बिछड़ना है ,तो मिलना भी है।
कुछ लोग बिछड़ते हैं ,मिलने के लिए ,
कुछ चले जाते ,बाहर रोजी-रोटी के लिए ,
कुछ दूर हो जाते ,अपनों सेअपने को पाने के लिए,
अहम टकराता बहुत, बिछड़ जाते तब बड़प्पन के लिए।
यह सभी प्रेम का ही नया रूप है,' आस 'रहती ,मिलने की है।
बिछड़ता जब ,कोई अपना ,दर्द होता बहुत,याद उसकी सताती।
प्रेम के ही सभी रूप हैं ,'आभास' उसके जीवन में होने का एहसास।
बिछड़ना तो तब का है ,जब बिछड़ कर वापस न आए कोई ,
रह रहकर उसकी याद सताए,जाने वाला न भेजे संदेश कोई।
उम्रभर का दर्द दे गया ,उसको याद कर रातों में जगता कोई।
न कहीं ,उसका पता -ठिकाना ,मिलने की भी न आस कोई।
वो ये भी नहीं जानता ,जीवनभर उसकी याद में रातों को रोता कोई ,
ये कैसी ''बिछुड़न ''है ?पास ही न सही ,दूर भी नजर नहीं आता कोई।
