रातों को सपने में,आ -आकर जागती हो,
हौले से मुस्कुरा कानों में ,कुछ कह जाती हो।
अपने रेशमी केशों को बिखरा,मुझे रिझाती हो।
चंचल हिरनी सी तुम ,मेरी यादों में आतीं........
और एक खुशबू के झोंके सी ,चली जाती हो।
मेरे ख्वाबों पर भी ,अधिकार जताती हो।
छाया सी तुम, मेरे इर्द-गिर्द मंडराती हो।
मेरे जीवन की तुम रेशमी डोर हो।
अब तुमसे और क्या कहूं ? मैं हूं तुम्हारा !
मेरी हर स्वांस पर हक़ है ,तुम्हारा !
जानता हूँ ,मेरे लिए ही है , शृंगार तुम्हारा !
मेरे ह्रदय की धड़कनों पर,हक़ है तुम्हारा !
ठुकरा दो !मुझे या प्यार दो !'मैं हूँ तुम्हारा ''
