Sazishen [part 94]

आज अलसाई सी,सुबह में अचानक शिवांगी का फोन आ गया ,क्या आप शिवांगी को नहीं जानते ?अरे नीलिमा की दूसरी बेटी ,जो विदेश में रहकर अपनी शिक्षा पूर्ण कर रही है। उसे भी नीलिमा से शिकायत थी इसीलिए आज उसने ही फोन कर लिया ,जब बातों का सिलसिला चल निकला तो बहुत सारी बातें भी हुईं इसी तरह अपनी मम्मी की कुछ बातें ,कल्पना शिवांगी को बता रही थी ,तभी निलिमा ने उसकी बातें सुनी और बोली -लो, आजकल तो भलाई का जमाना ही नहीं रहा ,अपनी चाय समाप्त करते हुए नीलिमा बोली -एक तो इन बेटियों के सुख-दुख की परवाह करो !मैं इनके प्यार में खलनायिका  नहीं बनी ,तो इन्हें अब प्यार में मजा ही नहीं आ रहा। जब मैं किसी खलनायिका की तरह, पहले उसे [तुषार को ]घूरती ,फिर भारी से शब्दों में ,या तो सोचने के लिए समय मांगती या फिर इस विवाह से इनकार ही कर देती, और फिर कहती - मुझे इस ग़रीब लड़के से ये रिश्ता मंजूर नहीं है ,जिसके रहने -सहने का ही ,खुद का ठिकाना नहीं ,वो मेरी बेटी को कहाँ ले जाकर रखेगा ? जब इनकी प्रेम कहानी में ,माँ की तरफ से एक नया मोड़ नजर आता ,तब इनकी प्रेम कहानी ''सुपरहिट ''होती। किन्तु अब ,सब कुछ इतनी सरलता से हो रहा है ,तो इसे मजा ही नहीं आ रहा है। 


नहीं ,ऐसी कोई बात नहीं है, कल्पना मुस्कुराकर अपनी माँ के गले में प्यार से बांहें डालते हुए बोली - आप हमारे मम्मा हैं,जो कुछ भी करेंगे ,हमारे अच्छे के लिए ही करेंगीं कहते हुए, अपनी मम्मी के समीप ही जाकर बैठ गई।

 अच्छा !अब तुम यह बताओ !मेरी 'प्रेम कहानी 'और कहानी में मम्मा की तरफ से कहानी में टविस्ट भी ,तुमने सब सुन लिया, किन्तु तुम्हें कोई मिला या नहीं, स्पष्ट बताना, हम आजकल के आधुनिक मॉम और सिस्टर हैं ,कहते हुए कल्पना हंसने लगी। नो छुपाना !

है तो कोई, किंतु मैं उसके मन की बात नहीं जानती और जिसके मन की बात जानती हूं वह मुझे कम पसंद है। 

यह क्या बात हुई ?

नीलिमा हंसते हुए बोली -यही तो बात हुई अब कहानी में टविस्ट आया ना , जो तुम चाहती थीं, वह इसकी कहानी में मिलेगा।' बेटा जो तुम्हें प्यार करता है, उसके प्यार का सम्मान करो !हो सकता है, जिसे तुम प्यार करते हो,वह तुम्हें प्यार ना करें ,जो भी कदम उठाना बड़े ही सोच समझकर उठाना प्यार में कभी भी जबरदस्ती नहीं होती, प्यार में सिर्फ प्यार होता है।'' उसके सिवा और कोई जगह रहनी ही नहीं चाहिए, न ही कोई शक, न ही कोई विवाद ! अच्छा यह बताओ !तुम्हारा वह प्रेमी कहां रहता है ? तुम्हारे साथ ही पढ़  रहा है। 

नहीं ,वह मुझसे सीनियर था, वह अपनी पढ़ाई पूरी करके जा चुका है , बहुत पैसे वाला है और अपने पिता का व्यापार संभाल रहा है। यह तो बड़ी अच्छी बात है तुम्हें उसका पता या अन्य कोई जानकारी है अथवा उसका कोई फोटो है ,तुम्हारे पास। 

आप भी न दीदी !बिल्कुल जासूस की तरह, छानबीन करने लगतीं हैं, नंबर तो है ,उसका कभी-कभी उससे बातें भी हो जाती हैं पर जब तक कोई बात स्पष्ट नहीं होगी तब तक मैं आपसे कुछ नहीं बताऊंगी ,न ही, कहूंगी और दूसरा वाला बता कैसा है ? हो सकता है ,वह मुझे पसंद आ जाए, हंसते हुए कल्पना बोली। 

अच्छा ,दो-दो पर नजर रखना चाहती हैं। हमारे होने वाले जीजू यह सब बर्दाश्त कर लेंगे। पहले उनसे पूछ कर तो देखिए !

