नीलिमा ,जब अपने घर पहुंची तो उसके चेहरे पर प्रसन्नता थी, किंतु बेटी कल्पना को, घर में पाकर , उसने अपनी घड़ी में समय देखा। तुम यहां ? आश्चर्य से बोली।
हां ,मम्मा ! आज जल्दी छुट्टी हो गई , किंतु आज आप कहां गई थी ?
तुम्हारी मां भी ,कुछ न कुछ कार्य करती रहती है, बेटी पर बोझ बनकर थोड़े ही रहेगी , तुम्हें यह जानकर प्रसन्नता होगी ,कि मुझे भी नौकरी मिल गई।
यह आप कैसी बातें कर रही हैं? मेरे होते हुए आप नौकरी करोगे।
तो क्या हुआ ? क्या मैं सक्षम नहीं हूं ? मेरे हाथ -पैर नहीं चलते हैं , मैं किसी पर निर्भर हूं ,क्या ?और जब मैं काम कर सकती हूँ ,तो किसी पर निर्भर क्यों रहूं ?
आज आप कैसी बातें कर रही हैं ?क्या किसी ने कुछ कहा ?मेरे कहने का अर्थ यह नहीं है ? अब आप सिर्फ भैया पर ध्यान दीजिए ,बाकी तो मैं कर ही रही हूं। आपकी बेटी ,'किसी 'कबसे हो गयी ?
मेरी समझदार बिटिया ! तुम्हारी मां अभी इतनी बूढ़ी भी नहीं हुई है कि तुम पर निर्भर होकर घर में बैठ जाए। किसी बड़ी बी की तरह, आते ही ,मुझसे सवाल -जवाब करने लगी , यह नहीं पूछा -कि मम्मा आई हैं , तो थक गई होगीं , एक गिलास पानी ही ला दूँ।
अब जब घर की बड़ी मैं हूं, तब मुझे तो घर में रहने वालों के सदस्य के विषय में जानकारी होनी ही चाहिए कोई कहां जा रहा है ,क्या कर रहा है? यह सब तो मुझे सोचना ही होगा न........ हंसते हुए कल्पना बोली-और अपनी मम्मी के लिए पानी लेने चली गई।
पानी का गिलास हाथ में लेकर, नीलिमा बोली -अब मेरी बिटिया बड़ी हो रही है, उसकी नौकरी भी लग गई है, अब मुझे कोई अच्छा सा लड़का देखकर, उसकी शादी भी तो करनी है , उसके लिए दहेज भी जुटाना है , इसलिए इस माँ को तो मेहनत करनी ही होगी। यह गरीब मां इतना पैसा कहां से लाएगी ? मुंह बनाते हुए, नीलिमा बोली।
अच्छा-अच्छा, आपको बड़ी चिंता है,आपसे कौन दहेज़ मांग रहा है ?मैं ऐसे घर में विवाह ही नहीं करूंगी ,जहाँ पर दहेज माँगा जाये।
अच्छा एक बात बताओ !तुम्हारा दोस्त कौन था ? जिसको तुमने मुझसे मिलवाना चाहा था उसके विषय में फिर बात ही नहीं हुई। कैसा है ,क्या करता है? मैं तो उसका नाम भी भूल गई ,क्या नाम बताया था ?तुमने उसका......
तुषार..... तुषार नाम बताया था, आप भी न बहुत जल्दी भूल जाती हैं, मुझे लगता है, मेरी मां बूढ़ा गई है हंसते हुए कल्पना बोली -और जहां में कार्य करती हूं, उसके मालिक को जानता है। उसी की सिफारिश से ही, मेरी यह नौकरी लगी है। ज्यादा अमीर तो नहीं है, किन्तु अपने खर्चे के लायक काम लेता है। जब से मैं मुंबई में आई हूं तब से मेरे लिए बहुत ही सहायक रहा है।
क्या तुम्हें वह पसंद है ?और तुम उसे.......
हां ,हम एक दूसरे को पसंद करते हैं, किंतु कभी उस नजर से नहीं सोचा।
कौन सी ?नजर....... मुस्कुराते हुए नीलिमा बोली।
क्या मम्मा !आप भी न.......
अच्छा पहले उसे ,उस नजर से देखने से पहले ,एक बार मुझसे उसे मिलवा देना, या मुझे उसकी तस्वीर दिखला देना। मैं भी तो देखूं ,मेरी बेटी की पसंद कैसी है ? तुम्हारे भाई ने तुम्हें परेशान तो नहीं किया था। अथर्व के पास बैठते हुए बोली।
नहीं ,वह पड़ोस में बैठा था। पहले तो मैं घबरा ही गई थी, कि घर में कोई भी नहीं है, किंतु जब मैंने इधर-उधर देखा तो पड़ोसियों के घर मुझे यह कुर्सी पर बैठा दिखलाई दिया।
हां ,वे लोग उसकी स्थिति को जानते हैं इसीलिए मैंने उनसे कह दिया था -यदि आपको कोई आपत्ति ना हो , तो मेरे बेटे का ख्याल रखिएगा।
इस तरह कोई बार-बार हेल्प नहीं करेगा ? हमें कुछ और ही सोचना होगा।
ठीक है ,चलो !मैं , कुछ बनाती हूं ,बताओ ! क्या खाओगी ?
मैंने पहले ही खाना बना कर रख दिया है , कल्पना ने अपनी मम्मी को चौंकाने के लिए बताया, और नीलिमा वास्तव में ही ,उसकी बात सुनकर अचंभित हो गई।
क्या मेरी बेटी ने खाना बनाया ? कितनी समझदार हो गई है ? घर संभालने लायक हो गई है, अब तो शीघ्र अति शीघ्र कोई लड़का ढूंढना ही होगा।
कोई क्या तुषार है ,न........ कहते हुए बीच में ही रुक गई, और शर्माकर रसोई घर में भोजन लेने चली गई।
अगले दिन नीलिमा से , मिसेज खन्ना ने बताया -शाम को हमारी किटी है, और कुछ महिलाएं, मेरे घर आएंगीं , तुम्हें उनके चाय -नाश्ते की व्यवस्था करनी होगी।
मैडम !आजकल घर में कौन किट्टी करता है ? ऐसे शानदार घरों की किट्टी के लिए ,तो होटल बने हैं।
हां ,मैं जानती हूं , किंतु तुम अपना कार्य करो ! जो तुमसे कहा गया है।
एक बात बोलूं ! क्या उस किट्टी में, आपकी दोस्त ''चांदनी ''भी आ रही है।
हां ,यह पार्टी उसी के कहने पर ही तो घर में रक्खी है।
मिसेज खन्ना !की बात सुनकर नीलिमा मुस्कुरा दी।
आखिर नीलिमा क्यों मुस्कुराई ? क्या किसी षड्यंत्र की बू आ रही थी या किसी बात का पर्दाफाश होने वाला है ? जानने के लिए पढ़ते रहिए -साजिशें
