जब से शिवांगी पुलिस स्टेशन से आई है, वह उदास हो गई है, उसने नीलिमा को कुछ भी नहीं बताया था किंतु नीलिमा उसकी मां थी। वह समझ गई थी, कि अवश्य ही कुछ हुआ है, इसलिए वह शिवांगी के पास आई और उसने, उससे पूछा -कि वह कहां गई थी ? किंतु शिवांगी उसे कुछ भी बताना नहीं चाहती थी। नीलिमा भी मानने वाली नहीं थी,वह बोली -तू कब से अपनी मां से बातें छुपाने लगी है ? मैं देख रही हूं जब से तू, बाहर से पढ़ कर आई है, तेरे बर्ताव में बहुत ही बदलाव आया है। पहले तो तू मुझे सब बातें बता देती थी ,अब तुझे क्या हुआ ?मेरी पहले वाली शिवांगी कहां गई ? क्या, कुछ हुआ है ?
तब शिवांगी ,नीलिमा से पूछती है- मेरे पिता की मौत कैसे हुई थी ?
यह बात तो सबको मालूम है, मुस्कुराते हुए नीलिमा ने अपना दर्द छुपाने का प्रयास किया और बोली - उन्होंने रेलगाड़ी के सामने आकर आत्महत्या कर ली थी।
उन्होंने आत्महत्या क्यों की थी ?
उसके प्रश्नों से नीलिमा झुँझला गई, और बोली -तू यह सब आज क्यों पूछ रही है ?
आप मेरे प्रश्नों का जवाब दीजिए !
उन्होंने, बहुत से लोगों से कर्जा लिया हुआ था, जिसको समय पर नहीं दे पा रहे थे, जिम्मेदारियाँ बढ़ती जा रही थीं, जिनको ठीक से निभा नहीं पा रहे थे। उत्तरदायित्वों के बोझ तले कमजोर पड़ते जा रहे थे, इस कारण उन्होंने आत्महत्या की।
क्या कोई पत्नी अपने पति की हत्या कर सकती है ? अपने बच्चों के पिता को मार सकती है , शिवांगी ने घूरते हुए अपनी मां की तरफ देखा।
नीलिमा समझ गई ,अवश्य ही कुछ बात हुई है और उससे पूछा -तू यह सब क्यों पूछ रही है ?आज तक तो नहीं पूछा।
आज तक मुझे मालूम नहीं था, किंतु अब पता चल गया है, कि आप मेरे पिता की कातिल हैं , कह कर शिवांगी रोने लगी।
यह सब तुझसे किसने कहा ?
इसीलिए तो इंस्पेक्टर को बार-बार आप पर शक हो रहा है, उसे लगता है, कि आपने ही चांदनी का खून किया है।
नीलिमा ने रोती हुई, शिवांगी को गले से लगाया और बोली -तभी तो मैं तुझसे कहती थी- तू इन सब से दूर रह , तू नहीं जानती, हमारे साथ क्या-क्या हुआ है ? इंस्पेक्टर उस चांदनी को भी जानता है , मैंने तुझे आज तक नहीं बताया -चांदनी, पहले हमारे घर में ही काम करती थी तुझे याद हो, जो चंपा दीदी काम करती थी वही यहां आकर चांदनी बन गई थी , तू अब बड़ी हो गई है, तो अब मुझे तेरे प्रश्नों के जवाब देने होंगे कहते हुए नीलिमा भी रोने लगी और बोली -तू जानती है , जब तू विदेश में थी, इस चंपा ने, मुझ पर जालसाजी का इल्जाम लगाया। मैं अपनी जान बचाकर यहां आई थी, लोग मेरे पीछे पड़ गए थे। इसने हमें बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। यह तो हमें सड़क पर ला देती , मैं तुझे इतने दिनों से बहुत कुछ समझाना और कहना चाहती थी किंतु तू तो उसके बहकावे में आ रही थी, न ही तूने, अपनी बहन कल्पना की बात सुनी और न ही मेरी बात मानी। हमने सोचा- जैसा चल रहा है, चलने दो ! तुझे ज्यादा कुछ बता कर परेशान नहीं करना चाहते थे।
वह पैसे की लालची औरत थी, उसने तेरे पापा को भी अपने वश में कर लिया था। उसके कारण तेरे पापा, हमें घर से बाहर निकाल देने के लिए तैयार थे किंतु उनकी योजना मुझे समय से पहले ही पता चल गई। वह तेरे पापा से विवाह करके मेरी 'सौतन' बन जाना चाहती थी।
तभी दरवाजे पर आहट हुई ,दोनों ने बाहर देखा,वहां कल्पना खड़ी थी। कल्पना को देखकर नीलिमा और घबरा गयी और उसने पूछा -तुझे क्या हुआ ?यहाँ कैसे आना हुआ ?
