करुणा ,प्रभा से मिली ,उसकी बेटी से भी मिली। भोजन भी किया ,किंतु समझ नहीं आ रहा ,न जाने ,हर बार किशोर जी कहां चले जाते हैं ? करुणा ,प्रभा से किशोर जी को मिलवाना चाहती थी ,किंतु वह हर बार, इधर-उधर हो जाते थे। तब करुणा ने सुमित को ,उन्हें बुलाकर लाने के लिए कहा। पापा को ढूंढते हुए सुमित, एक सुनसान स्थान पर पहुंचता है। किशोर जी ,वहां अकेले ही कुर्सी पर बैठे हुए थे। बेटे को देखकर बोले -आओ बैठो !
पापा !बैठना नहीं है ,मम्मी ने आपको बुलाया है। वह आपको अपनी सहेली से मिलवाना चाहती हैं।
हां ,जानता हूं , किंतु मैं मिलकर क्या करूंगा ?उनकी सहेली है ,वो मिले !अब हम घर चलेंगे, तुम्हारी मम्मी कितनी देर और रुकना चाहती हैं ?जरा पूछकर बताओ !
क्या ?पापा ! मैं बार-बार इधर से उधर चक्कर काट रहा हूं , आप ही मेरे साथ चलिए और मम्मी से पूछ लीजिए , क्या ,आप मम्मी की सहेली से नहीं मिलना चाहते हैं ?
भई ,उनकी सहेली है , अब बेटे से क्या कहते हैं ? मुस्कुरा दिए। प्रभा भी, अपने कार्यों में व्यस्त हो गई।
दुल्हन को भोजन के पश्चात ,मंडप की तरफ ले जाया जा रहा था। सभी कार्य प्रभा को ही तो देखने थे, वह करुणा को ज्यादा समय नहीं दे पाई और मंडप के समीप चली गई। करुणा ,किशोर जी को ढूंढते हुए, बाहर आई। उन्हें देखते ही उसे, उन पर क्रोध आया। यह क्या व्यवहार है ? मैंने ,बच्चों को आपको बुलाने के लिए भेजा था, किंतु आप तब भी नहीं आए मेरी सहेली आपसे मिलना चाहती थी।
तुम्हारी सहेली है ,तुमसे मिलकर उसे प्रसन्नता होगी, मैं मिलकर क्या करूंगा ?
मेरी सहेली है, तो मेरे पति से मिलना चाहते थी , आपको क्या आपत्ति थी ? थोड़ी देर के लिए आ नहीं सकते थे। आपने स्वयं ही मुझे समझाया, और इस विवाह में लेकर आए , और अब स्वयं ही, जब उससे मिलने का समय आ गया तो ,पीछे हट रहे हैं।
मैं पीछे कहां हट रहा हूं ?मेरे कहने का तात्पर्य तो यही है, कि तुम्हारी सहेली है ,तुम मिल लो !मैं मिलकर क्या करूंगा ?
फिर वही बात !
अच्छा ,यह सब छोड़ो !अब यह बताओ ! वापस चलने का तुमने क्या सोचा है ? बातों को आगे ना बढ़ाते हुए किशोर जी ने पूछा
हम दोनों सहेली बरसों पश्चात मिले हैं, आपने देखा नहीं ,वो कैसे मुझे डांट रही थी ?कि एक दिन पहले नहीं आ सकती। मेहमानों की तरह ही आई है और अब मेहमानों की तरह ही चली जाऊंगी तो उसे बुरा नहीं लगेगा।
तो तुम क्या चाहती हो? क्या यहां रुकना चाहती हो ?
मैं तो यही चाहती हूं ,कि जब तक उसकी बेटी विदा न हो जाए ,तब तक तो हम, साथ रह ही सकते हैं।
तुमने समय देखा है ,मुझे कल ऑफिस भी जाना है। आधी रात तो यहीं हो जाएगी, फिर मैं सो भी नहीं पाऊंगा। मुझे तो जाना होगा, किशोर जी बोले -तुम चाहो तो...... अपनी सहेली के संग रह सकती हो। रात भर क्या ?दिन में भी रह सकती हो ? या दो दिन बाद भी आ सकती हो ,कहते हुए किशोर जी थोड़ा मुस्कुराए क्योंकि इतने वर्षों से दोनों का साथ है ,इतना तो वे जानते ही हैं ,करुणा उनके बिना यहाँ रुकने वाली नहीं है इसीलिए यह बात कही।
यह क्या बात हुई ?
