प्रवीण की मम्मी ,जब घूमने के पश्चात ,अपने घर आती हैं ,तो प्रवीण प्रसन्न होते हुए ,अपनी मम्मी को खुशखबरी सुनाता है -मम्मी !मैं और मेरा एक दोस्त कारोबार आरम्भ कर रहे हैं ,उसे विश्वास था कि मम्मी ये बात सुनकर ,अत्यंत प्रसन्न होंगीं किन्तु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ बल्कि आज उसे एक नया अनुभव हुआ जिनकी हकीक़त जानकर वह हिल गया। ऐसे समय में ,ऐश्वर्या उसका सहारा बनने का प्रयास करती है। क्योंकि ऐश्वर्या ने प्रवीण और उसकी मम्मी की सभी बातें सुन ली थीं किंतु प्रवीण ,ऐश्वर्या से कोई भी बात बताना नहीं चाहता था, क्योंकि उसे लगता है- कि वह, इस बात पर उसे ताना देगी, जबकि ऐश्वर्या ने हमेशा उसे समझाना चाहा, वही शब्द उसे ताने लगते ,उसका 'अहम 'आहत होता। आज मेरे ये दिन आ गए ,अब ये मुझे समझाएगी।
किन्तु उसने ये नहीं सोचा ,ये मेरी अर्धांगनी है ,पढ़ी -लिखी है ,मैंने इससे प्यार किया है ,यदि यह कोई बात बता रही है ,तो सुनने में क्या जाता है ? मानना या न मानना ये मुझ पर निर्भर करता है, कोई जबरदस्ती तो कर नहीं रही है किन्तु यदि वह उसकी बातें सुन लेता है ,तो छोटा हो जायेगा ,यही उसकी सोच है, क्योंकि उसकी परवरिश ही ऐसी महिला के हाथों हुई है ,जिसने औरत होकर भी औरत का मान नहीं रखा। उसे मर्द बनना सिखलाया ,वो मर्द जिनके लिए औरत एक भोग्या के सिवा कुछ नहीं ,उसको अपने वश में करना सिखलाया और यदि वो महिला आवाज उठाती है या गलत को गलत ही कहती है ,तब थप्पड़ ,लात ,घूंसों से उसको चुप करा दिया जाता है। ऐसी अकेली ऐश्वर्या की ही सोच नहीं है ,उसके परिवार में, गांव में ,चंदा देवी के षड्यंत्रों का अधिकतर महिलाएं शिकार हुई हैं। जिन्होंने अपने अनुभव साझा किये थे कि किस तरह चंदा देवी ने ,अपने बड़े रिश्ते का लाभ उठाकर ,नौटंकी करके ,उनको उनके पतियों से ही ,कई बार पिटवाया।
कभी-कभी तो, ऐश्वर्या को चंदा देवी, एक ऐसी खुर्राट महिला लगती, जो औरतों की मंडी में ,मुँह में पान दबाये बैठी रहती और हंटर से वहां रहने वाली सभी महिलाओं की लगाम कसती। स्वयं ही उसे ,अपनी सोच पर दुःख होता किन्तु जो रूप उसने चंदा देवी का देखा है ,उससे अलग दूसरा रूप नजर ही नहीं आया। एक माँ कौशल्या भी थी ,एक माँ कैकेयी भी थी ,किन्तु दोनों को ही अपने पुत्रों से प्रेम था ,यदि कैकेयी स्वार्थी भी हुई तो पुत्र प्रेम के कारण....... यहाँ तो स्वयं उनके पति ,उनके सामने बोल नहीं पाते थे। बोलते तो कटु शब्द ही निकलते क्योंकि वहाँ का वातावरण काफी बोझिल था। सब एक -दूसरे को देखते और नजरें झुका लेते ,उनकी अपनी कोई सोच नजर नहीं आई।सभी में नकारात्मकता भरी हुई थी। इस सबसे एक बात तो हो रही थी ,वो ये कि अब वे दोनों करीब आ रहे हैं ,एक -दूसरे के साथ खड़े हैं ,ऐसा ऐश्वर्या को लगता है। एक -दूसरे की परवाह कर रहे हैं।
प्रवीण ने, कभी यह नहीं सोचने का प्रयास नहीं किया कि वह तेरे लिए कितनी चिंतित रहती है ? अपने भविष्य के लिए को लेकर कितनी सतर्क हो गई है ? किंतु क्या उसने एक बार भी ऐश्वर्या पर विश्वास जतलाया? जब ऐश्वर्या यही सब बातें सोचती, तो उसे बहुत दुख होता। प्रवीण के आने पर उसने सिर्फ प्रवीण से ही पूछा -अब आप क्या करेंगे ?
