हे ईश्वर ?यह कैसी माया है ?
इंसान ही इंसान को.....
'' ड्रैगन' कहते नजर आया है।
यह कैसा ?भृमजाल.......
या माया जाल बिछाया है।
तेरी बनाई इस रचना में ,
क्यों इतना खोट आया है ?
ड्रैगन भी ,तेरी ही रचना थी,
अंत उसका कोई समझ ना पाया है।
क्या अब इंसान का अंत ?
भी करीब ही आया है।
मानव को ज्ञान दिया ,
बुद्धि ने क्यों भरमाया है ?
कलयुग का अंत निकट है ,
जो इंसान में, शैतान जगाया है।
सभी में कुछ न कुछ कमियां हैं।
दोष अपना क्यों ?
नजर नहीं आया है।
इंसान को ही आधा ,
जानवर बनाया है।
कहने को इंसान ,
नजर सब आते हैं।
कुछ ने तो........
इंसानी खोल चढ़ाया है।
डर इतना इंसान को ,
अब ! इंसान ही.......
''ड्रैगन ''नजर आया है।
नारी को सुंदर......
शक्ति ,सामर्थ्य दिया।
फिर क्यों ?उसको !
इतना बेबस बनाया है ?
हे ,प्रभु ! ये तेरी कैसी माया है ?
या कोई भृमजाल बिछाया है।
