तेरी तस्वीर से ,जब चाहा बातें करती हूं।
अपने सभी दुख -दर्द बांटती ,बताती हूं।
तुम साथ रहकर भी ,साथ नहीं मेरे.....
तस्वीर से तेरी,जब शिकायतें करती हूं।
तुम कहते कुछ नहीं , पर सुनते तो हो।
बस यही सोच ,तनिक मुस्कुरा लेती हूं।
जब-जब तेरी तस्वीर से बातें करती हूं।
जिसे दिल चाहता है-
जिसे दिल चाहता ,
वो ! नहीं मिलता।
जैसा सोचता।
नहीं होता।
उस कुदरत के खेल निराले,
हम जो चाहें ,होने नहीं देता।
जरा सोचो!🤔🤔🤔🤔
कहीं सोचा उसने,
हमारा भला होगा।
हम बालक उसके,
उसने भला ही हमारा,
कुछ सोचा होगा।
उसके फैसले!
कठिन बहुत,
हमारे दिल की,
क्यों होने नहीं देता?
दिल उसे चाहता है,
मानता भी है,
फिर मनचाही वो !
क्यों ,होने नहीं देता ?
