Sankalp

'' संकल्प ''कितना छोटा सा शब्द है , किंतु अपनी पर आ जाये तो ,नानी याद दिला देता है। किंतु किसी बात के लिए हम तभी ''संकल्प ''लेते हैं। जब कोई समस्या या संघर्ष हमारे लिए परेशानी का कारण बन जाता है। तब हम अपने ''संकल्प'' द्वारा उसमें सुधार करने का प्रयास करते हैं। उस समस्या का समाधान चाहते हैं।  सुबह से शाम तक न जाने कितने छोटे-छोटे संकल्प , हम अपने आप से ही करते हैं ,तो कभी किसी के सामने हेकड़ी दिखाने के लिए भी 'संकल्प' ले लेते हैं किंतु उसको निभाना बहुत ही मुश्किल है। तभी तो मैंने कहा -''कहने को तो यह एक छोटा सा शब्द है किंतु यह बहुत भारी पड़ जाता है।'' शब्दों पर भी, सोच पर भी और व्यवहार में भी। कुछ लोग हर वर्ष' संकल्प 'लेते हैं जिसे अँग्रेजी में ''रेजॉल्यूशन ''कहते हैं। आज से मैं यह अच्छा कार्य करूंगा, वैसे एक बात अवश्य है , संकल्प अच्छे कार्यों के लिए ही लिया जाता है।


 संकल्प का दूसरा नाम,'' प्रतिज्ञा ''भी है ,जैसे भीष्म पितामह ने ली थी किंतु उसके कारण उन्हें और उनके राज्य को अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा। तभी आज के समय में यदि कोई कहता है -मैं यह कार्य नहीं करूंगा मैंने ''संकल्प ''लिया है। तब उसके संकल्प को तुड़वाने के लिए ,कह देते हैं -कुछ नहीं होता ,तूने क्या ''भीष्म प्रतिज्ञा ''ले ली है ?

''संकल्प ''लेना कोई बुरी बात नहीं है ,किंतु उसे निभाना बहुत ही मुश्किल है। उसको निभाने के लिए कई बार अनेक कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ जाता है। अनेक परेशानियां उठानी पड़ती हैं, किंतु यदि वह सफल हो जाता है , तो उससे बेहतर कोई इंसान नहीं। अपने किये ' संकल्प 'को निभाने के लिए, कई बार लोग , विपत्तियों को देखते हुए 'संकल्प' ही त्याग देते हैं। छोटे-छोटे संकल्प तो हर कोई ले लेता है -जैसे मैं  शराब नहीं पियूंगा, सिगरेट छोड़ दूंगा , मांसाहारी भोजन नहीं करूंगा। आज मैं मेहनत से पढ़ूंगा, और अबकी बार कक्षा में प्रथम आऊंगा। आज मुझे अपना बाकी का कार्य पूर्ण कर लेना है या जैसे हम भी कह सकते हैं, अब मैं यह अपनी कहानी के, संपूर्ण भाग पूर्ण कर लूंगी, किंतु क्या ऐसा हो पाता है ? हो सकता है, मनुष्य में संकल्प लिया हो और वह प्रयासरत भी है किंतु वह बीमार हो गया। शारीरिक अस्वस्थता  के कारण वह अपने संकल्प को पूर्ण करने में, अपने को सक्षम नहीं पाता है। किंतु कई लोगों का दृढ़ संकल्प, इतना कठोर होता है ,उन्हें अपने स्वास्थ्य की भी परवाह नहीं रहती और अपने कार्य में तल्लीन रहता है। 

पुराने समय में ऋषि -मुनियों का दृढ़ संकल्प ही , उन्हें वर्षों तक कठोर तपस्या करने देता था। हर आदमी का, संकल्प लेने का तरीका अलग है, कई लोग ,अपने देश के हित के लिए 'संकल्प ''लेते हैं ,देश की भलाई में ही सबका हित समझते हैं। चिकित्सक भी ,सेवा का संकल्प लेते हैं। एक सेनानी भी ,जान की बाज़ी लगाकर देश की आजादी का संकल्प लेता है ,उनके कर्त्तव्य बहुत ही ,महत्वपूर्ण होते हैं और उस 'संकल्प 'को पूर्ण करने के लिए प्रयासरत रहते हैं। कई बार अपने को समझाने के लिए ही,इंसान अपने आप से ही संकल्प ले लेता है ,किंतु यदि उसे अपना संकल्प पूर्ण करना है, तो उसे अपनी बात पर दृढ़ रहना होगा। अधिकतर बुराइयों को छोड़ने के लिए ही, संकल्प लिए जाते हैं। अच्छाइयों और सही राह पर चलने के लिए , ''दृढ़ संकल्प ''होना ही पड़ता है। 

संकल्प लिया,अपने आप से ,

अब कभी न पियूंगा ,शराब !

 जीवन को नर्क बना देती ,

यह सेहत के लिए है ,खराब !

 छोटा सा एक ''संकल्प ''था। 

 सुधार उसके जीवन  का था। 

 'संकल्प 'उसका दृढ़ नहीं,

 देखी, शराब की दुकान !

 भूल गया ,''संकल्प ''सभी ,

 मन को ,अपने बहलाने लगा। 

कल छोडूंगा ,समझाने लगा। 

विपत्तियों से तंग आकर........ 

'' संकल्प ''ले लिया। 

निभा न सका औ रोने लगा। 

आदि व्यसन का हो गया । 

छुटकारा पाना चाहता था। 

किंतु छुटकारा पा न सका। 

''कल ''पर टालता रहा ,

 किंतु ''कल ''न आ  सका। 

कल भी उसको ,छलता रहा। 

आसानी से लिया ''संकल्प '',

किंतु संकल्प निभा न सका। 

  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post