नीलिमा, आज प्रश्नों के घेरे में खड़ी थी और उससे प्रश्न उसकी अपनी बेटी शिवांगी ही कर रही थी, जो बात ,अपने मन का दर्द उसने, इतने वर्षों से छिपाये रखा था,जिन लम्हों को वो भुला देना चाहती थी। वही आज सवाल बनकर उसके सामने आ खड़ा हुआ।आज शिवांगी उससे सवाल कर रही थी। क्या आपने पापा को मारा ?समझाने पर भी,वो समझने के लिए तैयार नहीं थी। तब वो कहती है - तभी वो इंस्पेक्टर इतने विश्वास के साथ कह रहा था, आपने ही चांदनी की हत्या की होगी। क्या उस समस्या का कोई और हल नहीं था। क्या पापा को बचाया नहीं जा सकता था ? रोते हुए शिवांगी ने पूछा। इसका अर्थ तो यही हुआ इंस्पेक्टर सही था। आपने अवश्य ही, चांदनी की हत्या की होगी।
मैं क्यों चांदनी की हत्या करूंगी ? मुझे उससे बदला लेना होता तो मैं पहले ही ले लेती, किंतु मैंने अपनी बेटी के लिए उसे क्षमा कर दिया। मुझ पर विश्वास करो ! मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है। एक दिन जब मैंने तुम्हें उससे बात करते हुए देखा था ,तब मैंने तुम्हें समझाया था और तुम्हारे बाद भी, एक बार कल्पना के साथ जाकर उसे समझाया था - देखो !मैं यह सब भूल चुकी हूं , तुम मेरी बेटियों के जीवन से खेलने का प्रयास न करो ! जो तुम चाल चल रही हो, उसे चलना बंद कर दो ! शिवांगी अभी बहुत छोटी है , तुम्हारी असलियत नहीं जानती है, न ही, हमने बताई है, जो भी लालच, या जिस भी कारण तुम उसे बहला रही हो वह उचित नहीं है , अभी सम्भल जाओ ! वरना तुम जानती हो, मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। बस मैंने उसे धमकी ही दी थी , उसके पश्चात तो मैं तेरे साथ यहां पर चली आई थी। मैं ऐसा कैसे कर सकती हूं , जब हम लोग यहां आए थे तब वह वहीं पर थी न....... तुम्हें याद नहीं है, नीलिमा ने उसे याद करते हुए बताया।
शिवांगी सोचने लगी -मम्मा, ठीक ही तो कह रही हैं, उस समय तो वह वही थी। तब उसका कत्ल किसने किया होगा ?
शिवांगी बेटा !तुम बातों को समझो ! उसे तुमसे कोई हमदर्दी नहीं थी ,सिर्फ तुम दोनों बहनों में झगड़ा करवाकर, मुझे कष्ट देना चाहती थी।'' यदि कोई हमारा हितैषी है तो हमें गलत सलाह नहीं देगा।''
तो क्या दीदी ने....... अभी वह वाक्य पूरा भी नहीं कर पाई थी , नीलिमा ने उसकी मुंह पर उंगली रख दी और गर्दन हिलाते हुए बोली - इससे आगे कुछ मत बोलना। बेटा, हम सब परिस्थितियों के मारे हैं, कभी-कभी परिस्थितियाँ ऐसी बन जाती हैं, हम न चाहते हुए भी, वो कार्य करने पर मजबूर हो जाते हैं। जो हम नहीं करना चाहते हैं , हो सकता है, इंस्पेक्टर ने जोश में आकर तुम्हें कुछ ऐसा कह दिया हो, लेकिन तुम देख सकती हो, मेरा कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है। मैंने सम्मान के साथ, जीवन जिया है किंतु इस चांदनी के कारण, मैं सड़क पर भी आ सकती थी , तेरे पापा को भी खो दिया , और मुझे अपमानित होकर, वहां से भागना भी पड़ा। उसने हमारे साथ कुछ अच्छा नहीं किया। तू क्या समझती है ? उसे तेरे साथ हमदर्दी थी , नहीं ! वह तेरे माध्यम से ,मुझसे बदला ले रही थी, क्योंकि वह उस घर की मालकिन नहीं बन पाई।
