Kaisi maya ?

हे ईश्वर ?यह कैसी माया है ?

इंसान ही इंसान को..... 

'' ड्रैगन' कहते नजर आया है। 

 यह कैसा ?भृमजाल....... 

या माया जाल बिछाया है। 



तेरी बनाई इस रचना में ,

क्यों इतना खोट आया है ?

ड्रैगन भी ,तेरी ही रचना थी,

अंत उसका कोई समझ ना पाया है। 

क्या अब इंसान का अंत ?

भी करीब ही आया है। 

मानव को ज्ञान दिया ,

बुद्धि ने क्यों भरमाया है ?

कलयुग का अंत निकट है ,

जो इंसान में, शैतान जगाया है। 

सभी में कुछ न कुछ कमियां हैं। 

दोष अपना क्यों ?

नजर नहीं आया है। 

इंसान को ही आधा ,

जानवर बनाया है। 

कहने को इंसान ,

नजर सब आते हैं। 

 कुछ ने तो........ 

 इंसानी खोल चढ़ाया है।

डर इतना इंसान को ,

 अब ! इंसान ही.......  

''ड्रैगन ''नजर आया है। 

नारी को सुंदर...... 

शक्ति ,सामर्थ्य दिया।

 फिर क्यों ?उसको !

इतना बेबस बनाया है ?

 हे ,प्रभु ! ये तेरी कैसी माया है ? 

  या कोई भृमजाल बिछाया है। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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