अच्छा !यह सब बातें तो आप छोड़िए !आप बताइए कब घूमने आ रहे हैं ?

 शीघ्र ही हम कोई कार्यक्रम बनाते हैं। जब भी तुम्हारी बहन को छुट्टियां मिलेंगी इकट्ठी एक सप्ताह की छुट्टी लेकर हम आ जाएंगे।

 हां, यह सही रहेगा। अपुन को क्या करना ?अपन को तो घूमने से मतलब है , कहते हुए नीलिमा हंस पड़ी। 

अच्छा मम्मा ! आजकल आप ऐसी भाषा बोलने लगी हैं । 

एडी है ,क्या ?अपुन को जब इसीच जगह रहने का है, तो यही की भाषा बोली जाएगी ना.......... तीनों ही एक साथ हंसने लगी। तब नीलिमा गंभीर होते हुए बोली -यदि हम इस बीच नहीं आ पाते हैं ,तो तुम्हारी बहन की विवाह का जब भी दिन निश्चित होगा ,तब मैं तुम्हें सूचना दे दूंगी। वैसे तुमने पढ़ाई के बाद आगे क्या सोचा है ?

सोचना क्या है ?वापस अपने घर आना है, अपनी सिस और मम्मा के साथ, वही मिलकर एक मकान ले लेंगे और सब एक साथ रहेंगे, शिवांगी ने अपना निर्णय सुनाया। 

अच्छी योजना है, यदि मैं चली भी जाती हूं तो मेरे पीछे मम्मा का ख्याल रखने के लिए तुम तो होगी ही.......  

हां ,वही तो कह रही हूं। 

चुप करो ! तुम दोनों, तुमने अभी से ही मुझे बुढ़िया बना दिया है ,अभी मैं तुम दोनों से ज्यादा काम कर लेती हूं , त्याग और परोपकार की मूर्ति बनना चाहती हैं। अच्छा यह बताओ !तुमने खाने में आज क्या बनाया ? हमारे यहां तो सब बढ़िया मस्त खाना बनता है ,ज्यादातर नॉनवेज होता है। 

ठीक है ,चलो !अपना ख्याल रखना अब हम भी, तैयार होते हैं, तुम्हारे भाई का भी तो ख्याल रखना है। 

 मैं तो बातों ही बातों में भूल गई ,अब वह कैसा है? उसकी तबीयत में कुछ सुधार है या नहीं शिवांगी ने पूछा।

 अब तो बहुत से अक्षर सीख गया है , बहुत सी बातें समझने भी लगा है, किंतु योगा करने में थोड़ा अलसाता है ,पर मैं जबर्दस्ती उसे योगा कराती हूं। मेरे जाने के पश्चात ,तुम दोनों को ही तो उसका ख्याल रखना है , तुम दोनों उसकी बड़ी बहनें हो। 

मम्मा ! आप यह बेकार की बातें मत किया कीजिए ,अच्छा !मैं फोन रखती हूं , कहते हुए शिवांगी ने फोन काट दिया। 

देखा ,उससे तनिक भी सच्चाई नहीं सुनी जाती, नीलिमा बोली। 

 सुबह-सुबह मम्मा !आप भी न..... कैसी बातें लेकर बैठ जाती है ?गंभीर होते हुए बोली। 

बेटा !मैं चाहती हूं ,तुम लोग मजबूत बनो मानसिक और शारीरिक दोनों ही रूप से कल को यदि मैं ना रहूं , तब तुम दोनों अपने भाई को अच्छे से संभल सको ! ''यह तो जीवन का सत्य है जो इंसान आया है वह एक न एक दिन तो जाएगा ही ''इसीलिए मैं तुम लोगों से पहले से ही ये सब कहकर तुम लोगों को मानसिक रूप से मजबूत कर देना चाहती हूं, ताकि मेरे जाने के पश्चात, तुम्हें ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े बाकी जब तक जिंदा हूं ,तुमसे ज्यादा काम करती रही हूं ,करती रहूंगी कहते हुए नीलिमा हंसने लगी। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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