किस विषय में ?
अनजान मत बनिए, मैंने पहले ही सब सुन लिया है और आपको मेरा कहा बुरा लगता है , मैं इतने दिनों इन लोगों के साथ रहकर ,इनको समझाने लगी हूं। आप तो यहां बचपन से रह रहे हैं ? क्या तब भी नहीं समझ पाए ?
तुम मुझे भाषण मत दो !मुझे पता है ,जो मुझे करना है ,मैं कर लूंगा परेशान प्रवीण बोला।
' विश्वास 'बड़ी मेहनत से कमाया जाता है, और एक बार जब यह टूट जाता है तो यह फिर जुड़ता नहीं , जोड़ने का प्रयास भी करें तो एक दरार रह जाती है , तुम फिक्र ना करो ! मैं सब संभाल लूंगा देखता हूं क्या करना है ?कहकर बाहर चला गया।
एक सप्ताह हो गया ,प्रवीण ने कई दोस्तों से उधार माँगा किन्तु सभी ने अपनी -अपनी परेशानी जतलाकर अप्रत्यक्ष रूप से पैसा देने से इंकार कर दिया।जो दे भी सकते थे ,किन्तु उन्हें लगा ये उतारेगा कैसे ?यही सोचकर पैसे देने से इंकार कर दिया। प्रवीण अपनी ही उलझनों में फंसा हुआ था .क्या करे ,किससे पैसे मांगे ?उसे तो बैंक से भी 'लोन 'नहीं मिल सकता। उसके पास न ही अपनी कोई सम्पत्ति है ,न ही गारंटर ,इन्ही उलझनों में बैठा सोच रहा था ,तभी ऐश्वर्या ने पूछा -आपको कितने पैसों की आवश्यकता है ?क्या आपको पूर्ण विश्वास है ,ये काम अच्छा चलेगा।
अरे यार ! तुम मेरा दिमाग खराब मत करो ! तुम अपने काम से काम रखो !झुंझलाते हुए प्रवीण बोला।
ऐश्वर्या को प्रवीण का ये व्यवहार बुरा तो लगा किन्तु अपने मन को समझा लिया अभी परेशानी में ऐसा कह रहा है ,यही सोचकर अपनी अलमारी में गयी और एक डिब्बा वहां से निकालकर ले आई और बोली -इसे गिरवी रखकर , जो पैसा मिले ,अपने कारोबार में लगा लेना।
प्रवीण ने डिब्बा खोला ,तो उसमें एक सोने का सेट था ,क्या ये तुम्हारा है ? ऐश्वर्या ने हाँ में गर्दन हिलाई ,अभी भी बोला -ये तुम्हें मम्मी ने दिया था।
नहीं ,तुम्हारी मम्मी ने तो अगले दिन ही ,मुझसे लॉकर में रखने के बहाने से ले लिया था ,मांग तो इसे भी रहीं थीं किन्तु ये मेरा है ,मैने देने से इंकार कर दिया। ये मुझे मेरी मम्मी ने दिया था ,इस पर मेरा अधिकार है ,अधिकार तो उस हार पर भी मेरा ही था किन्तु जब रिश्तों में ही नहीं ,तब उस पर क्या अधिकार जतलाना ?मैं जानती थी ,बहाने से वापस ले रहीं हैं।
ऐश्वर्या की बात सुनकर ,प्रवीण थोड़ा लज्जित हुआ किन्तु मन ही मन प्रसन्न भी हुआ कि अब पैसों का इंतजाम हो जायेगा।
एक बात तो तय थी , चंदा देवी के इस व्यवहार के कारण, जो दोनों एक -दूजे के विरोधी नजर आते थे, आज एक साथ, बैठकर सोच रहे हैं। अपने भविष्य का हिसाब -किताब लगा रहे हैं, परिस्थितियाँ उन दोनों को एक दूसरे के करीब ला रही हैं , क्या वह इसी तरह? आगे भी करीब रहेंगे या फिर से परिस्थितियाँ बदलेगीं। ये जिंदगी का सामना मिलकर एक साथ करते हैं ,क्या प्रवीण का कारोबार चल निकलेगा ?क्या बिखरे रिश्ते फिर से एक हो जायेंगे ,या अभी मंज़िल दूर है , मिलते हैं -अगले भाग में......
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