Rasiya [part 23]

 रामप्यारी का रो-रोकर बुरा हाल था, उसका चतुर, चार दिनों से ,घर से गायब है ,न जाने कहां चला गया ? मन में अजीब से ,बुरे -बुरे विचार आ रहे थे  , जिनको सोचकर ही , उसका दिल हिल उठता। आखिर न जाने कहां रह रहा होगा ,क्या कर रहा होगा , भोजन भी किया होगा या नहीं। न जाने कौन सी मनहूस घड़ी थी ? जो मेरे बालक को मुझसे इतनी दूर करके ले गई। 'श्रीधर जी 'वैसे तो गंभीर बनाने का प्रयास कर रहे थे, किंतु अंदर ही अंदर उन्हें भी ,एक अनजाना सा डर सताए जा रहा था।  न जाने ,उसके साथ कोई अनहोनी तो नहीं हो गई होगी । 

गांव के कई लोगों ने सांत्वना भी दिया -बालक है ,इधर-उधर चला गया होगा। इस उम्र में, बच्चे अक्सर ऐसा कदम उठा जाते हैं , हम भी ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं। तब उनका मन रखने के लिए ,अपनी रिश्तेदारी में या किसी गांव में बच्चे के भाग जाने के किस्से सुनाने लगते और बताते ,कुछ दिन इधर -उधर भटककर वापिस आ गए। हमारा बच्चा होशियार है ,ईश्वर जो करेगा ,अच्छा ही होगा। शीघ्र ही ,घर वापस आ जायेगा। हमें भी कहीं दिखलाई देगा तुरंत उसे कान पकड़कर ले आएंगे। किंतु इस तरह के सांत्वनों से, श्रीधर जी ,उनके सामने तो धैर्य से काम लेते किंतु एकांत में, उनकी आंखें नम होने से अपने को नहीं रोक  पातीं , न जाने कहां होगा ?यही एक प्रश्न अपने आपसे पूछते रहते। 


रामप्यारी की भी यही हालत थी, कभी सोचती कहीं उसके साथ कोई दुर्घटना तो  नहीं हो गई हो होगी। और यह विचार बार-बार उभरकर, बाहर आने का प्रयास करता कहीं ,चिराग के भाई ने ही तो ,उसे कुछ नहीं कर दिया होगा । उसे कुछ कर  भी दिया हो, तो हमें पता भी कैसे चलेगा ? और यह सोचकर उसके दिल में एक हूक सी उठती , और बेचैनी होने लगती ,जिसके कारण, वह रोने लगती। ऐसा नहीं कि इस गांव के लोग, शहर में नहीं जाते। उस शहर में भी जाते हैं क्योंकि वह शहर उस गांव से ही लगा हुआ है ,किन्तु किसी ने इस बात को सोचा भी नहीं होगा, कि चतुर वहीं शहर में रहकर ,एक चाय वाले की दुकान पर कार्य कर रहा होगा। 

जब गर्मी बढ़ गई, तो चतुर कहने लगा - यहां तो बहुत गर्मी है। 

तब चाय वाले ने सुझाव दिया -,जा सामने दुकानों में चाय के लिए पूछकर आजा !वहां थोड़ी ठंडक है तुझे ठंडक भी मिलेगी।

 चाय वाले की बात मानकर चतुर, उसी दुकान के पर गया ,जहां पर, वह प्रातः काल सो रहा था और उसके नौकर ने, दुकान खोलते समय  उसे वहां से उठाया था। जब उसने, चतुर को अपनी दुकान पर फिर से देखा तो क्या कहने लगा -तू फिर से आ गया। 

हां, सामने चाय वाले ने पूछा है, चाय की आवश्यकता तो नहीं है। 

नहीं, इतनी गर्मी पड़ रही है ,इतनी गर्मी में कौन चाय पीता है ? अकड़ते हुए ,उसने जवाब दिया। 

