स्वतंत्र भारत में, स्वतंत्रता से स्वांस ले रहे ,ये क्या कम है ?
सपने स्वयं सजा रहे ,विचारों का जहाँ बसा रहे ,क्या कम है ?
तन और मन से भी अपने को आज़ाद किया , ये क्या कम है ?
बीते बरसों ,आज भी हम ,स्वतंत्र धरा पर खड़े ,ये क्या कम है ?
मुक्त करो! अपनी सोच को श्वेत पंछी से उड़ो! मन शांत करो !
भारत की धरती पर आज भी सजती रंगोली है ,ये क्या काम है?
नई सोच !नई पहचान संग चेहरों पर मुस्कान !यह क्या कम है?
हर वर्ष तिरंगा फ़हरायें ,तिरंगे को नमन कर रहे ,ये क्या कम है ?
ग़ुलामी की कई जंजीरें तोड़ ,आज अपने दम पर खड़े ,ये क्या कम है ?
अमीरी -ग़रीबी ,जाति -पाती का अब करते विरोध ! ये क्या कम है ?
आज देश में ही नहीं ,विदेशों में भी बजता डंका है ,ये क्या कम है ?
बहुत कुछ खोया ,पाया भी बहुत कुछ, परस्पर प्रेम रहे यही बहुत है।
शहीदों का बलिदान हमेशा स्मरण रहे, स्वतंत्रता की लौ मिलकर जलाते रहें !
इंसान को इंसान समझें , इंसानियत न मरने पाए , महिलाओं का सम्मान करें।
समय यूँ ही बढ़ता रहे ,समय की आँधियों में न झुकने पाएं।
ग़र आये कोई तूफाँ इस जमीं पर ,सर काट उसका भारत माँ को भेंट चढ़ाएं।