मुझे शिवांगी ने फोन किया था ,कह रही थी -कि कुछ बात बतानी है।
नीलिमा ने शिवांगी की तरफ देखा,तब वो बोली -दीदी !को भी तो पता चले ,आपने क्या किया है ?जिस माँ को हम इतना अच्छा समझ रहे थे ,उनकी सच्चाई क्या है ?
क्या है ?इनकी सच्चाई !कल्पना ने आगे आते हुए पूछा।
यही कि पापा ने आत्महत्या नहीं की वरन उनकी हत्या हुई है।
तुझे, ये सब किसने बताया ?कल्पना ने उसके पास बैठते हुए पूछा।
मुझे इंस्पेक्टर साहब !ने चांदनी के केस की छानबीन के लिए थाने बुलाया था और पूछताछ करते हुए उन्होंने कहा -जो औरत अपने पति की हत्या कर सकती है ,वो तुम्हारी सास की हत्या भी कर सकती है।
उसकी बात सुनकर कल्पना चौंकी नहीं और शिवांगी से बोली -और तूने इंस्पेक्टर की बातों पर विश्वास कर लिया। अरे !वो अपने केस को सॉल्व करने के लिए कुछ भी करेगा। जिस माँ ने हमें इतनी मुश्किलों से पाल -पोषकर बड़ा किया ,इतने वर्षों से हमारे साथ है ,उसकी ममता -प्यार तूने क्षणभर में झुठला दिया। तभी तो हम दोनों तुझसे, चांदनी से भी बात करने के लिए मना करते थे। उसकी वास्तविकता क्या है ?हम जानते थे ,तू किसी के भी बहकावे में आ जाती है। तूने उस माँ के विषय में नहीं सोचा ,जिसने हमारे भाई को अपने सुखों के लिए नहीं छोड़ा। हमें पाल -पोषकर अपने पैरों पर खड़ा किया और आत्मनिर्भर बनाया। वो क्या ऐसा कुछ कर सकती हैं ?
तो क्या इंस्पेक्टर झूठ बोल रहा है ?भड़कते हुए शिवांगी ने पूछा।
यदि वो झूठ नहीं भी, बोल रहा है ,तो हमारी माँ ने उस समय जो कदम उठाया ,हो सकता है ,उस समय उनकी कोई मजबूरी रही होगी वरना इतना कठोर कदम उठाने से पहले इंसान चार बार सोचेगा। वो हमारे ही पिता नहीं थे ,उनके पति भी थे ,उनका सुहाग थे। कौन औरत चाहेगी ?कि वह तमाम उम्र विधवा का जीवन जिए ,उन्होंने हमारे लिए अपने सुहाग की बलि दी है। वो चाहतीं तो किसी और से विवाह करके सुकून का जीवन जी सकती थीं। हमसे प्यार नहीं होता तो हमें अनाथाश्रम में डाल सकती थीं किन्तु इन्होंने ऐसा नहीं किया,इन्होने तो, अनाथ बच्चों को सहारा दिया है।
अपनी बेटी की बातें सुनकर नीलिमा के सामने, अपनी ज़िंदगी किसी चलचित्र की तरह घूम गयी। रोते हुए बोली - उस चम्पा के कारण ,हम आज भीख मांग रहे होते। तब मुझे, तुम्हारा छोटा भाई और तुम दोनों बहनों के कारण, यह कदम उठाना पड़ा था वरना हम आज कहीं सड़क पर भीख मांग रहे होते और वो चम्पा चांदनी नहीं ,तुम्हारे पापा की दूसरी पत्नी होती। तुम दोनों लड़कियां थीं ,इस कारण उन्हें तुमसे कोई मतलब ही नहीं था ,उन्हें एक बेटा चाहिए था,अथर्व की तरफ देखकर बोली -वे इसे भी नहीं चाहते थे।
