Sazishen [ part 80]

 अब तक तो आपको पता चल ही गया होगा ,चांदनी और कोई नहीं 'चंपा 'ही है ,किन्तु अभी तक नीलिमा को उस पर केवल शक ही है ,पूर्णतः विश्वास नहीं। चांदनी का उद्देश्य नीलिमा से बदला लेना है और इसके लिए वह अपनी दोस्त मिसेज खन्ना से, उसका साथ मांगती है। मिसेज खन्ना, बहुत ही ,गुस्से वाली महिला है , इंसानियत और दया तो उसके मन में, शायद ईश्वर ने ,दी ही नहीं। तब चांदनी उससे सहायता की उम्मीद करती है। दोनों की योजना के अनुसार, अगले दिन नीलिमा, चांदनी के घर उससे मिलने आती है. और उसे पहले दिन की तरह ही ,एक बड़े से कमरे में बैठा दिया जाता है। नीलिमा बहुत देर तक प्रतीक्षा करती रही, उससे मिलने प्रकाश ही आता है  और प्रतीक्षा करने के लिए कहकर बाहर निकल जाता है। कुछ देर प्रतीक्षा करने के पश्चात नीलिमा बाहर झांकने का प्रयास करती है ,कि कोई आया या नहीं अथवा आ क्यों नहीं रहा ?मुझे क्यों दो दिनों से यहाँ बैठा दिया जाता है ,आख़िर ये लोग क्या कहते हैं ?


तभी एक नौकर उसे दिखलाई देता है, नीलिमा को, इस तरह बाहर झांकते हुए देखकर ,वह कहता है - आपको  अंदर बैठने के लिए कहा गया है। आप इस तरह बाहर नहीं देख सकतीं। 

तब नीलिमा  कहती है - मैं यहां, काम के लिए आई हूं। मुझे रोज यहां बैठा दिया जाता है, न ही ,कोई मुझसे मिलने आता है ,और न ही  कोई बात करता है। मुझे नौकरी मिलेगी भी या नहीं या क्या यही मेरा कार्य है ,कि मैं यहां बैठी रहूं ? 

यह मैं नहीं जानता। 

यह कहकर वह जाने ही वाला था, तब नीलिमा बोली -क्या मैं एक बार ,इस घर को अंदर से देख सकती हूं ?

क्या बात कर रहीं हैं ?यह कोई ऐतिहासिक इमारत नहीं ,जो आप इसमें भृमण करेंगी। यह साहब का घर है ,आपको भी न जाने क्यों अंदर बुला लिया ?इस तरह किसी को अंदर आने की भी इजाज़त नहीं है। पता नहीं ,मैडम ने क्या सोचकर आपको अंदर बुलाकर यहाँ बैठने दिया। नहीं ,बाहर के किसी भी व्यक्ति को इस तरह घर के अंदर घूमने की इजाजत नहीं है। आपको जहाँ बैठाया गया है ,वापस वहीं जाकर बैठ जाइये ! 

नीलिमा समझ रही थी ,उसे यहाँ उसका अपमान करने के लिए बिठाया जा रहा है। वो मन ही मन खुश होना चाहती है ,कि मैं उससे मिलने के लिए किस तरह उसकी प्रतीक्षा कर रही हूँ ? नीलिमा को तो यही जानना था कि आखिर चांदनी और जावेरी प्रसाद जी, असल जिंदगी में क्या हैं  ? जावेरी प्रसाद जी क्या मुझे जानते हैं ? यदि नहीं जानते ,तो उन्होंने मेरे साथ ऐसा क्यों किया ? और उसको  चांदनी पर भी शक था, वह जानना चाहती है ,कि आखिर, यह चांदनी ,चंपा ही तो नहीं है। यदि चंपा है ,तो वह ऐसा क्यों कर रही है ? काम मांगना तो सिर्फ एक बहाना था ,उन लोगों के नजदीक रहकर ,उन लोगों को जानना चाहती थी। उनके परिवार में और कितने सदस्य हैं ? यह जानकारी तो वह किसी नौकर से भी निकाल सकती है किंतु पहली बात तो ,कोई भी नौकर अपने मालिक की जानकारी उसे क्यों देगा ?  नौकरों को भी उतना ही मालूम होता है ,जितना मालिक चाहेगा। दूसरी बात इस तरह ,छानबीन करने से वो शक के घेरे में आ जाएगी। 

