ज़िंदगी रुलाती है ,तो बहुत कुछ सिखाती भी है। बाहर के लोग यदि न मिलें तो ,अपने रिश्ते भी बहुत कुछ सिखा देते हैं। ऐश्वर्या ने भी, अपने इन नजदीकी रिश्तों से भी बहुत कुछ सीखा। सकारात्मक दृष्टि से देखा जाये तो...... ज़िंदगी ने उसे बहुत कुछ सिखा तो दिया किन्तु एक दर्द उसे उम्रभर के लिए दे दिया। जिन रिश्तों को उसने अपना माना ,दिल से चाहा ,उनसे उसे धोखे के सिवा कुछ नहीं मिला। इन सबसे करीबी एक रिश्ता और है ,और वो है ,पति -पत्नी का ,एक वही रिश्ता है ,जिससे वे अन्य रिश्ते भी जुड़े थे और उन रिश्तों को भी उसने मान दिया किन्तु आज ऐश्वर्या महसूस करती है। उसके मन में जो सादगी ,भोलापन ,अपनापन ,प्यार और सम्मान था ,वो सब तो न जाने कहाँ तिरोहित हो गया ?एक अबोध बालपन की तरह वे भाव न जाने कहाँ चले गए ? अब उनकी जगह अविश्वास ,पुनः धोखा खाने का ड़र ,मन में उन रिश्तों के प्रति दबा कहीं क्रोध !जब भी कोई वाक्या ऐसा पड़ता ,तो तुरंत ही कोई न कोई बात उसे स्मरण हो आती। इतने बड़े जीवन में छोटी -छोटी ऐसी अनेक बातें हैं ,जिन्होंने उसे छला।
घर को कितना भी संवारने का प्रयास करते रहो ?किन्तु चार लोग यदि उसे तोड़ने पर या बिखेरने पर तुले हैं ,तब तुम्हें ऐसे में ,अपनी परवाह होनी चाहिए ,कहीं इस आंधी में तुम ही ,तो नहीं उड़ जाओगे। एक दिन तो ऐश्वर्या ने चंदा देवी को ,''रंगे हाथों ही पकड़ लिया ''वो ऐसे ही किसी घरेलू बात पर, प्रवीण से बात कर रहीं थीं। तब ऐश्वर्या ने जाना ,अचानक कैसे उसका व्यवहार बदल जाता है ?उसके घर में ,अंदर आने से पहले ही ,किसी न किसी बात को लेकर उसके ''कान भर देतीं हैं।'' ऐश्वर्या मन ही मन सोच रही थी -वो तो अच्छा है ,मेरा कोई दोस्त या रिश्तेदार नहीं आता वरना ये ''गलतफ़हमी के बीज ''बोने में देर न लगातीं।
ऐश्वर्या प्रवीण का चेहरा देख रही थी ,जो बड़े ध्यान से अपनी माँ की बातें सुन रहा था क्योकि अब ऐश्वर्या के घर में किसी न किसी बात पर क्लेश हो रहा था। जब वो प्रवीण से शराब पीने के लिए मना करती तो चंदा देवी का कथन था -इसे न जाने क्या आपत्ति है ?''इसके बाप के पैसों से पी रहा है ,अपनी कमाई के पैसों से पी रहा है।''एक दिन ऐसे ही प्रवीण शराब पीकर आया ,बच्चे उसके करीब गए किन्तु कुछ देर पश्चात ही वापस आ गए और बोले -मम्मी ! पापा के मुँह में से बदबू आ रही है। हालाँकि जब तक प्रवीण आता था ,तब तक बच्चे सो जाते थे , किन्तु अब बच्चे बड़े होने लगे थे। अब इतना शीघ्र नहीं सो पाते हैं।
ऐश्वर्या ने प्रवीण से आकर कहा -मैंने आपसे कितनी बार कहा ? कि इसे छोड़ दो !
मैं सारा दिन मेहनत करता हूँ ,कमाता हूँ ,तुम्हारी तरह घर में नहीं पड़ा रहता।
मैं भी घर में रहकर ,मेहनत करती हूँ ,बैठे -बिठाये खाने को कोई नहीं देकर जाता ,मैं इतना ही तो कह रही हूँ। इस बात का बच्चों पर गलत असर होगा ,इसे पीना छोड़ दो ! इससे पहले कि' ये लत बन जाये। '
नहीं छोड़ता ,तू कौन होती है ?मुझसे ऐसा कहने वाली कहते हुए प्रवीण ने ऐश्वर्या को धक्का दिया। ये क्या कर रहे हो ?क्या इतनी भी तमीज़ नहीं ,मैं तुम्हारी पत्नी हूँ।
पत्नी है ,तो क्या ?सिर पर चढ़ेगी।
तभी चंदा देवी घर में प्रवेश करती हैं ,उन्हें देखकर ऐश्वर्या चुप हो गयी ,वह नहीं चाहती थी ,कि चंदा देवी को कुछ भी पता चले ,और उन्हें 'पंच 'बनने का मौका मिले। किन्तु वो तो शायद ,यहीं कान लगाए रहती हैं। वे बोलीं -तू क्यों ,सारा दिन इसके पीछे पड़ी रहती है ? ये बच्चा नहीं है ,जो एक -एक बात तू इसे समझाएगी। इसे भी अक्ल है ,क्या सही है ,क्या गलत है ?
