Tere naam ke

यादों की किताब में, कुछ पन्ने हैं ,जो तेरे नाम के, 

याद कर उन्हें खो रही, तेरी उस मधुर शाम  के। 



मुस्कुराहट आई ,क्यूँ  बरबस भर आई अखियां ?

 क्यूँ ?मुस्कुराते रोने लगीं, अखियां तेरे नाम से। 


पन्नों को सहेज रखा है लिखा ,जिन्हें तेरे नाम से,

'गुलाबी लिखावट'की थी ,जो पन्ने थे तेरे नाम से। 


ज़हन में उतर गई, पन्नों पर छप गई ,वो स्याही !

जो वक्त ! बिताया था ,हमने कभी तेरे नाम से। 


छुपा रखे हैं, वो लम्हें ! जो बीते कभी तेरे नाम से, 

वह सुनहरे पल !यादों की किताब में छुपे तेरे नाम के।

 

एकांत मिलते ही,उदासी भरे क्षणों में मुस्कान ले आते,

 कब अकेला छोड़ते हैं ? वो  पन्ने !तेरे नाम के। 


जी उठती हूं, जिंदगी ! कुछ पल बीता तेरे नाम से,

बनाने लगती हूं ,कोई नई ग़ज़ल सिर्फ तेरे नाम से। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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