Zeenat [part27]

ज़ीनत को ,एक रात के लिए किसी अनजान शख़्स ने अगवा कर लिया, उसके साथ रात बिताई। एक रात के बाद ,वह अपने को, अपने घर पर ही पाती है ,उसके घरवाले उसे घेरे हुए खड़े थे। सभी के चेहरे उसे सवालिया नजर आ रहे थे, किन्तु कुछ सवालों का जबाब तो वह ख़ुद ही नहीं जानती किन्तु घरवाले तो उससे जानना चाहते हैं -कि कल से वो कहाँ थी ,किसके साथ थी ? उसके साथ क्या हुआ ? साथ ही उन्हें समाज का और बदनामी का डर सता रहा था। 


ज़ीनत पर क्या बीती ? इस बात से उन्हें कोई सरोकार नहीं था ,ड़र था तो इस बात का ,इसके साथ कुछ हुआ तो नहीं ,मोहल्ले में ,किसी को कुछ पता न चल जाये। तभी 'सलमा 'को किसी के आने की आहट सुनाई देती है।   मुझे लगता है ,कोई आ गया है ,शायद कोई पड़ोसन होगी  ,तुम चुपचाप यहीं रहना, बाहर मत निकलना ! ज़ीनत को हिदायत देते हुए सलमा ने तुरंत ही अपने आपको, ठीक किया ,अपने बाल देखे ,दुपट्टा ठीक किया और चेहरे पर एक मुस्कान लेकर के बाहर निकली और मुस्कुराते हुए बोली -आइये ! आइये ! खाला ! कैसे आना हुआ ?

अरे ! कल  तुम लोग,परेशान थे , ज़ीनत को ढूंढ़ रहे थे ,क्या ज़ीनत घर आ गई ? बच्ची ,कहाँ चली गयी थी ?उसने कुछ बताया। 

सलमा जानती है ,ये 'सोहेल की खाला' ,'मोहल्ले का अख़बार' हैं ,इनको इधर की खबर उधर, करने में तनिक भी देर नहीं लगती परन्तु ख़बर सबकी रखतीं हैं। 

कुछ नहीं खाला ! ज़ीनत कहीं नहीं गयी थी ,वो तो रस्ते में उसके मामू मिल गए थे ,वो कुछ देर के लिए उसे घुमाने ले गए। हमारी बच्ची अभी नासमझ है ,उससे ये नहीं हुआ ,आकर पहले घर पर बता देती कि मैं मामू के साथ जा रही हूँ ,तो हम इस क़दर परेशान तो न होते ,ये वहां उनके साथ मजे से घूम रही थी और हम सभी यहाँ परेशां हो रहे थे। इसके मामू तो थोड़ी देर बाद ही, इसे यहीं छोड़कर चले  गए थे। 

अच्छा ! हुआ चलो 'देर आये ,दुरुस्त आये। तुम यकीन नहीं करोगी ,ज़ीनत की अम्मी !मैंने जब से ये सुना कि ज़ीनत गायब है ,'मेरा कलेजा मुँह को आ गया। ''जब से मैंने ज़ीनत के ग़ायब होने की खबर सुनी ,मैं बहुत परेशान हो गयी थी ,बेचारी मासूम बच्ची, न जाने कहाँ चली गयी ? मुझे रातभर नींद नहीं आई ,रातभर अल्लाह  से दुआ करती रही - ए ख़ुदा ! हमारी बच्ची को सही सलामत रखना ।

वही तो.... और देखिये ! ख़ुदा ने आपकी दुआ क़ुबूल की ,हमारी बच्ची सही -सलामत अपने घर पहुंच गयी। कुछ खायेंगी। 

हाँ ,जब इतनी ख़ुशी की खबर है ,तो कुछ मीठा मुँह हो जाये ,कहते हुए पैर उठाकर ऊपर रखकर तसल्ली से बैठ गयीं। 

सलमा को अपनी गलती का एहसास हुआ ,उसने,उनसे  खाने के लिए पूछकर गलती कर दी। मुँह बनाते हुए उनके लिए कुछ खाने के लिए लाने बावर्चीखाने में गयी। तब बाहर से ही ,खाला ने पुकार कर पूछा - सलमा !अब अपनी ज़ीनत कहाँ है ? क्या कर रही है ?कहीं दिख नहीं रही। 

वो सो रही है , इस तरह बिना बताये ,चली गयी थी ,उसके अब्बू बड़े नाराज़ हुए और उसे बहुत डांटा ,हाथ में तश्तरी लिए हुए वो बाहर आईं और वो तश्तरी उन्होंने खाला के सामने रख दी और बोलीं  - अपने अब्बू की लाड़ली है ,उसके चले जाने पर ,उनका तो जैसे दिल ही बैठ गया था ,इसलिए जब घर आई तो इसके अब्बू के उसे बहुत डांट लगाई, तो रोने लगी। 