मुझे छोड़ कर तो 2 दिन के लिए जा रहे हैं और स्वयं 1 मिनट भी नहीं मिलना चाहते। मैं इतनी देर तक तो यहाँ नहीं रहना चाहती ,किंतु थोड़ी देर उसके संग रहकर, थोड़ा उसका दुख बांट लेती। उससे कुछ बातें हो जातीं।
यह समय तो ,ऐसा ही है कि वह तुम्हारे पास अधिक देर नहीं बैठ पाएगी और न ही तुम्हारे साथ रह पाएगी। क्योंकि वह भी तो रातभर की जगी होगी ,आराम करेंगी। कुछ देर और रुक सकता हूं ,नहीं तो मैं, चलने के लिए तैयार हूं। मैं बच्चों को लेकर चला जाऊंगा, तुम चाहे बाद में आ जाना, बाकी तुम्हारी जैसी इच्छा !कहकर उन्होंने अपना अंतिम निर्णय उसे सुना दिया।
ठीक है ,मैं भी आप लोगों के साथ ही चलूंगी किंतु उससे पहले एक बार आप उससे मिल लीजिए।
तुमने क्यों ज़िद पकड़े हुये हो ? कि मिल लीजिए, मिल लीजिए ! तुम मिल लीं और क्या चाहिए ? करुणा के मन में क्लेश हो गया। पति उसको छोड़कर जाने के लिए तैयार हैं, और करुणा चाहती थी -कि वह अपने पति से प्रभा को मिलवाए किंतु वे उससे मिलने के लिए तैयार नहीं, कितना गलत लगता है ? पहली बार उसके किसी कार्यक्रम में आई है , और उसे समय भी नहीं दे पाई। करुणा ,किशोर जी के पास से उठकर चली जाती है और सोचती है -प्रभा से माफी मांग लूंगी और कह दूंगी -कि इन्हें समय नहीं है ,इन्हें काम पर जाना है। तुम भी थकी होगीं। बाद में फोन पर बातें होगीं या कभी समय मिलेगा तो मैं फिर मिलने आ जाउंगी। सोचते हुए ,प्रभा के समीप गई।
आजा !बैठ जा !
प्रभा !अब मुझे चलना होगा। उदास चेहरे से करुणा बोली।
इतनी जल्दी जा रही है।
हां ,हमारा मिलना ही ऐसा हुआ , जब मैं फोन करना चाहा, तो तुझे समय नहीं था। अब मैं यहां रुकना चाहती हूं, तो उनके पास समय नहीं है, कल उन्हें अपने काम पर भी जाना है ,बच्चों को स्कूल जाना है।
हां ,यह बात तो है , जैसे अब तक संभालती आई हूं ,सब संभाल लूंगी ,तू बेफिक्र होकर जा ! कहते हुए उसके साथ उठी और उसे एक पैकेट थमा दिया। जिसमें शायद मिठाई का डिब्बा और साड़ी थी जो अपने करीबी या रिश्तेदार को ही देते हैं। गाड़ी में बैठे हुए, किशोर जी कई वर्ष पीछे पहुंच गए थे, उन्हें क्या मालूम था? आज ऐसा संयोग हो जाएगा। यह वही लड़की है, जो उनकी जिंदगी में ,करुणा से पहले आई थी। करुणा इस बात को जानती ही नहीं, न ही ,कभी बताने का मौका मिला और उन्होंने बताना भी नहीं चाहा। क्यों ?अपनी बसी बसाई जिंदगी में जहर घोलना। उस समय किशोर जी भी पढ़ते थे. जब तक इंसान के पास पैसा नहीं होता, उसे पैसे की ललक बनी रहती है और दिमाग पैसा कमाने की नई-नई तरकीबें सोचता रहता है। कैसे शीघ्र से शीघ्र ? अमीर बना जाए, ऐसे में उसे समय प्रभा उन्हें दिखलाई दी , वह सुंदर तो नहीं थी, किंतु पैसे ने और उसके मेकअप ने उसे सुंदर बना दिया था। उसका पैसा ! उन्हें अपनी और आकर्षित कर रहा था। प्रभा के घर वालों की लापरवाही, उसके घर बसाने की ललक, उसे किशोर जी की तरफ आकर्षित कर रही थी। ऐसा लग रहा था -दोनों से ही एक दूसरे की ज़रूरतें पूरी हो जाएंगीं।