उनकी बातें सुनकर ,अब तो ऐश्वर्या से रहा नहीं गया और बोली -अक़्ल होती तो क्या ?बच्चों के सामने इस तरह शराब पीकर आते ?मैं इनसे शराब पीने के लिए ही ,तो मना कर रही थी ,जब कमाई कर रहें हैं ,तो इस तरह बर्बाद करने के लिए कमा रहे हैं। न जाने कैसे -कैसे काम चला है ?और अब इस तरह बर्बाद करना है।
तू क्या ले ?भड़कते हुए प्रवीण बोला ,उसे लग रहा था ,मेरी माँ के सामने ये मुझे जलील कर रही है। इस बात का चंदा देवी ने भी समर्थन किया।
मैं क्यों न लूँ ?मेरी गृहस्थी है ,जब जरूरत थी ,तो आप साथ नहीं थीं ,मैं इनके साथ थी। आपने ,इनके वो पैसे भी खा लिए और अब न जाने कैसे -कैसे हमने पैसों को इंतजाम किया ? मेरे गहने गिरवी रखे गए ,तब जाकर पैसे आये ,हालाँकि वो बताना नहीं चाहती थी ,किन्तु उसे लगा इन्हें एहसास कराना भी आवश्यक है। तभी उसे न जाने कितनी बातें एक साथ स्मरण हो आईं ? क्रोधित होते हुए ,ऐश्वर्या बोली और अब आप यहां हमदर्दी जताने आ जाती हैं। क्यों हमारी ज़िंदगी में दखलंदाजी करती हैं ? ये औलाद आपकी है ,किन्तु आज तक एक भी अच्छा गुण जो इनमें हो , मुझे दिखला दीजिये। मुझसे तो कहतीं हैं -'तेरी माँ ने तुझे क्या सिखाया ?'' मैं आपसे पूछती हूँ ,आप भी तो माँ हैं ,आपने अपने बेटे को क्या सिखाया ? उसे समझाना तो दूर...... हमेशा गलत बातों का समर्थन करती हैं।
जब तुझे इसमें कोई गुण नजर नहीं आता है ,तो तू यहाँ क्या कर रही है ?अपने घर क्यों नहीं चली जाती ?ऐंठते हुए चंदा देवी बोलीं।
क्यों चली जाऊँ ?भागकर नहीं आई हूँ , इनके पीछे नहीं पड़ी थी ,बाक़ायदा बारात गयी थी और मेरे पिता ने ''कन्यादान ''किया था। मुझे तो ये पसंद भी नहीं थे किन्तु मेरी मम्मी ने मुझे समझाकर विवाह के लिए तैयार किया था -'कि लड़का तुझे पसंद करता है ,जो लड़का प्यार करता है ,तो तेरे लिए कुछ भी करेगा '' क्रोध में ऐश्वर्या बोलती गयी। मन में आया ,आज इनके मुख से इनके दिल की बात निकली है।
तू इससे क्या करवाना चाहती है ? माँ -बाप से अलग हो गया ,अब क्या मेरा यहाँ आना भी तुझे खटकता है ?कहते हुए चंदा देवी ने अपना पासा फेंका और रोना आरम्भ कर दिया -अरे !!इस औरत ने ,मुझसे मेरा बेटा छीन लिया ,और कभी -कभार इससे मिलने आ भी जाती हूँ ,इससे वो भी बर्दाश्त नहीं होता। अब ऐसे में बाहर का कोई देखे और सुने तो लगे ,बहु -सास को कह रही है। स्थिति को सुलझाने की बजाय ,उन्होंने अपने व्यवहार से और उलझा दिया। पति -पत्नी के आपस के झगड़े को कोई और रूप ही दे दिया।
उनके इस व्यवहार से ऐश्वर्या हड़बड़ा गयी ,और सोचने लगी ,इन्हे मैंने ऐसा क्या कह दिया ? मैंने कभी आपको यहाँ आने से मना नहीं किया ,रही बात ,अलग होने की वो भी ,आपने ही हमें अलग किया। इनसे पूछो ! क्या कभी मैंने घर से अलग होने की बात कही ?
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