Svtantrta divas ke [78 varsh]

 स्वतंत्र भारत में, स्वतंत्रता से स्वांस ले रहे ,ये क्या कम है ?

सपने स्वयं सजा रहे ,विचारों का जहाँ बसा रहे ,क्या कम है ?

तन और मन से भी अपने को आज़ाद किया , ये क्या कम है ?

बीते बरसों ,आज भी हम ,स्वतंत्र धरा पर खड़े ,ये क्या कम है ?



मुक्त करो! अपनी सोच को श्वेत पंछी से उड़ो! मन शांत करो !

भारत की धरती पर आज भी सजती रंगोली है ,ये क्या काम है?

नई सोच !नई पहचान संग चेहरों पर मुस्कान !यह क्या कम है?

हर वर्ष तिरंगा फ़हरायें ,तिरंगे को नमन कर रहे ,ये क्या कम है ?


ग़ुलामी की कई जंजीरें तोड़ ,आज अपने दम पर खड़े ,ये क्या कम है ?

अमीरी -ग़रीबी ,जाति -पाती का अब करते विरोध ! ये क्या कम है ?

 आज देश में ही नहीं ,विदेशों में भी बजता डंका है ,ये क्या कम है ?

बहुत कुछ खोया ,पाया भी बहुत कुछ, परस्पर प्रेम रहे यही बहुत है। 


शहीदों का बलिदान हमेशा स्मरण रहे, स्वतंत्रता की लौ मिलकर जलाते रहें ! 

इंसान को इंसान समझें , इंसानियत न मरने पाए , महिलाओं का सम्मान करें। 

समय यूँ ही बढ़ता रहे ,समय की आँधियों में न झुकने पाएं। 

ग़र आये कोई तूफाँ इस जमीं पर ,सर काट उसका भारत माँ को भेंट चढ़ाएं। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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