'इंस्पेक्टर विकास खन्ना' और उनकी सहयोगी 'सुनीता सिंह 'थाने में, शिवांगी से कुछ पूछताछ कर रहे हैं। अब तक उनकी खोजबीन के माध्यम से उन्होंने अंदाजा लगाया, कि चांदनी को मारने में, शिवांगी की मां नीलिमा, या फिर उसके बहन- जीजा का हाथ भी हो सकता है, किंतु शिवांगी इस बात को स्वीकार नहीं कर रही थी। वह उसकी सोच से, बिल्कुल अलग था। वह सोच भी नहीं सकती थी, कि मेरी मां किसी का कत्ल भी कर सकती है। तब इंस्पेक्टर शिवांगी से कहता है कि उसको मारने का, कारण तो तुम्हारे पास भी था। वह तुम्हारी भावनाओं का लाभ उठा रही थी।
तब शिवांगी कहती है - इंस्पेक्टर साहब ! ऐसा कुछ भी नहीं है, मैं मानती हूं, कि वह मेरी भावनाओं से खेल रही थी किंतु इसका अर्थ यह तो नहीं, कि हम उसको मार दें। वह हमारे लिए ,इतनी महत्वपूर्ण भी नहीं थी, कि हम उसकी दहशत में जी रहे थे और मजबूरीवश हमने उसको मार दिया। क्या हम, उससे बचकर जा नहीं सकते थे ,मारना ही एक माध्यम रह गया था। जब हमें उसकी योजना का पता चला ,तब हमने उसको नजरअंदाज करना आरम्भ कर दिया था, इसका हल मारना ही नहीं रह गया था।
अच्छा, यह बताइए ! जिस दिन चांदनी गायब हुई, उस दिन आप कहां थी ?
मैं अपने घर पर ही थी, और अभी आप मेरी मम्मा के लिए पूछेंगे, तो मैं पहले ही बता देती हूं, मेरी मम्मा भी घर पर ही थीं। हम लोग जब से दीदी के घर से आए हैं, उनके घर में कब क्या हो रहा है? हमें कुछ मालूम नहीं है। यह सूचना भी हमें बाद में ही, पता चली कि वह घर से गायब हैं , इस पर भी, हमने कोई ध्यान नहीं दिया था क्योंकि उनका बाहर आना-जाना तो लगा ही रहता है। अब हमें यह नहीं मालूम कि उनके घर जाकर कौन उनकी हत्या करके, उस जमीन में उन्हें दफन कर सकता है ?
इंस्पेक्टर को शिवांगी की बात सही लगती है, किंतु अभी भी उसका मन नहीं मान रहा था कि नीलिमा ऐसा कुछ नहीं कर सकती। उसने धीरेंद्र को मारने में भी, अच्छी योजना बनाई थी किसी को पता ही नहीं चला था, कि यह हत्या थी या आत्महत्या ! अच्छा यह बताओ ! जब तुम लोग वहां रहती थीं तो क्या तुम लोगों में आपस में कुछ बातचीत हुई थी ? तुम्हें कैसे पता चला ?कि वह तुम्हें धोखा दे रही थी या तुम्हारी भावनाओं से खेल रही थी। तुम्हारी मम्मी के साथ कुछ बात हुई हो।
इंस्पेक्टर साहब! आप घूम फिर कर वहीं आ जाते हैं, आप क्या चाहते हैं? कि मैं यह कह दूं कि चांदनी की हत्या मैंने और मम्मा ने मिलकर की है, तब आपको खुशी मिलेगी।
मेरे कहने का अर्थ यह नहीं है ,मैं चाहता हूं कि अपराधी पकड़ा जाए और उसे सजा हो।
अब आपको कोई नहीं मिल रहा तो आपने हम दोनों मां बेटियों को पकड़ लिया। आप किस आधार पर हम पर इल्जाम लगा रहे हैं।
अभी इल्जाम नहीं लगाया है, सिर्फ पूछताछ चल रही है, और यह मेरा कार्य है।
अब आप ही बता दीजिए, मुझे क्या करना होगा ?
तुम्हें कुछ नहीं करना है, बस बारीक से बारीक कोई भी, बात हो ! जो तुम्हें ध्यान न रही हो या तुम छुपाने का प्रयास कर रही हो वह तुम्हें बतानी होगी।
सोचते हुए शिवांगी बोली -जब हम लोग वहां रह रहे थे, तब एक दिन, मम्मी ने उससे बातें करते हुए मुझे देख लिया था और मुझे समझाने का प्रयास किया था कि इससे ज्यादा घुलना - मिलना ठीक नहीं है और तब उससे भी कहा था -कि मेरी बच्चियों से दूर रहो !