बात तो तुम्हारी ठीक है ,कहकर चतुर वापस आ गया। इसी तरह एक दो दुकान पर और गया, किंतु सभी ने इनकार कर दिया। निराश होकर वह दुकान पर वापस आ गया, और संपूर्ण वार्ता चाय वाले को बताइ। उसने कहा -सभी शाम की थकावट मिटाने के लिए शाम को ही चाय पियेंगे। इस बीच उन्हें कोई भी इच्छा नहीं है, शाम को पुछ्कर आना। 

चाय वाला जानता था -गर्मी पड़ रही है ,इतनी गर्मी में कौन चाय पिएगा ? किंतु मुफ्त में नौकर मिल रहा था , इसलिए उसने सोचा -उससे थोड़ी बहुत भागदौड़ करवा ली जाये।'' इंसानी फ़ितरत है ,जब मुफ़्त में ही ,सेवक मिल रहा है ,तो क्यों न उसका अधिक से अधिक लाभ उठाया जाये ?तभी मन में विचार आया ,दो वक़्त का भोजन क्या मुफ़्त में आता है ?काम करेगा ,तभी तो रोटी मिलेगी। ऐसे ही लोग हैं ,जो जीवन में किसी सीधे और सच्चे इंसान को जीवन क्या है ?सिखा जाते हैं।'' 

एक 1:00 बजे का समय था, यह दोपहर के खाने का समय होता है चाय वाले के घर से भी, भोजन आया था , उसके खाने के डिब्बे में ,उसके लिए उसमें चार रोटियां थी और आम के अचार के साथ ,पतली सी दाल  भिजवाई थी। उस भोजन को देखकर, चतुर निराश हो गया और सोचने लगा- यह भोजन तो मेरे लिए कम होगा, साथ में चावल भी नहीं हैं किंतु वह यह नहीं जानता था , कि  भोजन चतुर के लिए तो आया ही नहीं है, यह तो चाय वाले के लिए है।

 तब चाय वाले ने उसे बुलाया और, टिफिन के ढक्कन में दो रोटियां रखकर उसे भी दे दीं। जो रोटी का डिब्बा खाली हुआ था, उसमें थोड़ी सी दाल उसके लिए भी कर दी और बोला -आओ !भोजन कर लेते हैं। सुबह से चाय वाले ने उसे दौड़ाकर  रखा हुआ था,कभी दूध लेने भेज देता था ,तो कभी, बर्तन मंजवा रहा था और कभी चाय के लिए दुकानों पर भेज रहा था। अब इस समय ,वे दो रोटी ही उसे, कीमती नजर आ रही थीं। उसने वो दो रोटी फटाफट से खालीं और चायवाले की तरफ देखने लगा।  भूख अभी भी बाकी थी। चाय वाला समझ गया ,कि लड़का भूखा रह गया है।  तब वह बोला-शाम को तेरे लिए दो रोटी और मंगवा दूंगा, अभी पानी पीकर गुजारा कर ले।

 मन ही मन चतुर ने अपने आप को समझाया ,शायद इसके घर वालों को मेरे विषय में पता ही नहीं होगा इसलिए उन्होंने इसी के लिए भोजन भेजा है किंतु जब यह बता देगा कि मैं भी कार्य करता हूं तब शायद मेरे लिए भोजन अलग से और ज्यादा आ जाएगा। पानी पीकर जठराग्नि को शांत किया,थोड़ी राहत मिली। चाय वाला बोला -इस समय तो कोई भी कार्य नहीं है , खाना खाने के बाद मुझे नींद आ जाती है। तुम दुकान का ध्यान रखना मैं थोड़ी देर के लिए सो रहा हूं, कह कर वह दुकान के पीछे की तरफ जाकर सो गया। 