उसे ऐसा लगता है कि यहां उसे जानबूझकर बिठाया गया है। या तो उसका अपमान करने के लिए, या फिर उसको एहसास करने के लिए, कि वे लोग कितने बड़े हैं ? मेरे जैसे लोग उनकी प्रतीक्षा में खड़े हैं ,सोचकर मुस्कुरा दी। क्या कर सकते हैं ? खैर जो भी उनकी मंशा रही हो। अब नीलिमा ने सोच लिया था कि वह किसी और माध्यम से यह पता लगाएगी और अब  इस तरह बार-बार इधर चक्कर नहीं लगायेगी। काम का क्या है ?काम तो वह कहीं कर सकती है , इतनी बड़ी दुनिया है , जहां मेहनत करेगी , वहां खाने  -कमाने लायक तो पैसा मिल ही जाएगा। अब तो बेटी की नौकरी भी लग गई है। 

तभी उसे दूर से प्रकाश ज्यादा दिखाई देता है, तब उससे कहती है -मैं अब जा रही हूं और प्रतीक्षा नहीं कर सकती अपनी मैडम से कहना, अब मैं यहां काम नहीं करूंगी। कहकर बाहर जाने ही वाली थी, तभी प्रकाश को एक फोन आया और उसे कुछ देर रुकने के लिए कहकर ,वह फोन पर व्यस्त हो जाता है। कुछ देर पश्चात ,उसके पास आता है और कहता है -मैडम का , आपके लिए ही फोन था, उन्होंने कहलवाया है, यहां तो कोई कार्य नहीं है किंतु मिसेज खन्ना के यहां कार्य आपको अवश्य मिल जाएगा। उन्हें एक नौकर की जरूरत है। 

यह मिसेज खन्ना कौन है ?अपनी भौहों को सिकोड़कर नीलिमा ने उसकी तरफ देखते हुए पूछा। 

उन्हीं की सहेली हैं  , शायद आपकी नौकरी के लिए उनसे बात की हो। 

किंतु मैंने तो ऐसा कुछ भी नहीं कहा था,

यह तो बड़ी अच्छी बात है , उन्होंने आपके लिए सोचा ,प्रकाश ,चांदनी की तरफ से उस पर एहसान जतला रहा था। आप उनसे मिल लीजिए और उनसे बात कर लीजिए ,हो सकता है ,वहां कुछ बात बन जाए।

 नीलिमा ने सोचा-देख लेते हैं , शायद मेरे लिए,वहां से ही ,कोई रास्ता खुल जाए। वह प्रकाश से कहती है - कि आप मुझे उनके घर का पता दे दीजिए ! वे कहां रहती हैं ?मैं उनसे मिल लूंगी। आपकी मैडम मिल जाती, तो शायद मेरे लिए फेवर कर सकती थीं। 

नहीं मैडम ,ने उनसे पहले ही बात कर ली है,

ओ अच्छा ! आपकी मैडम को मेरी बड़ी फिक्र है, उसके लिए धन्यवाद , वह नीलिमा को एक कागज पर पता लिखकर दे देता है और नीलिमा उस घर से बाहर आ जाती है। मन ही मन सोच रही थी -मैं उसे घर में जाऊं या नहीं ,उसने कागज पर लिखे पते को देखा ,यहां से ज्यादा दूर भी नहीं है। चलो !देख लेते हैं , मि सेज खन्ना भी क्या चीज है ?

क्या नीलिमा किसी नए षड्यंत्र में फंसने जा रही है ? या अपने लिए कोई उपाय ,क्या उसे मिसेज खन्ना नौकरी पर रखेगीं ,आइये पढ़ते हैं अगले भाग में ,अपनी समीक्षाओं के माध्यम से उत्साहवर्धन कीजिये। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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