Meri dadi

एक विस्तृत ,विशाल खुला,आकाश थी ,

ममतामयी,बरसती प्रेम की फुहार  थी। 

सहनशील प्रकृति की इक मिसाल थी। 

प्रसन्नचित्त उसका, वो पापा की माँ थी।

 


विशाल आँचल फैलाये समेटती तमाम दर्द ,

गरीबों के लिए तो....... भावों का भंडार थी। 

दुबली -पतली गौर वर्ण काया प्रभु का वरदान थी।  

कम पढ़ी -लिखी होकर भी अनुभवों की खान थी।

 

मुझे कहानी सुनाती, उसकी महानता विशाल थी। 

मेरी परवाह रहती , कभी संग मेरे, मस्ती करती। 

उसे मुझसे ,बहुत आशाएं थीं ,प्रेम था ,उम्मींदें थीं।

''मेरी दादी ''ही नहीं ,वो मेरी प्यारी सहेली भी थीं। 


'' कलयुग आया'' ,जो दादी के रहने लायक नहीं रहा।

 हंसती -मुस्कुराती ''मेरी दादी ''की उसे भी तलाश थी।

हमारे लिए ही नहीं ,मेरी दादी उसके लिए भी ख़ास थी।

परिश्रमी ,प्रेमपूर्ण ,साहसी ,गुणों की खान थी ''मेरी दादी ''  

 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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