Bichhadan

बिछड़ना है ,तो मिलना भी है। 

कुछ लोग बिछड़ते हैं ,मिलने के लिए ,

कुछ चले जाते ,बाहर रोजी-रोटी के लिए ,

कुछ दूर हो जाते ,अपनों सेअपने को पाने के लिए,

अहम टकराता बहुत, बिछड़ जाते तब बड़प्पन के लिए। 

यह सभी प्रेम का ही नया रूप है,' आस 'रहती ,मिलने की है। 


बिछड़ता जब ,कोई अपना ,दर्द होता बहुत,याद उसकी सताती। 

 प्रेम के ही सभी रूप हैं ,'आभास' उसके जीवन में होने का एहसास। 

बिछड़ना तो तब का है ,जब बिछड़ कर वापस न आए कोई ,

रह रहकर उसकी याद सताए,जाने वाला न भेजे संदेश कोई। 

उम्रभर का दर्द दे गया ,उसको याद कर रातों में जगता कोई। 

न कहीं ,उसका पता -ठिकाना ,मिलने की भी न आस  कोई। 

वो ये भी नहीं जानता ,जीवनभर उसकी याद में रातों को रोता कोई ,

ये कैसी ''बिछुड़न ''है ?पास ही न सही ,दूर भी नजर नहीं आता कोई। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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