क्या यही आपकी बेटी है ?

रोते हुए बोली -नहीं !

तब आप क्यों रो रहीं हैं ?

तब उनके पति बोले -प्रसन्नता में भी इंसान कभी -कभी रोता ही है कि चलो ,हमारी बेटी नहीं है। 

न जाने, उनका क्या हाल होगा ?जिसकी यह बेटी है ,रोते हुए वह बोली। 

क्या आप इसे पहचानती हैं ? तब तक कपिल भी आ गया था। 

नहीं ,कहकर दोनों बाहर आकर बोले -इंस्पेक्टर साहब !हमारी बेटी का ऐसा हाल हो उससे पहले उसे ढूंढिए !

हम लोग प्रयास तो कर रहें हैं ,उससे जुडी छोटी से छोटी बात हमें बताइये !और अपनी बेटी की एक तस्वीर भी दीजिये।लाये हैं !

जी ,कहते हुए ,उन्होंने एक तस्वीर जेब से निकालकर कपिल के हाथ पर रख दी।कपिल जानना चाहता था कि वो हाथ इस लाश का तो नहीं है ,उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही वो लोग आगे बढ़ सकते हैं। वह थाने  पहुंचता है। दुबे जी ! ये लीजिये !उस लड़की की तस्वीर है। 

तस्वीर को देखकर दुबे कहता है ,ये लड़की तो वो नहीं है। 

हाँ ,अब तो मुझे लगता है , वो हाथ उसी लड़की का होगा ,अब आप ये देखिये !कि वो लाश किन -किन रास्तों से बहकर ,इधर आई होगी। 

रामपुर ,से होती हुई ,आसपास के कम से कम आठ गांव लगभग इस नदी से लगे हैं ,इससे भी दूर से तो नहीं आ सकती है । 

आसपास के थानों से भी पता लगाओ !कि किसी लड़की के गुमशुदा होने की खबर है या नहीं और इनकी लड़की का भी पता लगवाओ !पहले तो उस कम्पनी में जाकर ही ,वहां बात करनी होगी। इस लड़की का क्या नाम बताया था ?उन्होंने !

जी ,दिव्या ....... 

नाइस नेम ,कहकर कपिल मुस्कुरा दिया और बोला -इस लड़की का भी नाम पता लगाओ !

साहब !उसका पोस्टमार्टम होने पर,क्या करना है ?इसकी एक तस्वीर अख़बार में छपवा देना ,कोई तो होगा जो इसे पहचान कर आएगा। 

शाम को थका -हारा कपिल घर आता है ,अब उसे स्मरण होता है ,मुझे आज स्वरा को फोन करना था ,व्यस्तता के चलते मैं उसे फोन नहीं कर पाया। नाराज होगी ,उसकी भी क्या गलती है ?मेरा कार्य ही ऐसा है ,उसकी ही तो चाहत थी कि किसी  पुलिसवाले से विवाह करना है।  


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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