नीलिमा ,उस'' चांदनी देवी ''का पता लगाने के लिए ही इतनी दूर ,नौकरी के बहाने से आई थी। किंतु दो दिन चक्कर लगाने पर भी ,चांदनी उससे नहीं मिली। शायद चांदनी ,नीलिमा को जानबूझकर नजरअंदाज कर रही थी। नीलिमा का उद्देश्य ,उस परिवार के विषय में जानने का था इसीलिए वह नौकरी करना चाहती थी वरना नौकरी तो वह जहां रह रही थी ,वहीं आसपास या उससे कुछ दूर भी कर सकती थी। वह यह भी सोच रही थी-कि यहां नौकरी भी क्या मिलेगी ? उसे तो अपने उद्देश्य से मतलब है किंतु शायद चांदनी भी उससे आगे तक की सोच रही थी और वह नीलिमा से मिली ही नहीं , चांदनी का उद्देश्य तो नीलिमा को अपमानित करने का ही था। किन्तु नीलिमा ने भी ,इस ओर ध्यान ही नहीं दिया, इसका उद्देश्य बड़ा था। आखिर मालिक ,मालिक होता है और नौकर ,नौकर ! कुछ तो सोच में अंतर रहा होगा। चांदनी ने नीलिमा को परेशान करने के लिए उसे अपने घर पर दो-तीन दिन तक बिठा रखा और उसके पश्चात ,उसे अपनी सहेली मिसेज खन्ना के घर का पता दे दिया।
उस कागज पर लिखे ,पते को लेकर नीलिमा सोच रही थी ,मुझे इस एड्रेस पर जाना चाहिए या नहीं , फिर सोचा-जब आ ही गई हूँ , तो क्यों न...... मिसेज खन्ना से भी मिल लिया जाए। कुछ देर के पश्चात, मिसेज खन्ना के मुख्य द्वार पर खड़ी थी। अमीरी में तो वह भी ,किसी से कम नहीं लग रही थी। तभी तो दोनों सहेलियां बनी है। वहां पर पहले से ही, गार्ड खड़ा हुआ था। नीलिमा ने उससे बात की और अपना परिचय दिया। परिचय मिलते ही आनन -फानन में उसे बुला लिया गया। मन ही मन नीलिमा मुस्कुराई-और सोचने लगी -मेरी पहुंच यहां तक भी है, मुझे ज्यादा प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी। वह अंदर जाती है, आलीशान घर ,बेशकीमती सामान, घर के मध्य में, एक बड़ा सा सोफा , जिस पर पहले से ही , कीमती वस्त्रों में एक, महिला बैठी हुई थी। उसे देखकर नीलिमा को अपनी कमी का एहसास हुआ। आज उसे अपने वस्त्रों से गरीबी की झलक नजर आ रही थी। हालांकि अपने अनुसार उसने अच्छे कपड़े पहने हुए थे किंतु मिसेज खन्ना को देखकर, थोड़ा झिझक गई।
मिसेज खन्ना के नौकर ने, आगे बढ़कर मिसेज खन्ना का परिचय नीलिमा को दिया - आप मिसेज खन्ना हैं।
नीलिमा ने, हेलो मैम !कहकर , हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाया किंतु उसने बड़े अहंकार के साथ कहा ओके ! और सीधे प्रश्न किया -क्या काम करना चाहती हो ? वैसे तो यहां पर बहुत सारे नौकर पहले से ही हैं किंतु मेरी सहेली ने बताया कि तुम, जरूरमंद हो, क्या कार्य कर सकती हो ? झाड़ू -पोछा अच्छे से कर लोगी, जब उसने यह प्रश्न किया नीलिमा को लगा कि यह मेरी बेइज्जती कर रही है।
यह क्या कह रही हैं ?आप ! क्या मुझे देखकर आपको लगता है कि मैं झाड़ू -पोछा के कार्य के लिए आई हूं।
क्यों ,तुम में ऐसा क्या विशेष है ? उसने ऊपर से नीचे तक नीलिमा को देखा और बोली -जो कपड़े तुमने पहने हुए हैं, इनसे अच्छे तो मेरी झाड़ू -पोछा वाली भी पहनती हैं ,तुम अपने को क्या समझ रही हो ? अकड़ते हुए बोली-झाड़ू -पोछा तो नहीं कर सकतीं, अपने हाथों के बढ़े हुए नाखूनों को आकार देते हुए बोली -तुम इस उम्र में कैसे झाड़ू पोछा करोगी ? सफाई से भी नहीं कर पाओगी। रसोई घर में कुछ बना लोगी।
आप मुझे गलत समझ रही हैं , मैं झाड़ू -पोछा ,रसोई के कार्य के लिए नहीं आई हूँ। नीलिमा ने स्पष्ट करना चाहा।
तब तुम क्या कर सकती हो , मुंह बनाते हुए वह बोली।
मैं पढ़ी -लिखी हूं, इससे पहले मैं एक संस्था चलाती थी। कोई ऐसा ही कार्य हो, जो पढ़ाई लिखाई से संबंधित हो या फिर जैसे बच्चों को पढ़ाना हो।
