ज्योति अभी ,अपने दफ्तर से निकली है और बस की प्रतीक्षा कर रही है, वैसे तो इन दिनों में बहुत गर्मी पड़ रही है गर्मी के कारण ,बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है।किन्तु क्या कर सकते हैं ?मजबूरी है ,काम पर भी तो, जाना है ,वैसे तो दफ्तर में,सुविधाएँ हैं, किंतु जो प्राकृतिक ठंडक है उसका अलग ही आनंद होता है। आज दोपहर से ही वातावरण थोड़ा, धुंधला रहा था ,न ही बारिश हो रही थी, किंतु ऐसा लग रहा था जैसे अभी बारिश होगी और लोगों को उसकी प्रतिक्षा भी थी। बरसात हो ,थोड़ी तो राहत मिले।
शाम के समय, ज्योति अपने दफ्तर से निकली और बस की प्रतीक्षा में खड़ी थी , तभी उसे ऐसे लगा जैसे उसकी नाक पर एक बूंद आकर गिरी है। उसने इधर-उधर देखा ,ऊपर देखा,कुछ देर पश्चात फिर से,ऐसा ही हुआ। वह इधर-उधर देखने लगी ,तभी उसके हाथ पर फिर से एक बूंद गिरी। उसे लगा ,जैसे किसी ने उसके ऊपर पानी गिराया हो किंतु कौन हो सकता है ?आसपास देखकर रह गई।
तभी दो-चार बूँदे और गिरी, अब तो उसे एहसास हो गया कि बारिश आने वाली ही , मन ही मन प्रसन्न हो गई ,वही क्या धीरे-धीरे बारिश की बूंदों ने और लोगों को भी एहसास करा दिया कि बरसात का आगमन होने वाला है। लोगों के चेहरे पर प्रसन्नता की लहर झूम उठी , किंतु साथ ही, कुछ लोग अपने घर की और शीघ्र ही ,प्रस्थान करने लगे। तो कुछ अपने आसपास की दुकानों पर अपने सामान संभालने लगे। ''बरसात का आने का सूचक है ,प्रसन्नता और खुशियों को लाना किंतु साथ ही वह सुरक्षा को भी, बल देती है।'' ज्योति भी प्रसन्न हुई किन्तु अभी तक उसकी बस नहीं मिल आई थी और एकदम से तेजी से बारिश आरंभ हो गई। ठंडी हवा भी चलने लगी, ज्योति का मन झूम उठा ,उसने सोचा -बस नहीं मिलती है तो ऑटो से चली जाऊंगी ,थोड़ी देर बरसात में ऐसे ही, चलती हूं। उसने अपना छाता खोला और बरसात का आनंद लेते हुए सड़क पर आगे बढ़ने लगी।
उसकी यह प्रतिक्रिया बहुत देर से एक लड़का देख रहा था, बरसात ने एकाएक अपना रूप दिखाना आरंभ किया और पहले से अधिक बढ़ गई। अब ज्योति को लगा कि वह ज्यादा दूर तक नहीं जा सकेगी। बरसात का आनंद भी नहीं ले पाएगी। तब उसने एक -दो ऑटो वाले से चलने के लिए कहा किन्तु उन्होंने जाने से इंकार कर दिया। वह वापस उसी बस अड्डे पर आ गई और वहीं खड़ी होकर बारिश की बूंद को हाथों में लेकर उनका आनंद लेने लगी। हवा तेज हो रही थी। जो छाता उसने अपने सिर पर लगाया हुआ था एक बार को तो वह भी उड़ गया। यह सब प्रतिक्रिया एक लड़का देख रहा था। उसने ज्योति के करीब आकर पूछा-आपको कहां जाना है ?
आपसे मतलब !
नहीं ,इतनी बरसात है, जाना तो मुझे भी है, मैंने सोचा -साथ हो जाएगा।
मुझे किसी के साथ की आवश्यकता नहीं कहते हुए ज्योति उन बारिश की बूंद को उछालने लगी, तब वह लड़का बोला -मुझे लगता है , बरसात के कारण ,आज बस देरी से आएगी। वैसे मेरा नाम 'साहिल 'है।
अच्छा नाम है ,तो मैं क्या करूं?
