Shaitani mann [part 2]

नितिन , अपने दोस्तों का पीछा करते हुए, एक होटल के करीब पहुंच गया।  वहां का वातावरण देखकर वह अचंभित रह गया था। रात्रि के समय भी दिन जैसा, प्रतीत हो रहा था। इतनी अधिक रोशनी थी, और संगीत बज रहा था। उसका वहां आने का उद्देश्य, अपने दोस्तों को,'' रंगे हाथों पकड़वाना था। और वह यह देखना चाहता था कि यह लोग, कहां जाते हैं ? किंतु ऐसा वातावरण, उसने पहले कभी नहीं देखा था। वह हतप्रभ सा होकर, आश्चर्य से यह सब देखता रहा, और अपने दोस्तों का पीछा करते-करते, वह उसे स्थान पर पहुंच गया, जहां पर लड़के और लड़कियों का अर्धनग्न अवस्था में नृत्य चल रहा था। यह सब वातावरण देखकर, वहां से वापस लौट जाना चाहता था किंतु तभी उसे अपने दोस्तों का स्मरण हुआ, जो उसे अब कहीं भी दिखलाई नहीं दे रहे थे। पास ही पड़ी कुर्सी पर वह बैठ गया, और सोचने लगा -यहीं कहीं गए होंगे, मैं यहीं बैठकर उनके प्रतीक्षा करता हूं।


 तभी उसके सामने किसी ने, पीने के लिए जल रखा, लेकिन उसने यह भी नहीं सोचा -यह क्या है ?कुछ कड़वा सा प्रतीत तो हुआ ,वह उसे एक ही घूंट में पी गया। एक अलग ही सुरूर उसकी नस -नस में समा गया फिर न जाने क्या हुआ ? वह नहीं जानता। 

प्रातः काल जब उठा, सिर में दर्द था, न जाने ,आज क्या हुआ है ? तभी उसे रात्रि की बात स्मरण हो आई और सोचने लगा -क्या मैं सच में ही ,वहां गया था या मैंने कोई सपना देखा था, कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं तो जगा हुआ था। अब उसने अपने दोस्तों के बिस्तर देखें, ये लोग तो अभी भी सो रहे हैं । घड़ी में समय देखा तो दिन के 10:00 बजे हुए थे। यह क्या हो गया ? मुझे तो आज अपनी क्लास में जाने के लिए देरी हो गई। फुर्ती से तैयार हुआ और अपनी कक्षा में गया ,जहाँ आज उनके प्रोफेसर ने बताया -कि कुछ लड़के दीवार फाँदकर ,कॉलिज से बाहर जा रहे हैं। यह बात सभी को मालूम है किन्तु कॉलिज वाले चाहते हैं कि बच्चे ,अब बच्चे  नहीं रहे ,देश का भविष्य उनके हाथों में है ,इसीलिए समय रहते ही उन्हें संभल जाना चाहिए। यदि मैनेजमेंट ने कुछ एक्शन लिया तो न जाने कितने बच्चों का भविष्य बिगड़ जाएगा ?

सर !मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूं , नितिन ने अपनी सीट से उठकर खड़े होते हुए कहा। 

हाँ, कहो !क्या कहना चाहते हो?

मेरे कमरे  में दो छात्र ऐसे ही हैं ,और मैं चाहता हूँ कि मेरा कमरा बदल दिया जाये ,इसके लिए मैंने पहले भी शिकायत की थी ,किन्तु किसी ने भी मेरी बातों पर ध्यान नहीं दिया और न ही , मेरा कमरा बदला गया।  

तुम्हें ऐसा क्यों  लगता है ?कि वो लोग सही नहीं है ,वैसे तुम्हारे सहयोगी कौन हैं ?

जी ''सुमित सहगल ''और'' रोहित चोपड़ा ''

क्या ????आश्चर्य से प्रोफेसर बोले -देखते हैं ,तुम्हें कोई  कमरा मिलता है या नहीं। वैसे तुम्हें उनसे क्या लेना -देना है ? तुम एक होनहार छात्र हो !मैंने तुम्हारा रिकॉर्ड देखा है। तुम अपना कार्य करो !तुम्हें  इस बात से कोई लेना -देना नहीं होना चाहिए कि कोई क्या कर  रहा है ?

ऐसा कैसे हो सकता है ?सर ! हमारे कमरे में जब कोई इंसान रहता है ,तब उसे नजरअंदाज कर हम कोई भी कार्य कैसे कर सकते हैं ? ऐसा नहीं है ,मैंने प्रयास किया भी था किन्तु नहीं हो पाया। मैं पढ़ने बैठता ,तब वो लोग जोर - जोर से बातें करने लगतेहैं । मैं सोता ,तो लाइट जली रहती हैं जिस कारण ठीक से सो भी नहीं पाया। वो मेरे सामान की तलाशी लेते हैं यानि की कुल मिलाकर ,उन्हें मुझे परेशान करने का प्रयास रहता है। 

ऐसा कुछ भी नहीं है ,वे तो ऐसे ही हैं ,उनको किसी की सुविधा -असुविधा से कोई लेना -देना नहीं है ,तभी पीछे से एक छात्र बोल उठा। 

प्रोफेसर महोदय !और नितिन ने घूमकर आवाज की दिशा में देखा। वे पिछले कई वर्षों से ऐसे ही हैं। जोश में आकर उस छात्र ने ,अपने स्थान से उठकर कह तो दिया किन्तु तुरंत ही घबरा भी गया अपनी गलती का एहसास होते ही ,''माफ़ कीजिये ''कहकर बैठ भी गया।

अच्छा !अब इन बातों को आगे न बढ़ाते हुए प्रोफेसर साहब ने,उन बातों को नजरअंदाज करने का प्रयास किया और गंभीरता पूर्वक पढ़ाने लगे। 

घंटी बजते ही ,प्रोफेसर साहब !कक्षा से बाहर आ गए , किंतु बाहर जाने से पहले, नितिन से बोले -मुझसे  मिलने आना, तुमसे कुछ बातें करनी है। 

जी, अवश्य !नितिन मन ही मन सोच रहा था-शायद प्रोफेसर साहब ! मेरी समस्या का निदान करेंगे। किंतु जब वह प्रोफेसर साहब के पास पहुंचा , उन्होंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और बोले -तुम अच्छे लड़के हो, पढ़ने में भी होशियार हो, क्यों इन पचडों में पड़ते हो ? वह बहुत पैसे वाले लोग हैं ? उनके लिए पढ़ाई का कोई महत्व नहीं, वे चाहे तो डिग्रियां ऐसे ही खरीद सकते हैं किंतु उनके परिवार वालों ने भी उनसे परेशान होकर उन्हें यहां हॉस्टल में डाल दिया है , मैं तो तुमसे बस यही कहना चाहूंगा ,उनसे दूर ही रहना। यह अच्छी बात है कि उन्होंने अभी तक तुम्हारे साथ कुछ ऐसा गलत व्यवहार नहीं किया है किंतु जिन्होंने उन्हें उन्हें झेला है, वह बस वही बता सकते हैं। 

सर !आप यह मुझे चेतावनी दे रहे हैं। 

ऐसा ही कुछ समझ लो !

सर !क्या आप जानते हैं ? हॉस्टल से बाहर जाने वाले लड़कों में से ये दोनों भी एक हैं।

 बहुत अच्छी तरीके से जानता हूं, मेरा तो उद्देश्य तुम्हें समझाने का ही था बाकी तुम जानो !

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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