Pustakalay

 उम्र के इस पड़ाव पर ,इतने अनुभव हो गए हैं,

हम स्वयं एक चलता-फिरता पुस्तकालय हो गए हैं। 



वो भी क्या दिन थे ? बटोरते थे, ज्ञान !दोस्तों संग मस्ती,

विभिन्न शब्दों का भंडार ,अनुभवों की दुकान हो गये हैं। 


किताबी जीवन में, हमने न जाने कितने अनुभव किये ? 

असल जिंदगी के अनुभव ,बहुत ही रोमांचक हो गए हैं। 


पुस्तकों में जो न पढ़ सके, वह जीवन ने सिखा दिया। 

खट्टे -मीठे अनुभव, उन यादों की इक तस्वीर हो गए हैं। 


अब दोस्त तो नहीं रहे ,बीते दिन भी बीत गए,

कितने रोमांचक थे ?वो  दिन........ 

अब कहानी -क़िस्सों  की ,अद्भुत किताब हो गए हैं। 


हम उम्र से ही नहीं एहसास और अनुभव में भी, महान हो गए हैं। 

हम स्वयं दर्द और  खुशी की,धार्मिक और सामाजिक ज्ञान के ,

इतिहास की क़िताब हो गए हैं। 

 

अभी भी न जाने ,कितना ज्ञान भरा है ?इस संसार में ,

संजो लेते हैं ,कोई भी ज्ञान, लिख देते हैं ,अनुभव !

रीति-रिवाज,परिपाटी को लेकर, देश की अमूल्य धरोहर हो गए हैं। 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post