Meri naiya

 सच्चाई की डगर पर यह नाव चल पड़ी है। 

बुराई को पीछे धकेल आगे निकल पड़ी है।

शोर मन का अब थम न सकेगा,आएगा बाहर, 

दिल की कुछ बातें, जो अब तक दबी पड़ी हैं।



 माना कि ,'जलधि' सा विस्तृत'जग' पार करना है।  

सच ! कब छुपता ? कोई कहता, कोई लिखता है।  

सच्चाई का सौदागर बन ,पतवार [सच]में विश्वास है।

मेरी उम्मीदों के पन्नों सी ,लहराती निकल पड़ी है। 

 

उड़ते पन्नों में मेरे शब्दों का गगन ओ संसार है। 

 सत्य की नैया संग ले ! मैं चला हूं , प्रेम की राह ,

परिंदों से पन्ने छा जायेंगे ,आशाओं के दिए जलाएंगे। 

भेजता रहा पन्नों से, अपने सपनों की राहें कठिन हैं। 

मैं रहूं ना रहूं, अब तो यही, मेरे साहस का संसार है। 

हृदय पीड़ा बतलाऊं कैसे ?यह नभ -सागर ही ग़वाह हैं। 

कर्म मेरा अनवरत चला रहा,ये मेरे शब्दों का संसार है। 

पन्नों की पीड़ा समझा कौन ?हाथ मेरे पतवार[क़लम ]है। 

उड़ते परिंदों से यह उड़ जाएंगे, संदेश मेरा ये ले जाएंगे। 

भंवर में फंसा 'मैं'डूब गया, क़लम अपनी छोड़ जाऊंगा।[टाइपराइटर ] 

चलता रहेगा, यूं ही जीवन,पन्नों पर 'निशां' छोड़ जाऊंगा। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post