चांदनी अपने घर की छत से खड़ी होकर, नीलिमा को बाहर जाते हुए देख रही थी और मुस्कुरा रही थी। बड़ी आई ,मुझसे मिलने वाली , अब तुम्हें मुझसे मिलने के लिए इसी तरह, चक्कर काटने होंगे। मैं जानती हूं, जब तुमने मुझे पहली बार देखा, तो तुम्हें मुझ पर शक हुआ होगा, शक नहीं ,यकीन हुआ होगा। जोर -जोर से हंसती है -हा हा हा हा हा तभी तो तुम मेरी गाड़ी का पीछा कर रही थीं और मेरे घर तक ,मेरे पीछे चली आईं। अपने घर की नौकरानी बनाकर रखना चाहती थीं। तुझे मैंने उस घर और, तेरे उसे गढ़ से ही तुझे निकाल बाहर किया। तू क्या समझती है ? क्या मुझे तेरी हरकतों पर या तुझ पर, मेरी नजर नहीं है। तुझे भी मैं ,अपने घर की इसी तरह नौकरानी बनाकर रखूंगी और तेरे उस पागल बेटे के लिए भी मैंने कुछ सोचा है। तू क्या समझती है ?अपनी बेटी को, मेरी ही कंपनी में काम दिलवाएगी।हहहहहह
तूने अभी चंपा का प्रेम और मेहनत और चुप्पी देखी है , किंतु अब मैं तुझसे बदले लूंगी। तूने मुझे, मेरे प्यार मेरे धीरेंद्र से मुझे अलग किया। तुझे भी मैं इस तरह से ही तड़पाऊंगी , जो मैं जानती हूं ,वह तू नहीं जानती। तूने उसे मेरी जिंदगी से हटा दिया। मैं भी तुम लोगों को तड़पाऊंगी। कहते हुए ,वह सीढ़ियों से उतर कर नीचे आती है , और प्रकाश को आवाज लगाती है -प्रकाश ! क्या वह चली गई ?
यस मैडम ! किंतु बड़ी परेशान हो रही थी, पूछ रही थीं - इतने समय तक मुझे क्यों बिठाये रखा ? क्योंकि घर में उनका बीमार बेटा भी है।
प्रकाश की बात सुनकर वह मुस्कुराई और बोली -जानती हूं , तुम जाओ ! अपना कार्य करो। और देखो ! दोपहर का खाना तैयार हो रहा है या नहीं , आज तुम्हारे साहब खाने में, कुछ हल्का ही लेंगे, उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है।
जी मैडम ! प्रकाश उसके सामने से चला जाता है किंतु तभी उसके मन में विचार आता है, क्या मैडम !उसे पहले से ही जानती हैं ? यह महिला तो हमारे यहां पहली बार आई है। न जाने ,क्या-क्या करती रहती हैं ? साहब को भी नहीं पता रहता है । तुषार बाबा भी, इनसे नाराज हैं। कोई नाराज हो ,इनकी बला से........ अपनी धुन में ही मस्त रहती हैं, न जाने साहब ! इन्हें कहां से लेकर आए हैं ? किंतु बड़े लोगों का रहन-सहन का तरीका सब जानती हैं, अब बूढ़े से विवाह किया है तो अपने शौक तो पूरे ही करेंगी। रसोई में पहुंचकर, प्रकाश ने पूछा -खाने में क्या बना है ?
साहब के लिए 'जों का दलिया 'है , मैडम बाहर खाएंगी, और तुषार बाबा आएंगे ही नहीं। बस हम लोगों के लिए ही खाना बनाया है। इस घर में गिनती के तीन लोग हैं , वह भी इधर-उधर रहते हैं, साहब ! ने सोचा था -नई मालकिन आएगी और घर को सवारेंगी ,किंतु यह तो न जाने, कहां व्यस्त रहती हैं ? सब से ज्यादा व्यापार तो ,इनका चल रहा है , कहते हुए रसोईया मुस्कुराया।
चुप कर, सुन लिया तो, हमारी नौकरी पर बात आ जाएगी। देखा नहीं, जब पहली बार ,ये घरआई थीं , माली इन्हें देखकर मुस्कुरा दिया था. हालांकि उसकी मुस्कुराहट में कटाक्ष था , वह यह देखकर ही तो मुस्कुराया था कि अपने पिता की उम्र के व्यक्ति से विवाह किया है , उसने सोचा था ,कोई गरीब घर की लड़की होगी किंतु उसी दिन इन्होंने उसे तेवर दिखला दिए और उसे निकाल बाहर किया।
सुनने में तो यही आ रहा है, किसी बड़े घर की लड़की तो नहीं है , कोई बड़े घर का परिवार, अपनी बेटी को इस तरह अधेड़ उम्र से के व्यक्ति से क्यों ब्याहेगा ?
कभी-कभी तो, सीधी -सादी और अच्छी सी लगती है किंतु किसी से चिढ़ गई तो....... बस उसकी जान आफत में है, देखा नहीं ,आते ही 'तुषार बाबा 'और सब में झगड़ा करवा दिया। अब दोनों पिता -पुत्र साथ कहां बैठते हैं ? न ही ,साथ खाना खाते हैं। यह सब बड़े घरों के चोंचले हैं, हमें क्या ? हमें तो अपने काम से मतलब है ,कह कर प्रकाश बाहर आ गया।
तब तक चांदनी भी, तैयार होकर बाहर आ चुकी थी ,उसने एक चटक रंग की साड़ी पहनी हुई थी ,देखने में बहुत खूबसूरत लग रही थी ,आकर प्रकाश से बोली -प्रकाश !तुम साहब को खाना खिला देना , मेरी एक होटल में पार्टी है ,मैं वहीं जा रही हूं , कहकर वह बाहर निकल गई।