आपका इस तरह सड़क पर रुकना ठीक नहीं, लोग -बाग अपने-अपने घरों में चले गए हैं, और अभी तक बस भी नहीं आई है। तभी उसका फोन घन घना उठा , उधर से जाने कोई क्या कह रहा था ,?तभी वह बोला -मम्मी मुझे थोड़ी देर हो जाएगी। मैं इस तरह से, किसी को अकेला छोड़कर नहीं आ सकता , यहां पर एक लड़की अकेली है ,कल को कुछ बात हो गई तो मैं अपने आप को, क्या जवाब दूंगा ? हालांकि वह अलग होकर, यह बातें कर रहा था किंतु बातें कुछ इस तरीके से कर रहा था जिससे ज्योति भी सुन ले।
उसकी यह बात सुनकर ज्योति को अच्छा लगा कि यह एक अच्छा इंसान है, शायद मेरे कारण ही वह यहां पर है।
तब ज्योति ने उससे पूछा -क्या तुम किसी की प्रतीक्षा में हो ?
नहीं !
तब तुम किसके लिए कह रहे थे -कि मैं उसे अकेले छोड़कर नहीं आ सकता।
ओह !आपने मेरी बातें सुन ली, इस तरह किसी की बातें सुनना ,यह 'बेड मैनर्स 'है , यहां और कौन होगा मैं तुम्हारी बस की ही प्रतीक्षा में हूं तभी मैं यहां से जाऊंगा।
ज्योति को अच्छा लगा और बोली-मेरा नाम ज्योति है, और मैं पास में ही नौकरी करती हूं किंतु राजेंद्र नगर में रहती हूं। आज न जाने क्या बात हुई ?बस नहीं आई, यह देखकर मुझे अच्छा लगा कि दुनिया में आप जैसे लोग भी हैं , जो अपनी ही नहीं सोचते अन्य लोगों की भी परवाह करते हैं। बातों का सिलसिला चल निकला , और वह बरसात की शाम एक सुंदर शाम, एक हसीन शाम बन गई। साहिल और ज्योति की दोस्ती अच्छी और गहरी हो गई और यही दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। ज्योति को अब साहिल पर बहुत विश्वास हो चुका था, उसके लिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार थी। उसे लगा-अब समय आ गया है, घरवालों को, इस रिश्ते के बारे में बता देना चाहिए।
परिवार वालों ने उसकी बातें सुनी और साहिल से मिलने का कार्यक्रम बनाया किंतु साहिल नहीं आया घरवालों को कुछ शक हुआ, उन्होंने कहा था, कि अपने माता-पिता को लेकर हमारे घर आना किंतु वह नहीं आया। ज्योति को भी बुरा लगा ज्योति ने इसका कारण पूछा ,तो वह बोला -'मेरे घर वालों ने इस रिश्ते से इनकार कर दिया है, इसीलिए तुम्हारे माता-पिता से मिलने नहीं आए।
किंतु ऐसा क्या हुआ ? क्या तुमने उन्हें समझाया नहीं ? कि हम दोनों एक -दूसरे से प्रेम करते हैं।
मैंने बहुत समझाया किंतु उन्होंने इस रिश्ते से इनकार कर दिया। तुम्हारे घरवालों के इस व्यवहार से तो मेरे घरवालों ने भी अब इंकार कर दिया। कह रहे थे -हमें लग रहा है ,अवश्य ही इस परिवार में कोई झोल है।''
अब तो एक ही रास्ता बचा है ,साहिल ने ज्योति से कहा
वह क्या है?
