किशोर जी नहीं जानते थे, कि उन्हें करुणा जहां ले जा रही है। वहां उनका सामना उनके, अतीत से ही हो जाएगा। जिसे लगभग वह भूल चुके थे। कॉलेज के समय में,दोनों ही एक -दूसरे के करीब आये थे , प्रभा तो , उनके संग अपने भविष्य की कल्पनाएं संजो रही थी। एक तरीके से देखा जाए तो, दोनों का स्वार्थ भी जुड़ा हुआ था। उनकी युवावस्था के कह लो ! या उनका लालच ! उसके कारण ही, वे प्रभा से जुड़े थे क्योंकि वे भी जिस उम्र के पड़ाव पर आगे बढ़ रहे थे, उसमें सब्ज़बाग ज्यादा नज़र आते थे। बच्चों में ,शीघ्र से शीघ्र अमीर होने की लालसा प्रबल होती है और वह कैसे पूर्ण करनी थी ? उसका माध्यम उन्हें प्रभा ही नजर आई। प्रभा लड़कियों के कॉलेज में पढ़ती थी और किशोर जी भी किसी अन्य कॉलेज में थे।
दोनों ही ,एक विषय को पढ़ने के लिए , एक ''शिक्षण संस्थान ''में जाते थे। दोनों की आपस में ,वहीं मुलाकात हुई उसके पश्चात ,वहाँ पर अन्य प्रतियोगिताओं की तैयारी भी करवाई जाती थी। दोनों ही महत्वाकांक्षी थे ,प्रभा के पिता के पास धन था और किशोर होनहार और आकर्षक व्यक्तित्व का होने के साथ -साथ ,जल्द से जल्द अमीर बनने की चाहत रखता था। दोनों ही एकदूसरे की तरफ आकर्षित थे। प्रभा ने अपनी बहन के विवाह में ,किशोर को भी बुलाया था। बहन के विवाह के पश्चात तो, वे एक दूसरे के काफी करीब आ गए थे। प्रभा और वो दोनों अब ज्यादा संग रहते ,किशोर को भी अच्छा लगा -कि प्रभा ने,एक दो छात्र को छोड़कर और किसी को भी अपनी बहन के विवाह का निमंत्रण पत्र नहीं दिया और किशोर को विशेष रूप से बुलाया।
बुलाती भी क्यों न....... वो अब किशोर के संग ,अपना घर बसाने की सोच रही थी। उन दिनों करुणा भी उसके साथ थी., किंतु प्रभा ने करुणा को भी कभी ,अपने इस 'प्रेम प्रसंग' के विषय में नहीं बताया था। प्रभा ने किशोर जी को पहले ही बता दिया था -'तुम किसी अच्छी नौकरी की तलाश करो ! अच्छे पद पर आ जाओ ! उससे पहले हमारे परिवार वाले ,हमारा विवाह नहीं करेंगे। किशोर का तो लालच ! पैसा ही था यदि उन्हें पैसा भी कमाना पड़ जाए , तब वह प्रभा से , क्यों विवाह करेंगा ?उसके मन में, उनका मंतव्य स्पष्ट था। किंतु प्रभा यह बात नहीं समझ पाई। वह तो सोच रही थी -कि किशोर उसे, दिल से चाहता है, अक्सर दोनों मिलते रहते थे ,घर की, परिवार की ,जिंदगी की बातें करते थे। अच्छे से रेस्टोरेंट में ,प्रभा के पैसे पर खाना खाते थे और एक अच्छी जिंदगी के सपने देख रहे थे।
करुणा जब प्रभा से बातें कर रही थी, तब उसने, किशोर जी को देख लिया था और किशोर जी भी ,उसे पहचान गए थे इसीलिए वह वहां से ,बच्चों को लेकर गायब हो गए थे। वह प्रभा से नजरें चुरा रहे थे यह बात करुणा नहीं समझ पाई थी। समझती भी कैसे उसे तो दूर-दूर तक भी अंदाजा नहीं होगा ,कि क्या हुआ होगा ?या किशोर जी का भी कोई अतीत होगा ,जो उन्होंने करुणा से छुपाया होगा।
करुणा को अपनी सहेली से बात करते हुए ,देखकर उसे वहीं छोड़कर, किशोर जी, अपने बच्चों को लेकर भोजन के लिए चले गए। बच्चे भी खेलने में व्यस्त हो गए। वहां किसी को जानते भी नहीं थे , जब वह अकेले कुर्सी पर बैठे थे तभी किसी ने उनके कंधे पर हाथ रखा , उन्होंने पीछे घूमकर देखा , उनके पीछे प्रभा खड़ी थी। उसे देखकर थोड़ा घबरा गए और उन्हें पसीना आ गया। किशोर मुझे धोखा देकर, दूसरा विवाह रचा लिया, वह भी मेरी सहेली के साथ ! इसके साथ भी तो तुम्हारा कोई नाटक तो नहीं, नहीं ,इसके साथ क्यों नाटक होगा ? स्वयं ही जवाब भी दे दिया। अब तो तुम्हारे बच्चे भी हो गए हैं ,वह भी इतने बड़े हैं और कहो ! जिंदगी कैसी कट रही है ? बहुत अच्छा लग रहा होगा , लगे भी क्यों ना........ सुंदर बीवी है ,बच्चे हैं। उन्हें क्या मालूम ? जिसका वह इतना सम्मान करते हैं ,जिससे इतना प्यार करते हैं ,वह एक धोखेबाज इंसान है। तुम कहो तो....... तुम्हारी असलियत तुम्हारी बीवी को बता दूं ! प्रभा को ,उन्हें देखकर क्रोध ही आया था , इतना अंदाजा तो उसने तभी लगा लिया था जब उसने करुणा से बात करते हुए ,पीछे देखा था और तभी किशोर को पहचान गई थी।
किशोर को देखते ही उसे बहुत क्रोध आया था किंतु कर भी क्या सकती थी ?विवाह का माहौल था, उसे बिगाड़ तो नहीं सकती थी, उसकी अपनी ही हानि होती। ''तुमने मुझे खोकर बहुत कुछ खो दिया है ''यह कहकर वह चली गई , ताकि कोई ज्यादा देर तक उसे वहां पर बैठा न देख ले।
किशोर जी ,मन ही मन सोच रहे थे -कि आखिर यह कहना क्या चाहती थी ? मैंने बहुत कुछ क्या खो दिया ? फिर अपने मन को समझाया ,कि वह समझ तो गई थी कि मैं पैसे के लिए ही उसके साथ था। मैं यह सब क्यों सोच रहा हूं ? जो हो गया ,सो हो गया ,अब उन दिनों को वापस तो नहीं लौटाया जा सकता ,एकांत में बैठे हुए यह सब सोच ही रहे थे। तभी सुमित उन्हें ढूंढते हुए वहां आया था और तभी उन्होंने निर्णय ले लिया था कि अब मैं यहां ज्यादा देर तक नहीं रहूंगा।
आखिर प्रभा, किशोर को कोई चेतावनी दे रही थी , या उसकी भूल का एहसास कर रही थी वह कहना क्या चाहती थी ?कि मुझे खोकर तुमने बहुत कुछ खो दिया।'' आखिर की किशोर ने उसे किस अवस्था में और क्यों छोड़ा ? प्रभा विवाह कब हुआ? क्या करुण को पता चल पाएगा ? आइये ! मिलते हैं ,अगले भाग में- ''काँच का रिश्ता ''
