टैक्सी ,जिसमें नीलिमा बैठी थी ,वो बंगलो नंबर 63 के सामने आकर रूकती है। नीलिमा से टैक्सी का वाहन चालक कहता है- लो जी ,आपकी मंजिल आ गयी,जब नीलिमा गाड़ी से उतर रही थी ,तब वह उससे पूछता है - आपको वापस भी जाना होगा, यदि मेरी आवश्यकता हो तो ,मैं रुकता हूं , यदि समय लगे, तो मैं चला जाता हूं।
नीलिमा सोच रही थी -मैं किस तरह इस घर के अंदर जाऊंगी ?पिछली बार तो मैंने इसके दरबार से कहा था -कि मैं अपनी बेटी को यहां नौकरी के लिए लेकर आऊंगी किंतु मेरे साथ तो वह आज भी नहीं है। वह भी होगी भी कैसे ?जब मैंने उसे बताया ही नहीं, कि मैं कहां जा रही हूं ? प्रयास तो करना ही होगा वह फिर से इस बंगलो के सामने जाकर खड़ी हो जाती है।
इस बार दरबान उसे पहचान गया और बोला -अरे आप ! आप तो शायद ,अपनी बेटी को लेकर आने वाली थीं।
हां, किंतु मैं ही आई हूं, मुझे भी काम चाहिए। आपको इसी घर में क्यों काम चाहिए ,और भी तो जगह है, अन्य कोठियों की तरफ देखते हुए उसने कहा।
ऐसा कुछ भी नहीं है ,किंतु मुझे एक उम्मीद है कि यहां मुझे कार्य मिल ही जाएगा।
नीलिमा के कपड़े देखकर सोच रहा था ,ये किस तरह का कार्य कर सकती हैं ?इस बात के लिए तो मैडम से बात करनी होगी , आपका कोई अपॉइंटमेंट भी नहीं है , आपको ,ऐसे ही अंदर जाने नहीं दे सकता। निलिमा की उम्र का ख़्याल रखते हुए ,बोला -आप बताइए ! मैं ,मैडम से ,आपका क्या नाम बोल दूं ?
अभी नीलिमा कुछ कहती ,उससे पहले ही, दरबान को एक फोन आता है और वह फोन उठाने में व्यस्त हो जाता है।
जी -जी ,ओके -ओके मेेम ! कहकर वह पीछे मुड़ता है, और नीलिमा की तरफ देखकर कहता है -आपके लिए ही फोन था ,आपको अंदर बुलाया गया है।
तुम तो अंदर गए भी नहीं ,उन्हें कैसे मालूम हो गया ?नीलिमा ने आश्चर्य से पूछा।
उसने केेमरे की तरफ इशारा किया, और बोला -यहां पर , हर व्यक्ति की गतिविधि पर नजर रखी जाती है , यहां भी एक कैमरा है। मैडम !ने आपको देख लिया होगा, इसलिए आपके अंदर बुलाया है।
तब नीलिमा ने ,टैक्सी वाले से वापस जाने के लिए कहा-और उससे उसका फोन नंबर ले लिया, ताकि कभी आवश्यकता पड़े तो उसे बुला सके। अब इस तरह बुलाये जाने पर ,अब नीलिमा को थोड़ी घबराहट सी हो रही थी। तब उसने, उस चौकीदार से पूछा -मुझे किसने बुलाया है ?
मैडम !ने ही बुलाया है।
तुम्हारी मैडम स्वभाव से कैसी हैं ? वह जानना चाहती थी।
वह तो आप देखकर, मिलकर ही समझ जाएंगीं , कहकर उसने, मुख्य द्वार खोल दिया और नीलिमा को उस बंगले के अंदर ले लिया। उस बंगले के अंदर जाते ही, नीलिमा को लगा न जाने ,वह कौन सी दुनिया में आ गई है ? बहुत ही सुंदर और करीने से सजा हुआ बगीचा था। एक तरफ तीन -चार गाड़ियां खड़ी थीं। अंदर जाने के लिए मार्ग पत्थरों को काटकर, बनाया गया था। बगीचे में एक तरफ झूला, और पानी का फव्वारा भी था। पार्क जैसी सभी सुविधाएं यहां मौजूद थीं। वह अंदर आ तो गई थी,लेकिन यह नहीं समझ पा रही थी कि उसे जाना किधर है ? खोई -खोई सी आगे बढ़ रही थी। वह भी सोच रही थी -न जाने, उस' चांदनी' का व्यवहार ,मेरे साथ कैसा होगा ?
तभी एक दरवाजा खुला और उसमें से एक व्यक्ति बाहर आया, उसने नीलिमा की तरफ देखा और बोला - इधर आ जाइए !
नीलिमा के मन में जो इस बंगले के अंदर जाने का उत्साह था ,वहां की जानकारी लेने का, प्रयास था। उसका वह आत्मविश्वास धीरे-धीरे डांवाडोल हो रहा था , इसका मुख्य उद्देश्य तो ''जावेरी प्रसाद ''को और उसकी पत्नी'' चांदनी ''के विषय में जानना ही था। किंतु अब उसे लग रहा था, शायद उसने कोई बड़ी गलती कर दी। शायद ,कल्पना ठीक ही कह रही थी -यह ''जावेरी प्रसाद'' कोई और भी तो हो सकता है।
तब उस व्यक्ति ने नीलिमा को, एक सोफे पर बैठने का इशारा किया और बोला -मैडम ,आती ही होंगीं। आप कुछ देर प्रतीक्षा कीजिए , कहकर वहां से चला गया। नीलिमा उस सोफे पर बैठ गई, तो उसे लगा ,जैसे वह अंदर ही धंस गई है , बड़ा ही ,मुलायम सोफा था। हर चीज, कीमती और करीने से सजी हुई थी। उसे घर की साफ -सफाई से लग रहा था, कि इन सामानों को बड़े एहतियात से रखा जाता होगा और उनकी सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाता होगा। मन ही मन निश्चय करती है, नहीं ,यह 'जावेरी प्रसाद' वह हो ही नहीं सकता , उसे क्या आवश्यकता पड़ी है ? कि वह ऐसी ओछी हरकतें करें। तभी नीलिमा की दृष्टि एक तस्वीर पर गई। उसे देखकर, थोड़ी हैरान हो गई और सोफे से उठकर उसके सामने जाकर खड़ी हो गई, क्योंकि उस तस्वीर में एक अधेड़ उम्र व्यक्ति, और एक 25 -30 साल की लड़की, दूल्हा -दुल्हन के जोड़े में थे। नीलिमा ने अंदाजा लगाया , तो क्या यही ''जावेरी प्रसाद ''हो सकता है ?