चतुर इतनी गर्मी में कहां बैठता ?पहले तो वह पेड़ के नीचे बनी ,नाई की दुकान पर, एक कुर्सी पर बैठ गया। तब भी उसे चैन नहीं मिला, तब वह सामने जो दुकानें  खुली हुई थीं । उनके सामने खाली स्थान पर, जाकर बैठा , उनमें से एक दुकान कपड़ों की थी। तो दूसरी दुकान साड़ियों की थी , और एक दुकान पर रेडीमेड कपड़े थे। इस तरह से तीन-चार दुकान, मिली हुई थीं  और वस्त्रों से ही संबंधित थी। बड़ी-बड़ी दुकानें  थीं  उनमें कूलर चल रहे थे, दोपहर का समय था, बिना बात के तो वह अंदर नहीं जा सकता, किंतु उसने इन चार दिनों में यह नोटिस किया था, कि इन दुकानों पर, महिलाएं -पुरुष खरीददारी के लिए आते हैं। दुकानदार उन्हें, ठंडा पानी पिलवाते हैं। तब चतुर ने सोचा -यदि ठंडे पानी के स्थान पर, कोई भी ठंडी ड्रिंक जैसे -'कोका कोला 'या थम्स अप पिलवाई जाए, तो शायद ज्यादा बेहतर रहेगा और वह अपनी उंगलियों पर हिसाब लगाने लगा उसे लगा ,यदि एक बोतल पर पांच पैसे भी बचते हैं और 10 बोतल बेचने पर मुझे आराम से 50 पैसे बच जाएंगे और लोग भी खुश हो जाएंगे  अपनी दुकान पर ,मुझे अपना सामान क्यों बेचने देंगे ? 

अभी कुछ देर पहले ही, गाड़ी से कुछ लोग उतरे, और साड़ियों की दुकान के अंदर चले गए। चतुर को न जाने क्या सूझा ?वह दौड़ता हुआ ,सीधा ''ठंडे पेय पदार्थों की दुकान पर पहुंचा ,उसने 'कोल्ड ड्रिंक 'वाले से 'कोल्ड ड्रिंक' की कीमत पूछी , और उससे बोला -यदि तुम मुझे 10 कोल्ड ड्रिंक उधार दे दो ! तो मैं कुछ देर में ही, तुम्हारे पैसे तुम्हें वापस लाकर दे दूंगा। 

उस दुकानदार को, चतुर पर विश्वास नहीं हुआ और उसने कोल्ड ड्रिंक देने से इनकार कर दिया ,बोला -तुम जैसे चालाक लड़कों को मैं अच्छे से समझता हूँ। भागो !यहाँ से...... 

 चतुर चाहता तो, चाय वाले से भी पैसे मांग सकता था किंतु उसने चाय वाले से पैसे नहीं मांगे और उसे सोते से उठाना भी उचित नहीं समझा। तब वह दूसरे कोल्ड ड्रिंक वाले के पास गया और उससे बोला -यदि मुझे, तुम एक घंटे के लिए, अपनी 10 कोल्ड ड्रिंक उधार देते हो तो मैं तुम्हारे पैसे लाकर वापस दे दूंगा। तुम्हें मुझ पर विश्वास करना होगा, मैं चाय वाले की दुकान पर ही, कार्य करता हूं। विश्वास न हो तो उससे जाकर पूछ  लो !

उस'' कोल्ड ड्रिंक'' वाले को ,किसी भी ,नए लड़के पर विश्वास तो नहीं था, किंतु उसने उसे आजमाना चाहाऔर बोला -तुम इनका क्या करोगे ?

मैं इन्हें बेचूंगा ,उसकी बात सुनकर दुकानदार हंसा और बोला -तुमसे कौन खरीदेगा ?

ये तुम मुझ पर छोड़ दो !तुम्हें एक घंटे के पश्चात तुम्हारे पैसे मिल जायेंगे। चतुर विश्वास से बोला। 

क्या ''कोल्ड ड्रिंक ''वाला चतुर पर विश्वास करेगा ?उसे ''कोल्ड ड्रिंक ''देगा। आखिर चतुर क्या करना चाहता है ?क्या वो सफल होगा ?

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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