Teri chahat main

  ऐसे  सुहावने मौसम में ,लेती हूँ ,अंगड़ाई ,तेरी चाहत में ,

 बूंदें ,ले करतल में ,भावविभोर हो उठी, तेरी चाहत में। 

शांत मन में ,इक ठंडी सी स्फुरण उठी ,तेरी चाहत में। 

सागर सी ज़िंदगी ,कुछ पल ठहर सी गयी तेरी चाहत में। 



 शांत सागर से मन में , लहरें उठने लगीं ,तेरी चाहत में। 

ख़्वाबों में मिल,लहरों सी छूकर चली आतीं तेरी चाहत में। 

आकर्षण बड़ा, तेरी आँखों का ,क्यों ज्वार सा आने लगा ?

मन ,रह-रहकर हिचकौले खाने लगा ,ऐसे तेरी चाहत में।


उतरकर देखो !मेरे ह्रदयतल  की गहराई ,न माप सकोगे,

न जाने ,अरमानों के कितने माणिक छुपे ?तेरी चाहत में। 

सीपी में बंद मोती सी.......   ,मेरी मोहब्बत में सच्चाई है। 

शांत ,इस गहरे तल में ,कितनी हलचल है ?तेरी चाहत में। 

    

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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