मेरी बच्ची !तुम स्वयं ही सोचो !तमाम उम्र तुम्हरी माँ तुम लोगों के लिए ही तो जी है ,मैं ये भी मानती हूँ ,उस समय इंस्पेक्टर को यदि कुछ भी गलत लगता तो, यह सीधे मुझे जेल में डालता। तेरे पापा कमाते थे ,किन्तु उससे ज्यादा उनके खर्चे थे। कभी तुम लोगों के भविष्य के लिए नहीं सोचा। उन्हें बेटे की चाहत थी ,तुम्हारा भाई ,पास में ही अथर्व बैठा उन्हें देख रहा था। इसे वे' पागल' कहते थे और तुम लोगों का होना न होना उनके जीवन में कोई महत्व नहीं रखता था।इंस्पेक्टर जो कुछ भी कह रहा है ,वो सिर्फ उसका अंदाज़ा है।
तब चांदनी की हत्या किसने की होगी ?सोचते हुए शिवांगी बोली। इंस्पेक्टर को हम चारों पर ही शक़ है ,बाहर हत्या हुई होती तो ,बाहर का कोई व्यक्ति हो सकता था किन्तु हत्या घर में हुई है। तब यह कार्य कौन कर सकता है ?कल्पना अपनी बातचीत का रुख बदलते हुए बोली।
नीलिमा सोचते हुए कहती है -क्या कोई नौकर ऐसा कार्य कर सकता है ?
मम्मी! मुझे तो नहीं लगता, किसी में इतना साहस होगा , जो ऐसी हरकत कर सके।
तो फिर बाहर से तो कोई नहीं आया होगा, इंस्पेक्टर का यहां तक सोचना तो सही है, कहीं ऐसा तो नहीं, तेरे ससुर ने ही यह कार्य कर दिया हो।
अरे मम्मी आप यह क्या कह रही हैं ? ऐसा सोचना भी गलत है , उन्होंने कभी, चांदनी को बाहर आने जाने से, खर्चे से कभी नहीं रोका। अपनी इच्छा का खाती -पहनती थी , उनके विषय में तो ऐसा सोच भी नहीं सकती।
तब यह कार्य किसने किया होगा ? तुम लोग तो वहीं रहते हो ,क्या तुम्हें पता भी नहीं चला कि कोई, वहां मिट्टी खोद रहा है,कोई आहट या आवाज हुई होगी।
मम्मी इतना बड़ा घर है, न जाने कब, यह कार्य किया होगा ? आप व्यर्थ में ही, क्यों अपना दिमाग लड़ा रही हैं ? यह कार्य तो इंस्पेक्टर का है, न....... उसे ही करने दीजिए।
किंतु वो इंस्पेक्टर तो हमारे पीछे पड़ा है न....... इसलिए हमें भी सोचना पड़ रहा है। तुम अपने घर जाकर, कुछ पूछताछ अवश्य करना, सब ने आखिरी बार उसे कब देखा था ?
यह तो मैं भी बता सकती हूं, वह रात्रि में किसी पार्टी से आई थी, उस दिन खाना भी नहीं खाया था और अपने कमरे में चली गई थी।
बस, वहीं यह सब हुआ है, नीलिमा ने अपना फैसला सुनाया , अब उस कमरे में क्या हुआ है? क्या नहीं , उसके विषय में मैं कुछ नहीं जानती।
जावेरी प्रसाद जी ,मैं समझ नहीं पा रहा हूँ ,आखिर ऐसा कैसे हो सकता है ?कि आपके घर में आपकी पत्नी का कत्ल हो गया और आप लोगों को कुछ मालूम ही नहीं है। ऐसा कैसे हो सकता है ?कि बाहर से कोई आएगा और क़त्ल करके उसे दफ़न करके चला जायेगा ?आपसे मैंने आपके नौकर के विषय में चाहा तो आपको उसके विषय में कुछ भी मालूम नहीं है। जिस रात्रि वो गायब हुईं ,उस समय आप कहाँ थे ?
मैं कहाँ हो सकता हूँ , अपने कमरे में ही था।
