मोहब्बत ,प्रेम ,प्यार ,प्रीत कितने नाम गिनाऊँ ?
हर दिल में छुपा खज़ाना ,किस किसको रहस्य बतलाऊँ ?
बग़ीचे में भांति -भांति के पुष्प खिले,महक उनकी सबको भाये।
धरा पर भी इंसान बहुतेरे ,सबमें ,एक ही जीव समाये।
नर हो या नारी ,''प्रभु भक्ति ''में हर मन गुनगुनाये।
खज़ाना छुपा ,अपने ही भीतर ,बाहर क्यों धूनी रमाए ?
राम -राम कहो !या फिर राधे -राधे या फिर भोले नाथ !
कुंजी लिए साथ घूमते , ''प्रेम खज़ाना '' अपने ही हाथ।
वाणी मधुर , व्यवहार कुशल जैसे माखन -मिश्री साथ।
खज़ाना भक्ति में छुपा , भक्ति से ही है ,कान्हा पास।
