जीवन की वो रात !
अद्भुत ,अपूर्व हो गई है।
प्रेम के वो क्षण ......
तेरी -मेरी मधुरिम रात हो गई है।
पुलकित मन, प्रेम में डूबा तन,
प्रेम की जैसे ,बरसात हो गई है।
तप्त धरा ,ओ गगन !
के मिलन की, रात हो गई है।
चांदनी रात में भी,
यह कैसी बरसात हो गई है ?
एक नवजीवन, नवीन राह ,
के आगमन की ,नई शुरुआत हो गई है।
मदभरे नैनों की,जीवन की वो रात !
अविस्मरणीय ,हमारी मुलाकात हो गई है।
