बयार कई ,मौसम संग बदलती बयार !
मौसम का रुख देख ,खो जाती बयार !
कभी चलती,शिक्षा और ज्ञान की बयार....
चाटुकारों, कैपिटलिस्टों की बढ़ती बयार !
चलती कभी राजनीति की बयार......
हो जाती ,विकसित बयार........
तो कभी चलती प्रेम की बयार.........
बहती उसमें प्रेम की धार........
कभी आजादी की बयार......
न जाने ,कितने मौसम आये ?
चलती थी ,पहले ताज़ी बयार.....
अब बहती ,हर कहीं प्रदूषित बयार.....
मौसम की तरह ही ,बदलती इंसानी बयार....... !
हर बार अपना अस्तित्व खो, बदलती रही बयार.......
न जाने आज भक्ति या प्रेम की खो गयी बयार.....
मान -सम्मान आदर की खो गयी बयार.......
आज न जाने कहाँ ,खोई कितनी ?बयार.......
मौसम संग ,अपने को बदलती रही बयार......
