Sazishen [part 77]

नीलिमा ''जावेरी प्रसाद'' के महल जैसे घर में आ गई थी और वह प्रतीक्षा में थी, कि शायद उस परिवार में से कोई सदस्य उससे  मिलने आए। वहां के ही किसी कर्मचारी ने, नीलिमा को बड़े से सजे हुए, ड्राइंग हॉल में बैठा दिया था। नीलिमा बहुत देर से वहां बैठी ,प्रतीक्षा करती रही। तभी उसकी दृष्टि एक ऐसी तस्वीर पर गई, जिस पर एक अधेड़ उम्र व्यक्ति, और एक कम उम्र लड़की के विवाह की तस्वीर थी। नीलिमा को आश्चर्य हो रहा था, और मन में प्रश्न उभर रहा था ,क्या यही 'जावेरी प्रसाद' है ? यदि यह 'जावेरी प्रसाद' है , तो...... यह लड़की 'चांदनी' इनकी पत्नी है। अब नीलिमा का शक और बढ़ गया ,वह सोच रही थी- जैसा मुझे लग रहा है ,हो न हो ये वही है। 

एक्सक्यूज मी ,मेेम ! अब आप जा सकती हैं। 

तुम यह क्या कह रहे हो ? मैं यहां आपकी मैडम से मिलने आई थी। 



हां ,मैडम ने ही आपको बुलवाया था, किंतु अब मैडम के पास समय नहीं है, आप कल आइएगा , वह अभी व्यस्त हैं, आपसे नहीं मिल सकतीं। 

जब उन्हें काम था ,समय नहीं था ,तो उन्हें मुझे रोकना ही नहीं चाहिए था, मुझे यहां बैठे हुए लगभग 2 घंटे हो गए हैं ,उसके पश्चात भी मुझे निराशा ही हाथ लगी। 

अब इसमें मैं ,क्या कर सकता हूं ? कहते हुए जाने लगा। 

तब नीलिमा ने उसे बुलाया, और बोली -सुनो ! क्या यह तस्वीर तुम्हारे मालिक की है, यानी कि ''जावेरी प्रसाद जी'' की है। 

जी, यही हमारे साहब  हैं। 

उन्होंने इतनी बड़ी उम्र में विवाह किया, वह भी इतनी कम उम्र की लड़की से, घर में और कौन -कौन लोग हैं ?

जी ,मैं  इस विषय में आपसे कोई बात नहीं कर सकता, इसलिए आप जा सकती हैं। उसने बड़ी शालीनता से उसके प्रश्नों के जवाब देने से इनकार कर दिया। कहते हुए वह ,उसे रास्ता दिखाने लगा,या यूँ कहिए ,जबरदस्ती उसको घर से बाहर करने लगा। नीलिमा समझ रही थी, अप्रत्यक्ष रूप से ,मेरा अपमान ही कर रहा है , और इसकी मालकिन ने ,मुझसे  न मिलकर भी, मेरा समय, बर्बाद किया और मुझे कोई महत्व नहीं दिया। किंतु गरज अपनी है, इसलिए नीलिमा ने पूछा-अपनी मैडम ,से एक बार पूछ लीजिए कल मैं कितने बजे आऊं ? वह कब फ्री होगीं ? ताकि उनका समय और मेरा समय दोनों ही व्यर्थ न जाएं। 

ठीक है ,मैं एक बार उनसे पूछ लेता हूं, वह अंदर की तरफ आता है और एक फोन से बात करता है। कुछ देर पश्चात वह उसके करीब आता है और कहता है-मैडम ने कहा है , यदि आप इतनी ही व्यस्त हैं, आप अपने घर बैठिए ! कार्य करना है ,तो यहां आना ही होगा। 

भई ,यह क्या बात हुई ? कार्य करना है तभी तो मैं यहां आई हूं , किंतु इस तरह, समय बर्बाद तो नहीं कर सकती। मैं उनसे एक बार मिलना चाहूंगी। जो मेरा कार्य होगा ,वह मैं पूरी मेहनत और लगन से करूंगी किंतु मुझे पता तो चलना चाहिए , कि मेरा काम क्या है ? या मुझे इसी तरह प्रतिदिन आकर बैठना है। 

आप कल 11:00 बजे आ जाइए, कहकर उसने बात समाप्त की। 

नीलिमा ठगी सी रह गई, उसने इधर-उधर देखा ,उसे लग रहा था -जैसे कोई उसे देख रहा है , और वापस अपने घर की तरफ चल दी। मन ही मन सोच रही थी, मैं यहां आई ही क्यों हूं ? क्या मुझे यहां अपना अपमान करवाने आना था। नौकरी तो मुझे और भी जगह मिल सकती है, किंतु यह विचार ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया।  तभी उसके दिमाग में एक आवाज गूंजी। मुझे'' जावेरी प्रसाद ''और उसकी पत्नी के विषय में पता लगाना है।' चांदनी ' मैडम से भी तो मिलना है, इस बात को कहते हुए जैसे उसको, बहुत क्रोध आ रहा था। उसे लग रहा था, जैसे उसके बर्बादी की शुरुआत, इस चांदनी मैडम ने ही,आरम्भ की है, यह और कोई नहीं, मेरी नौकरानी चंपा ही है। इसलिए अपने पैसों के दम पर, मेरे जीवन भर की, कमाई इज्जत पर, 'पानी फेर दिया।' मैं यही तो जानना चाहती हूं, आखिर यह चंपा से चांदनी कैसे बनी ? क्या इसके परिवार वालों को भी मालूम है ? कि यह कहां है ? किंतु जब तक मैं इसे स्वयं, परख ना लूं , तब तक विश्वास से नहीं कह सकती। यह मुझसे  किस बात का बदला ले रही है ? यह भी तो मुझे पता होना चाहिए। सोचते हुए नीलिमा, टैक्सी में बैठी और चली गई। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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