यादों की किताब में, कुछ पन्ने हैं ,जो तेरे नाम के,
याद कर उन्हें खो रही, तेरी उस मधुर शाम के।
मुस्कुराहट आई ,क्यूँ बरबस भर आई अखियां ?
क्यूँ ?मुस्कुराते रोने लगीं, अखियां तेरे नाम से।
पन्नों को सहेज रखा है लिखा ,जिन्हें तेरे नाम से,
'गुलाबी लिखावट'की थी ,जो पन्ने थे तेरे नाम से।
ज़हन में उतर गई, पन्नों पर छप गई ,वो स्याही !
जो वक्त ! बिताया था ,हमने कभी तेरे नाम से।
छुपा रखे हैं, वो लम्हें ! जो बीते कभी तेरे नाम से,
वह सुनहरे पल !यादों की किताब में छुपे तेरे नाम के।
एकांत मिलते ही,उदासी भरे क्षणों में मुस्कान ले आते,
कब अकेला छोड़ते हैं ? वो पन्ने !तेरे नाम के।
जी उठती हूं, जिंदगी ! कुछ पल बीता तेरे नाम से,
बनाने लगती हूं ,कोई नई ग़ज़ल सिर्फ तेरे नाम से।