हम दोनों भागकर शादी कर लेते हैं , और जब शादी हो जाएगी तो दोनों के ही घरवाले मान जाएंगे। उनसे हम कह भी सकते हैं -कि हमने पहले ही ,आप लोगों को बता दिया था लेकिन आप लोग ही नहीं माने। तुम ऐसा करना अपने घर के सभी जेवर और वस्त्र लेकर, मुझसे जंगल में मिलना।
जंगल में क्यों ? हम मंदिर ही चलेंगे वहां पर, रीति -रिवाज से शादी कर लेंगे और कानूनन शादी भी कर लेंगे।
हां यह सब तो करेंगे लेकिन जैसा मैं कह रहा हूं ,पहले वैसे करो ! उस जंगल में कोई आता -जाता नहीं है। पहले हम वही मिलेंगे ,घरवालों की हरकतें देखेंगे ,कभी हमारे पीछे लग जाएं। ज्योति को उसकी बात जम तो नहीं रही थी, किंतु वह उसके प्यार में पड़ी थी इसलिए उसे विश्वास करना पड़ा। ज्योति घर से, समय से कुछ पहले ही निकल गई। उसे लगा ,बरसात का मौसम है ,यदि समय पर ना निकल पाई तो क्या होगा ? यही सोचकर मैं समय से पहले ही निकल गई।
किंतु उसके निकलने के चार-पांच घंटे बाद, वह सूनी सड़क पर, भागती जा रही थी, किसी को देख छुप रही थी, रो रही थी। उसकी हालत बहुत ही अस्त - व्यस्त हो गई थी. आखिर ऐसा क्या हो गया ? तभी उसे चौराहे पर आता एक ऑटो उसे दिखलाई दिया ,वह ऑटो में बैठी और घर के लिए निकल गई। भीगती ,काँपती वह अपने घर में घुसी, और सीधे अपने कमरे में चली गई। परिवार वालों को तो पता ही नहीं था कि वह कहां गई है ,और इस हालत में कैसे वापस आ गई ? सोचा -किसी सहेली से मिलने गई होगी आते समय बरसात में भीगने के कारण कपड़े बदलने गई है।
आज बरसात उसे कितनी मनहूस,और कितनी डरावनी लग रही है? क्या कोई ऐसा भी कर सकता है ? उन घटनाओं को स्मरण करके वह रोये जा रही है। बाहर भी बारिश हो रही है, और उसके अंदर भी तूफान उमड़ रहा है ,?अपने को कितनी होशियार समझते थी और बेवकूफ बन गई। आज यह ''बरसात की रात ''उसके लिए जीवन का एक नया सबक लेकर आई थी। जब उसके अंदर का तूफान थम गया और बाहर भी बारिश रुक गई। तब उसने अपने कमरे का दरवाजा खोला और बाहर आई। माता-पिता उसकी प्रतीक्षा में, उसकी तरफ देख रहे थे कि आखिर ऐसा क्या हुआ था जो वह उसने आते ही ,दरवाजा बंद कर लिया और बात भी नहीं की। तब ज्योति ने अपने घर वालों से क्षमा याचना की और बोली -मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई, किंतु मैं समय रहते ही ,उस गलती के परिणाम से बच गई।
ऐसा क्या हुआ था? माता-पिता ने पूछा।
तब ज्योति ने उन्हें बताया, कि कल वह, उनसे बिना बताए, साहिल के साथ जाकर शादी करने वाली थी। हमारी योजना के अनुसार मैं कुछ देर पहले ही, पहुंच गई थी और मैंने मजाक में साहिल से कह दिया था- कि मुझे आने में थोड़ी सी देरी हो जाएगी। किंतु मैं वही छुपी हुई थी ,तब मैंने देखा, वह एक जीप से उतरता है उसके साथ उसके कई मित्र भी थे। जो गोल टोपी पहने हुए थे और कुर्ते -पायजामे में थे। गाड़ी से उतरकर उसके एक मित्र ने ,यार !सादिक़ वह मोहतरमा कब आ रही है ? साहिल को सादिक नाम सुनकर मैं छुपी रही और अपना फोन भी बंदकर दिया। जब मैंने उनकी बातें सुनी तो हतप्रभ रह गयी। साहिल ने अब तक मेरे साथ जो भी व्यवहार किया था, एक योजना के तहत था। मेरे लिए तो उसने नाम भी सोच लिया था - साबिया ! तब मैं वहां से भागी ,बारिश भी होने लगी थी .दिन में ही अँधेरा सा हो गया था। किन्तु मैंने अपनी ज़िंदगी में अँधेरा होने से अपने को बचा लिया। जो आज मैं आप लोगों के साथ खड़ी हूँ। ऑटो में बैठकर मैंने अपना फोन चालू किया। सादिक़ का फोन आया ,तुम कहाँ हो ?मैं प्रतीक्षा में हूँ। तब इसी बरसात का मैंने बहाना बनाया ,बरसात के कारण नहीं आ सकती।
माता-पिता ज्योति की, बातें सुनकर आश्चर्य चकित रह गए और उन्हें इस बात से भी शांति मिली कि वह इतने बड़े संकट से बच गयी। सादिक़ के भरम जाल से बच गई। बरसात की एक रात वह भी थी, जिसने साहिल को ज्योति से मिलाया था और एक रात कल ही गई , जिसने ज्योति की जिंदगी को, आने वाले तूफान से बचा लिया। वो रात ज्योति को था उम्रभर याद रहेगी, एक ऐसा अनुभव दे गई थी ,जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगी।