एक पंजीरी मुँह में डालते हुए खाला बोलीं - सही तो है ,डांटना भी चाहिए ,अरे ! अपने बच्चों से मुहब्बत करते हैं ,तो क्या उन्हें गलती पर डांटने  का हक़ भी नहीं। ''मैं सोच रही थी ,उससे भी मिल लेती ,ख़ैर छोडो !जब उठ जाएगी ,तब मिल लेंगे। धीरे -धीरे उन्होंने सभी पंजीरियाँ खाई और उठकर बोलीं -अब चलती हूँ। घर में बहुत काम है ,तुम तो जानती हो ,आजकल की बहुएं कैसी हैं ?जब तक सिर पर न बैठो !आगे बढ़ने का नाम नहीं लेतीं। मुझे ही कह -कहकर करवाना पड़ता है। एक मुआ वो फोन आ गया ,सारा दिन न जाने उसमें क्या देखती रहती हैं ?इसने ज़माना बिगाड़कर रख दिया है ,कहते हुए बाहर निकल गयीं। 

उनके जाते ही सलमा अंदर आई और बोली -तुझे पता है ,सोहेल की खाला आई थी। उसे ज़रा सा भी  अंदाज़ा हो जाता कि तुझे, तेरे अब्बू कहाँ से उठाकर लाये हैं ? कि तू अपने मामू के साथ नहीं ,न जाने कहाँ से'मुँह काला करवाकर'' आ रही है ?सारे मोहल्ले को खबर हो जाती ,रिश्तेदारों में बदनामी हो जाती। 

मुझे अब्बू कहाँ से उठाकर लाये ? दबी आवाज में ज़ीनत ने पूछा।

मुझे क्या मालूम ? कह रहे थे- शहर के बाहर जो एक पुरानी सी जगह है ,वहां बेहोश पड़ी थी। तू वहां कैसे पहुंची ?

मुझे नहीं मालूम ,अम्मी !मुझे किसी ने बेहोश कर दिया था ,कहते हुए ज़ीनत फिर से रोने लगी ,कुछ देर मन का गुब्बार निकालकर उसने पूछा -अम्मी !ये तो बताइये ! अब्बू को कैसे पता चला ? कि मैं वहां हूँ। 

हम सभी तो परेशान थे ,तेरे अब्बू देर रात तक स्कूटर पर तुझे ख़ोजते रहे ,थक -हारकर  घर लौटे ही थे ,तभी उन्हें किसी का फोन आया। एक लड़की बुरखें में शहर से बाहर बेहोश पड़ी है ,कहीं आपकी बेटी तो नहीं। 

कौन हो सकता है ? ज़ीनत सोच रही थी ,तब उसने पूछा -उस इंसान को अब्बू का नंबर कैसे मिला ?

मुझे क्या पता ? झल्लाते हुए सलमा बोली -ये तो अच्छा हुआ समय रहते उसने हमें फोन कर दिया और हम बदनामी से बच गए। अचानक  ही उन्हें जैसे कुछ बात स्मरण हुईं और ज़ीनत से पूछा -कमबख़्त !वो इंसान कौन था ?जो तुझे उठाकर ले गया था ,कहीं वो 'ख़ालिद' तो नहीं था। 

नहीं, अम्मी !मुझे कुछ भी पता नहीं चला ,मैं कैसे बताऊँ ?

अब रोने से कुछ नहीं होगा ,चुपचाप यहीं आराम कर ,ऐसे रहना जैसे कुछ हुआ ही न हो ,कोई मिलने भी आया तो कह देना -'मामू !के साथ गयी थी, समझी ! ये अपना हुलिया ठीक कर, किसी को कुछ भी शक नहीं होना चाहिए।

सोहेल की खाला ने भी, यूं ही ''धूप में बाल सफेद नहीं किए हैं''। ज़माना देखा है , सलमा के चेहरे से ही भांप गई थी, जरूर कुछ ना कुछ बात तो घर में हुई है। वहां से चुपचाप चली तो आई, किंतु पेट में तो, बुराई करने के और बात इधर की उधर करने के गोले  बन  रहे थे। तब अपनी दूसरी पड़ोसन नादिरा के घर में घुस गयी। उनको देखकर ,नादिरा बोली -आइये !आइये !खाला !आज कैसे रास्ता भूल गयीं ?कहते हुए पीढ़ा उनकी तरफ़  ख़िसका दिया।

अरे !क्या आऊं ? सारा दिन घर के कामों से फुरसत ही नहीं मिलती ,वो तो यूसुफ़ से घर गयी थी ,उसकी बेटी 'ज़ीनत ''की ख़ैर -ख़बर पूछने। 

क्यों ?ज़ीनत को क्या हुआ ? नादिरा ने अपने बाल काढ़ते हुए उनसे पूछा। 

अय्य्य ! आश्चर्य से अपनी ठुड्डी पर हाथ रखते हुए बोलीं -तुम क्या मोहल्ले में नहीं रहती हो ?कल तो उसका बाप उसे ढूंढ़ रहा था। 

क्यों ? वो कहाँ चली गयी थी ?बड़ी प्यारी बच्ची है।  



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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