कहीं ऐसा तो नहीं, तुम्हारे सामने उन्होंने धमकी दी हो और बाद में, कुछ और ही षड्यंत्र रच दिया गया। तुम्हारी बहन और मां ने मिलकर उसे मार दिया।
इंस्पेक्टर साहब ! आपको एक बार में बात समझ में नहीं आती , मेरी मां ऐसा कतई नहीं कर सकती। लगभग चिल्लाते हुए शिवांगी कहते हुए कुर्सी से उठ खड़ी हुई।
यह बात तुम मुझे मत समझाओ ! कि वह क्या कर सकती है और क्या नहीं ? मैं उसे अच्छे से जानता हूं, विकास को भी क्रोध आ गया।
आप कहना क्या चाहते हैं? क्या मेरी मां खून कर सकती है ?
हां, अपने परिवार के लिए, अपने बच्चों के लिए, वह किसी का खून भी कर सकती है, इंस्पेक्टर क्रोधित होते हुए बोला। इतनी देर से उससे पूछताछ कर रहा था, किंतु कुछ भी हल नहीं निकल रहा था। तब वह बोला- जब वह अपने पति की हत्या कर सकती है, तो वह कुछ भी कर सकती है। वह चांदनी को भी मार सकती है।
जो बात उसने कहीं, शिवांगी एकदम से समझ नहीं पाई, और इंस्पेक्टर से पूछा -आपने मेरी मम्मा के विषय में ऐसे, कैसे कह दिया ?
अब इंस्पेक्टर को लगा -कि उससे शायद थोड़ी गलती हुई है, तभी लगा शायद ,इस कारण से वह सच्चाई के करीब पहुंच जाए। शिवांगी एकदम शांत हो गई, और बोली -आपने अभी मेरी मम्मा के विषय में क्या कहा ? क्या उन्होंने हमारे पापा का खून किया है ?
इंस्पेक्टर ने सोचा- ज्यादा कुछ कहना उचित नहीं है, तब वह शिवांगी से बोला -अब तुम अपने घर जा सकती हो।
मैं अपने घर नहीं जा रही हूं, मुझे सच्चाई जानना है ,ज़िद करते हुए शिवांगी बोली - आप मेरी मम्माऔर पापा के विषय में, कैसे जानते हैं ? उस समय तो मैं बहुत छोटी थी।
वह केस मैं ही, हैंडल कर रहा था, जो हो चुका उसे छोड़ दो ! किंतु शक करना हमारा कार्य है,' शक करेंगे, तभी तो सच्चाई तक पहुंचेंगे।' कहते हुए, वहां से हट गया। शिवांगी का चेहरा उतर गया , इंस्पेक्टर ने इतनी बड़ी बात कैसे कह दी ? मेरी मम्मा तो कभी जेल भी नहीं गईं ,क्या सोचकर उसने यह सब कहा ? उसके मन में अनेक प्रश्न घूमने लगे। आखिर क्या हुआ होगा ?
जब वह घर पहुंची, तब नीलिमा उसकी प्रतीक्षा में थी, घर पहुंचते ही उसने शिवांगी से पूछा -तू कहां चली गई थी ? तू कहीं इंस्पेक्टर के कहने में आकर थाने तो नहीं चली गई थी किंतु शिवांगी ने कुछ जवाब नहीं दिया और वह चुपचाप अपने कमरे में चली गई, और वहां जाकर रोने लगी। कुछ बताती क्यों नहीं है ? आखिर क्या हुआ है ? उसके पीछे आते हुए नीलिमा ने पूछा।
मम्मा !आप यहां से चले जाओ ! मुझे अकेला रहना है।
क्यों रहना है ? जब तक तू मुझे कुछ नहीं बताएगी मैं यहां से नहीं जाऊंगी , आखिर हुआ क्या है ?
मेरे पापा को क्या हुआ था?
इतने वर्षों पश्चात यह सवाल क्यों पूछ रही है ?
मैं जो पूछ रही हूं आप उस सवाल का जवाब दीजिए ?
क्या नीलिमा ,अपनी बेटी शिवांगी के सवालों का जबाब दे पायेगी ? ये सवाल उनके जीवन में में क्या भूचाल लाने हैं ?आइये आगे बढ़ते हैं।
