नीलिमा की बात सुनकर मैसेज खन्ना आश्चर्य में पड़ गई, यह कैसी महिला है ? लोग नौकरी पाने के लिए हाथ -पैर जोड़ते हैं और अब ,जब इसे नौकरी मिल रही है , तो यह शर्त रख रही है , उन्होंने उसे अपने दबाव में लेना चाहा किंतु नीलिमा को तो जैसे-''कुछ पाने की खुशी नहीं और खोने का गम नहीं,'' यही सोच कर वह जिंदगी में आगे बढ़ रही थी। मिसेज खन्ना, बड़ी ही क्रोधी और बेरहम स्वभाव की महिला हैं किंतु नीलिमा ने उससे इस तरह से बात की ,कि वह उसे नौकरी देने के लिए तैयार हो गई। हालांकि इसका उद्देश्य नीलिमा को नौकरी देकर ,अपना काम निकालकर, बाहर कर देना था। यह नौकरी भी तो उसने, ''चांदनी'' के कहने पर दी है। अच्छा बताओ ! तुम्हारी क्या शर्त है ? मिसेज खन्ना ने ,अपने पास खड़े नौकरों की तरफ देखकर, उन्हें जाने का आदेश दिया।
जब नौकर चले गए, तब नीलिमा उससे बोली -पहली शर्त मेरी यह है ,कि आप मुझे मेरी उम्र के आधार पर वही सम्मान देगीं जो एक बड़े को दिया जाता है। दूसरी शर्त यह है...... इससे पहले की नीलिमा कुछ बोल पाती।
मिसेज खन्ना ने ,उसे बीच में ही टोक दिया , तुमने एक ही शर्त की बात की थी।
हां एक ही शर्त है, किंतु यह उसका हिस्सा है,यदि मुझसे कोई गलती हो भी जाती है , तो आप मुझे आराम से, मेरी गलतियों का मुझे एहसास करायेंगीं न कि नौकरों की तरह, चार लोगों में मेरी बेइज्जती करेंगीं। यह शर्त नीलिमा ने इसलिए रखी थी क्योंकि उसने उनके नौकरों द्वारा सुन लिया था -''एक बकरा और हलाल होने आ गया। न जाने इस बेचारी का क्या होगा ? बेचारी इतनी उम्र में, नौकरी ढूंढने चली हैं , मैडम ! के कोप से, अब इसे राम ही बचाए।
नीलिमा की शर्तों को सुनकर मिसेज खन्ना सोच में पड़ गई, वह सोच रही थी ,मुझे इस महिला को, नौकरी पर रखना चाहिए या नहीं , किंतु इसमें कुछ बात तो है,आज तक किसी ने भी मुझसे , इस तरह से बातें नहीं की। काम पाने के लिए, मेरी खुशामद ही की है। यदि मैं इसको काम नहीं देती हूं , तो चांदनी की बात पूरी नहीं हो पाएगी , और यदि मैं इसे नौकरी पर रख लेती हूं, तो इसके माध्यम से मुझे ,चांदनी के विषय में बहुत कुछ जानकारी हो सकती है। शायद यह कुछ रहस्य लिए हुए हैं। अच्छा एक बात बताओ ! मिसेज खन्ना ने नीलिमा से पूछा - यदि मैं तुम्हें नौकरी नहीं देती हूं ,तब तुम क्या करोगी ?
मुझे नौकरी की इतनी आवश्यकता भी नहीं है , और नौकरी मुझे अन्य स्थानों पर भी मिल सकती है किंतु....... रहस्यमय तरीके से इधर-उधर देखते हुए बोली -''आखिर इंसान इतना कैसे बदल सकता है ?''
यह तुम क्या पहेलियां बुझा रही हो ? स्पष्ट कहो ! किसके विषय में कहना चाहती हो ?
मैं तो, चांदनी मैडम के यहां ही ,काम करने के लिए आई थी, किंतु शायद वह मेरी नजरों का सामना नहीं कर सकतीं इसीलिए मेरे सामने ही नहीं आईं और मुझे आपके यहां भेज दिया।
क्यों ,उसने ऐसा क्या किया है ?
खैर ,यह सब छोड़िए ! यह तो बाद की बातें हैं , आप मुझे मेरी नौकरी के विषय में बताइए ! क्या आप मेरी शर्तों के आधार पर, मुझे नौकरी देती हैं या नहीं ! या मैं अपनी नौकरी पक्की समझूँ कहकर मिसेज खन्ना के चेहरे को पढ़ने का प्रयास करने लगी।
हां ,तुम्हारी नौकरी पक्की है, कल से तुम ठीक 9:00 बजे आ जाना , मैं 9:00 बजे ही सो कर उठती हूं।
प्रसन्न होते हुए नीलिमा बोली -कल से ही क्यों मैंम ! मैं आज भी तीन-चार घंटे के लिए रह सकती हूं। आप मुझे मेरा कार्य समझा दीजिए।
ओके ! तुम्हारा यह जज्बा देखकर मुझे प्रसन्नता हुई , नीलिमा का कार्य कुछ ज्यादा नहीं था ,कुछ मिसेज खन्ना के व्यक्तिगत कार्य थे , एक तरीके से देखा जाए तो उस अमीर औरत की देखभाल करना ही था। कोई बहुत बड़ी, कारोबारी तो नहीं थी , हां कुछ पार्टियों में जाती थी , अपने मान सम्मान के लिए, कुछ गरीबों के लिए, कार्यक्रम करती थी। बस यही सब देखना था।
नीलिमा मध्यम वर्गीय परिवार से निकली हुई एक ऐसी महिला थी, जिसने जिंदगी के कई रूप देखे थे। जिंदगी की ऊंच -नीच को समझती थी। उसने पैसा भी देखा है, किंतु कभी पैसे को अपने पर हावी नहीं होने दिया। उसके लिए तो पैसे की कीमत इतनी ही है कि उसके और उसके बेटे की, परवरिश अच्छे से हो जाए। इससे ज्यादा कि उसे चाहत भी नहीं है। दोनों बेटियां, अपने लायक कमा लेती हैं, बस उसकी गुड़ियों के लिए अच्छे से गुड्डे मिल जाएं, उनका घर बस जाए, और वे सुखपूर्वक अपने परिवार में रहें , उसे और क्या चाहिए ?
नीलिमा मिसेज खन्ना के साथ रहती, वह जहां भी जाती ,उसके साथ ही रहती थी । बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूमने जाना ,कार्यक्रमों में जाना, उनकी मुख्य बातें नोट करना और बीच-बीच में वह चांदनी के विषय में भी, उससे जानकारी लेती थी। वह जानना चाहती थी ,कि मिसेज खन्ना को चांदनी के विषय में कितनी जानकारी है ? उसके परिवार में कितने लोग हैं ? ऐसी छोटी-छोटी जानकारी बातों ही बातों में ले लेती थी।
