''ध्यान ''यानि ''एकाग्रता !
मन -चित्त का एकाग्र होना।
विद्या चाहे ,'एकाग्रता !
ज्ञान चाहे , एकाग्रता !
आध्यात्म चाहे ,एकाग्रता !
कार्य कोई भी हो...... ,
ध्यान लगाना ,आवश्यक !
मन की एकाग्रता,आवश्यक !
एकाग्रता आती ,अभ्यास से ,
ध्यान, आरम्भ होता योग से,
मन की बेचैनी भटकाती है।
रात्रि में ,नींद नहीं आती है।
शांति आती ,एकाग्र मन से।
सांसारिक विचारों से दूर.......
प्रकृति भी ,संगीत सुनाती है।
स्व को स्व से मिलाती है।