यहां किसे पढ़ाओगी ? व्यंग्य से हँसते हुए बोली -हमारे बच्चे बड़े और महंगे स्कूलों में पढ़ते हैं, वह शिक्षा तुम्हें समझ भी नहीं आएगी, अपनी औकात के हिसाब से बात करो।
मेरी क्या औकात है ? मैं जानती हूं , किंतु आपको मेरी उम्र को देखते हुए ,थोड़ी तहजीब से बात करनी चाहिए।
तुम मेरे यहां ,नौकरी मांगने आई हो ,और अब तुम मुझे तहजीब सिखाओगी या मुझे अपने नौकरों से कैसे बात करनी है ,यह सिखाओगी।
अभी मैं ,आपसे बात करने के लिए आई हूँ ,आपकी नौकरी नहीं की है इस आधार पर अभी आपकी नौकर नहीं हूँ। हो सकता है, आपको इसकी जरूरत पड़ जाए क्योंकि तहजीब उम्र के हिसाब से नहीं, आदमी के परिवार, और उसके व्यवहार में झलकती है, पैसा तो आ जाता है , किंतु पैसे के साथ तहजीब भी आए यह जरूरी भी नहीं।
तुम्हें यहां किसने भेजा ? क्रोधित होते हुए मिसेज खन्ना सोफे से उठ खड़ी हुई।
जिसके कहने पर आपने मुझे यहां पर बुलाया। गलत संगत किसी की भी हो, किंतु गलत सीख़ ही देती है। मैं पढ़ी-लिखी एक सम्मानित महिला हूं। भले ही आपके पास पैसा है, किंतु मेरा मेरी नजरों में, सम्मान है। जो आपकी आंखों में नहीं दिखता, आप स्वयं अपना सम्मान नहीं करतीं, तो दूसरे का क्या करेंगीं ?
यह क्या बकवास किए जा रही हो ?लगभग चीखते हुए वो बोलीं।
बकवास नहीं, सच्चाई बयां कर रही हूं। यदि आपका ,आपकी स्वयं की नजरों में सम्मान होता है, तो दूसरी औरत का भी सम्मान करतीं , जो उम्र में भी आपसे बड़ी है। किंतु जिसके कहने पर आपने मुझे बुलाया है, उसकी खुद की परवरिश ही ,कहां ठीक है ? आपने अपना बहुमूल्य समय मुझे दिया ,आपका धन्यवाद !कहकर वह जाने के लिए मुड़ने वाली थी ,
तभी ,मिसेज खन्ना बोली -ऐ रुको ! अभी तुम क्या कह रही थीं ?
कुछ भी तो नहीं, अनजान बनते हुए नीलिमा बोली।
नहीं अभी तुमने कुछ कहा था -'कि जिसके कहने पर बुलाया है ,उसकी परवरिश कहां ठीक है ?''ऐसा ही कुछ.......
क्या तुम मिसेज चांदनी को जानती हो ?
हां,अभी दो दिन पहले ही मिली थी, बातों को पलटते हुए नीलिमा ने जवाब दिया।
दो दिन में ,तुमने उसे इतना परख लिया, या कुछ और बात है। नीलिमा के चेहरे पर नजर गड़ाते हुए, उसने पूछा।
किसी के विषय में जानकारी लेनी हो तो ,उस व्यक्ति से प्यार से बातें की जाती हैं उसे विश्वास में लिया जाता है। तभी वह जानकारी हासिल होती है ,रहस्य्मयी अंदाज से नीलिमा बोली।
मिसेज खन्ना के मन में ,एक जिज्ञासा और उत्पन्न हो गई, यह महिला अवश्य ही, मिसेज चांदनी के विषय में बहुत कुछ जानती है। वैसे तो उन दोनों की अच्छी- खासी दोस्ती है, किंतु दोनों ही एक दूसरे से जलती हैं और अपने को बड़ा साबित करने में लगी रहती हैं। दोनों ही ने ही पैसे के लिए, अपने से ज्यादा उम्र के मर्दों से विवाह किया है। एक दूसरे की कमजोरी मिल जाएगी तो नीचे दिखाने में आसानी होगी। यही सोच कर मिसेज खन्ना ने, नीलिमा को नौकरी पर रखा और बोली -इस घर में बहुत से काम है, जो तुम सरलता से कर सकती हो ,वह कर लेना।
ऐसा नहीं होता है, मेरा एक कार्य निश्चित कीजिए ,नीलिमा बोली।
ठीक है ,मेरे इतने फोन आते रहते हैं, पार्टियों में जाती रहती हूं , कभी-कभी मैं भूल भी जाती हूं। तुम मेरे लिए यह कार्य कर लोगी ! यानि पर्सनल सेक्रेटरी का !
पहले कभी किया तो नहीं है, किंतु प्रयास करूंगी किंतु इस नौकरी से पहले, मेरी कुछ शर्त भी है।
नीलिमा की बात सुनकर , मैसेज खन्ना आश्चर्य से बोलताी है - तुम मेरे यहां नौकरी करने आई हो, मेरी मालकिन बनने नहीं।
अपने-अपने उसूल हैं, नीलिमा लापरवाही से बोली।
नीलिमा आखिर ऐसी कौन सी शर्त रखने वाली है ,कहाँ तो वो नौकरी के लिए परेशान हो रही थी और अब नौकरी मिल रही है तो....... आखिर नीलिमा क्या चाहती है ?पढ़ते रहिये -साज़िशें
